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मोटर वाहन अधिनियम को लेकर इस बीजेपी मंत्री ने कहा, “अपने ही नहीं दे रहे साथ

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(image credits: the indian express)

बीजेपी के कई ऐसे फैसले होते है जिसमे कभी कभी उनकी पार्टी के ही लोग असहमति जताते  है। कई ऐसे फैसले भी है जो देश के हित में है परन्तु उस पर भी पार्टी के लोग असहमति व्यक्त करते नहीं थकते। ऐसे ही केंद्र सरकार ने ट्रैफिक नियमो को तोड़ने पर लगने वाले चालान को कई गुना बढ़ा दिया है।

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हालांकि चालान के बढ़ने से लोगो को खासा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है परन्तु नियम तोड़ने वालो को सबक सिखाने का यह अच्छा तरीका भी है। परन्तु बीजेपी के कई ऐसे क्षेत्र है जहाँ खुद बीजेपी के लोग ही ट्रेफिक नियमो के खिलाफ जा रहे है। ऐसे में साफ़ पता चलता है की भजपा सरकार में आपसी मतभेद ख़त्म नहीं हो रही।

मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन के बाद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। कई राज्यों ने जहां अभी इसे लागू नहीं किया है वहीं कुछ राज्य जुर्माने की राशि में कटौती कर इसे लागू कर रहे हैं। इस पर बीजेपी के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है की जब अपने ही साथ नहीं देंगे तो इसका परिणाम भी भुगतने को तैयार हो जाए।

नितिन गड़करी का कहना है कि जुर्माने की राशि को कम करना राज्यों के अधिकार क्षेत्र में है लेकिन उन्हें इसके परिणाम भी भुगतने होंगे। मालूम हो कि नए मोटर वाहन कानून में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने, शराब पीकर वाहन चलाने, बिना हेलमेट के वाहन चलाने, बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाने और ओवरलोडिंग के मामलों में जुर्माने की राशि में 10 गुना तक बढ़ोतरी कर दी गई है।  

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विषय संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है। ऐसे में राज्य चाहे तो जुर्माने की राशि घटा सकते हैं। हालांकि नितिन गडकरी ने यह भी कहा सरकार की मंशा इससे राजस्व हासिल करना नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी को सुरक्षित करना है। परन्तु लोगो का यही सवाल है की आखिर क्यों इतनी ज्यादा रकम जुर्माने के तौर पर ली जा रही है।


गडकरी ने कहा जब भारतीय विदेश जाते हैं तो उन्हें वहां के ट्रैफिक नियमों को मानने में दिक्कत नहीं होती है। वहीं, लोग अपने देश में नियमों की कद्र नहीं करते। एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में गडकरी ने कहा कि 30 साल पहले के 500 रुपये की आज वैल्यू 5000 है। देखा जाए तो लोगो की सुरक्षा के लिए यह एक बड़ा कदम है परन्तु चालान को मोटर वाहन अधिनियम के चलते लोग ख़ासा परेशान है तो दूसरी और बीजेपी शाषित क्षेत्र में इस नियम के खिलाफ जा रहे है।

लोगो का दिल जितने और चुनाव में जीत हासिल करने के लिए राज्य सरकार अपनी ही सरकार को नाराज कर रही है। 

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