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रिपोर्ट में खुलासा: क्यों राजस्थान में लगातर बढ़ रहे है दलितों पर अत्याचार के मामले

(image credits; india today)

राजस्थान में अभी भी दलितों के ऊपर होने वाले अत्याचार के मामले बाकी प्रदेशो के मुकाबले अधिक देखने को मिलते है। राजस्थान में अपने हक के लिए दलित अब भी लड़ रहा है या हम यह भी कह सकते है की लोगों की सामंती मानसिकता ने अब भी दलित वर्ग को भेदभाव के दलदल में धकेलने का काम कर रही है।

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देश में दलित अत्याचारों के मामलों में तीसरे स्थान पर रहे राजस्थान में गत तीन वर्षों में 17 हजार से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। जैसे हालात अभी राजस्थान में बने हुए है उसके अनुसार उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान में यह मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। अगर हम आंकड़ों की बात करे तो आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में छह प्रतिशत दलित है वही राजस्थान में कुल होने वाली अपराधों में 17 प्रतिशत दलितों के ऊपर किये जाते है यह आंकड़े काफी चौकाने वाले है क्यूंकि यह लगातार बढ़ रहे है।

आज भी गांवों से शहर तक में दलितों को अपने हक के लिए लड़ाई लडऩी पड़ रही है। सरकार इन अत्याचारों को लेकर पीडि़त पक्षों को तय राशि जरूर देती है, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई राह नहीं तलाशी गई जिससे इन अत्याचारों पर विराम लग सके। जिला स्तर निगरानी कमेटी अत्याचारों पर पैसा स्वीकृत करती है। कानून में 2015 में हुए संशोधन के आधार पर कलक्टर पैसा स्वीकृत करते हैं। 85 हजार से लेकर 8 लाख 25 हजार रुपए तक राशि दी जाती है। जितने भी गंभीर अत्याचार से पीडि़त है, उनके लिए कुछ संगठनों ने एक योजना बनाकर सरकार को सौंपी थी, जिसमें राजस्थान रूल्स 15 के तहत आकस्मिकता योजना बनानी थी, जो अब तक नहीं बनाई गई है। अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कमेटी हर जिले में बनी हुई है पर इन कमेटियों को रहते हुए भी हालात बाद से बद्तर होते जा रहे है।

सरकार की प्राथमिकता में दलितों पर हो रहे अत्याचारों का निदान शामिल नहीं है। कानून बने हुए हैं, उन्हें लागू नहीं करना चाहते हैं। उच्च स्तरीय निगरानी एवं सतर्कता कमेटी है, पिछली बार 2012 में बैठक हुई थी। गत सात वर्ष से बैठक ही नहीं हुई।

हाईकोर्ट के आदेश 15 जुलाई 2015 को जारी किए गए थे, लेकिन जिला सतर्कता एवं निगरानी कमेटी सभी जगह गठित नहीं है। जिला स्तरीय कमेटी की बैठक प्रति तीन माह में होनी चाहिए लेकिन होती नहीं है। दलितों में महिलओ के साथ होने वाले मामलो में बढ़ोतरी देखी गई है जिसमे बड़ी मात्रा में दलित महिलाओ क्र साथ हुए दुष्कर्म के मामले सामने आये है।


राजस्थान के साथ साथ ही गुजरात में भी पहले के मुकाबले दलित उत्पीड़न के मामले बढे है। बीते 2 -3 वर्षो में गुजरात से कई ऐसे मामले सामने आये है जिसने सबको झंकझोर कर रख दिया। प्रधानमंत्री मोदी के गढ़ में दलितों के प्रति बढ़ते अत्याचार के मामले बेहद चौकाने वाले है।

दलितों के प्रति होने वाले अपराधों की निगरानी के लिए ही नए नियमो को लागू भी किये गए थे जिसमे 15 मई 2017 से पहले जो मुकदमे होते थे, पहले ये ऑफ लाइन थे, अब ऑनलाइन हो गए हैं ताकि प्रदेश में होने वाले अपराधों का रिकॉर्ड सही मायने में रखा जा सके नियम अनुसार प्रत्येक थानाधिकारी को अपनी एसएसओ आईडी से SJMS पोर्टल पर पीडि़त पक्ष को सहायता के लिए आवेदन दर्ज करना होता है। ऑनलाइन प्रकरण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के पास जाएगा, वह इसे जांच कर स्वीकृति देगा।

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