fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अन्य

दिल्ली में रविदास मंदिर तोड़ने पर पंजाब में लोगो ने किया विरोध प्रदर्शन

People-protested-in-Punjab-on-breaking-of-Ravidas-temple-in-Delhi
(image credits: hindustan times)

हाल ही में दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में एक विवादित जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। यह जमीन इसलिए विवादित है क्यूंकि उस जमीन पर एक खास समुदाय का धर्मस्थल होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि इस जमीन को लेकर काफी समय से कोर्ट में मामला चल रहा था। 

Advertisement

खास समुदाय के लोगों का कहना है कि ये धर्मस्थल करीब 500 साल पुराना है, जिसे उनके धर्म गुरुओं ने बसाया था। जमीन करीब 12 बीघा के आसपास है, जिसके एक हिस्से में उनका एक छोटा-सा धर्मस्थल बना हुआ है। डीडीए ने इसे अपने अधीन ले लिया था और चारो तरफ बाउंड्री बनवा दी थी। हालांकि धर्मस्थल पर जाने का रास्ता छोड़ दिया था। इस जमीन को लेकर डीडीए से उनका विवाद चल रहा था। 

जमीन को लेकर मामला निचली अदालत से हाईकोर्ट और उसके बाद जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तो शीर्ष कोर्ट ने इसे फौरन यहां से हटाने का आदेश दे दिया। इसको लेकर एक समुदाय के लोगो में बेहद नाराजगी बनी हुई हैं। और इसे लेकर वह 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। 

दूसरी और इस विवादित जमीन को लेकर पंजाब के रायकोट में भी कुछ लोगो द्वारा दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ धरना दिया जा रहा हैं। दलित भाईचारे के लोगों ने सिख जरनैल हरी सिंह नलवा चौक पर इसका विरोध जताया। 

गुरुद्वारा भक्त रविदास जगराओं रोड के प्रधान बूटा सिंह सपरा ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि, तुगलकाबाद दिल्ली में यह मंदिर प्राचीन था, जिसे सैकड़ों साल पहले दिल्ली के समकालीन शासक सिकंदर लोधी की तरफ से भक्त रविदास को जमीन भेंट की थी। जो अब भी दिल्ली माल विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है। इसी कारण संसारभर की संगतें की भावनाओं इस मंदिर के साथ जुड़ी हुई हैं। 


हालांकि इस खास समुदाय के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस धर्मस्थल को कहीं और शिफ्ट करना चाहिए था।  इसके बाद कोई कदम उठाया जाना चाहिए था। 

बता दें की इसी कारन सूबेभर में धरने और हाईवे को जाम किया गया।  नेताओं ने बताया कि 13 अगस्त को रायकोट के डीएम को एक मेमोरंडम सरकार को भेजने के लिए दिया जाएगा। इस मौके पर मुखत्यार सिंह छापा, मास्टर अवतार सिंह चीमा, गुरमीत सिंह, बलवीर सिंह रायकोट, सुखविंदर सिंह सीवाे,आदि शामिल रहे। 

भक्त रविदास से समबन्धित इस विवादित जमीन पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उचित नहीं लगता है। करीब 500 वर्ष पुराने इस धर्म स्थल को लेकर कोर्ट का यह निर्णय लोगो की भावनाओ को ठेस पहुंचाने वाला लगता है। 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved