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मथुरा में भाजपा नेता की गाड़ी रोकना पुलिसकर्मी को पड़ा भारी

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(Image Credits: Jagron)

चुनाव शुरू हो चुके है और इस समय अधिकतर लोग वोट देने बाहर निकल रहे है। सभी पार्टियों के नेता लोग इसी उम्मीद में बैठे है की जीत उनकी हो। परन्तु कुछ नेताओं को जीत से पहले ही घमंड आ गया है। वह ना तो किसी कानून को मानते है ना ही अपने से ऊपर किसी अफसर को। हालही में खबर आयी है की एक पुलिसकर्मी द्वारा नेता की गाडी रोके जाने पर बवाल मच गया। ओर वह नेता कोई और नहीं बल्कि भाजपा का था। जो चुनाव से पहले चौकीदार होने का दावा कर रहे थे अब वही लोगो की रक्षा करने वाले पुलिस कर्मी के साथ भिड़ रहे है।

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मामला यूपी के मथुरा का है जहाँ चेकिंग के दौरान भाजपा नेता की गाड़ी रोकना पुलिसकर्मी को भारी पड़ गया। गाड़ी में बैठे कार्यकर्ताओं ने हंगामा खड़ा कर दिया। इसके बाद पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं में जमकर झड़प हुई। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मी पर 500 रुपए रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया। करीब एक घंटे चले इस बड़े ड्रामे से अफरा-तफरी का महौल बना रहा।

दरअसल, मथुरा के गोवर्धन कस्बे के बस स्टैंड के पास भारतीय जनता पार्टी का चुनाव कार्यालय बना हुआ है। यहां रोज भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का आना जाना होता है, लेकिन गुरुवार को गोवर्धन पुलिस ने एकता तिराहे पर चेकिंग अभियान चलाया था। इसी दौरान मथुरा भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश की गाड़ी भाजपा कार्यालय को जाने के लिए तिराहे से गुजर रही थी। पुलिस चेकिंग में ड्यूटी कर रहे हेड कांन्स्टेबल जय प्रकाश ने भाजपा के मथुरा जिलाध्यक्ष की गाड़ी को चेकिंग के लिए रोक ली।

पुलिस के गाड़ी रोकते ही उसमें बैठे भाजपा कार्यकर्ताओ ने हंगामा कर दिया। भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस कर्मी में जमकर झड़प हुई और एक-एक करके मौके पर भाजपा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लग गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मी पर 500 रुपए रिश्वत मांगने का आरोप भी लगाया। वहीं, पुलिसकर्मी खुद वीडियो बनाते समय अपने वरिष्ठ अधिकारियों से अपनी स्वयं की जांच कराने की बात कहता रहा। करीब एक घंटे चले हंगामें के बाद गोवर्धन विधानसभा के विधायक कारिंदा सिंह के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया।

चुनाव से पहले लोगो की जिम्मेदारी लेने वाले नेता लोग अपनी गुंडई पर उतर आये है। भाजपा सरकार में इस प्रकार के नेता लोगो को शामिल कर एक चोर चौकीदार की टीम बना रहे मोदी पर सवाल उठने लगे है। चुनाव से पहले और चुनाव के बाद भी मोदी सरकार प्रचार में लगी है। ना तो मोदी पर केस होता है न ही उनके कार्यकर्ताओं पर। आखिर ऐसे समय में कानून होता है जो इन भाजपाइयों की गुंडागर्दी नहीं देख पाती।


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