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बैंकों के विलय पर सरकार के विरोध में मजदूर संघ परिवार, अब होगा बड़ा फैसला

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(image credits: amar ujala)

देश में चल रही मंदी से लोग खासा परेशान है और साथ ही कई बैंको में विलय के भी संकेत है। मोदी सरकार जिस प्रकार मंदी दूर करने के तरीके निकाल रही है उससे कोई फायदा नहीं हो रहा। ऐसे में कई बैंको का दिवालिया निकलने के भी आसार नजर आ रहे है। कई कारोबारी परेशान है यहाँ की बड़ी कम्पनियाँ भी थप पड़ गयी है। 

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दूसरी और कई लोगो ने मोदी सरकार के फैसलो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों के विलय के फैसले पर संघ परिवार की श्रमिक इकाई भारतीय मजदूर संघ ‘बीएमएस’ ने मोर्चा खोल दिया है। बीएमएस का कहना है कि वह सरकार की इस नीति के खिलाफ हैं। इस मामले में बैंकों के अन्य यूनियनों और संगठनों से संपर्क में हैं और सब मिल कर जो भी निर्णय लेंगे, उस पर अमल होगा।

भारतीय मजदूर संघ के महासचिव बिरजेश उपाध्याय ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों के सरकार की नीति के वह खिलाफ हैं। यह बैंकों के निजीकरण की तरफ बढ़ाया गया एक कदम है। यह अर्थव्यवस्था के हित में नहीं है, क्योंकि इससे रोजगार के अवसर कम होंगे और समाज के हाशिये पर रहने वाले लोग बैंकिंग सुविधा से धीरे धीरे दूर होते जाएंगे।

दूसरी तरफ बैंक कई लोगो की छटनी करने में लगी है। रोजगार के अवसर काफी कम नजर आ रहे है। इसी बात के चलते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इन सवालों के सही सही जवाब देने में असमर्थ रही है। 

 बिरजेश उपाध्याय ने कहा एक दशक पहले आई विश्वव्यापी मंदी को याद करते हुए कहा कि उस समय जब अमेरिका में मंदी आई थी तो उसका कारण कुछ बड़े बैंकों का फेल होना था। उस समय भी भारत पर उस मंदी का कोई खास असर इसलिए नहीं हुआ क्योंकि तब भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के छोटे-छोटे बैंकों की अर्थव्यवस्था पर मजबूत पकड़ थी। वह आम जनता से सीधे जुड़े थे। अब बैंक तो बड़े हो जाएंगे, लेकिन वह आम जनता से, हाशिये पर रहने वाले परिवारों से दूर हो जाएंगे।


मोदी सरकार जनता के भरोसे पर खरी नहीं उतर रही। यह साफ़ साफ़ दिख रहा है की केंद्र सरकार बैंको को हो रहे नुकसान और मंदी को काबू में करने के में असफल हो रही है। सीतारमण भी इस मामले को लेकर रिपोर्ट जारी नहीं कर रही चाहे वह मंदी की रिपोर्ट हो या फिर रोजगार की रिपोर्ट हो। मोदी सरकार लोगो को अन्धकार में धकेल रही है और भविष्य के साथ खिलवाड़ भी कर रही है। 

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