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मुस्लिम नहीं दलित हैं SP उम्मीदवार शब्बीर अहमद, जानिए इनके बारे में

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। शुक्रवार को पार्टी ने 6 कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी की। लिस्ट में सपा के पहले छह नामों में मुलायम सिंह के अलावा बदायूं से धर्मेंद्र यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव, इटावा से कमलेश कठेरिया, रॉबर्ट्सगंज से भाईलाल कोल और बहराइच से शब्बीर वाल्मीकि के नाम शामिल हैं।

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सपा ने लोकसभा की अरक्षित सीट बहराइच से शब्बीर अहमद वाल्मीकि पर दांव खेला है. 2014 के लोकसभा चुनाव में शब्बीर अहमद बीजेपी की सावित्री बाई फुले से करीब 95 हजार वोटों से हार गए थे. शब्बीर अहमद को सपा ने अपने दलित होने की वजह से उम्मीदवार बनाया है। दरअसल, शब्बीर अहमद एक मुस्लिम नाम होने के बावजूद वह दलित प्रत्याशी हैं। उन्होने खुद को दलित साबित करने के लिए कानूनी लडाई भी लड़ी और उसे जीता भी है।

शब्बीर अहमद बताते हैं उनके मुस्लिम नाम की शुरुआत उनके जन्म के साथ ही शुरू हुई. उन्होंने बताया, “मेरे पिता बबेरू लाल वाल्मीकि ने एक बच्चे के लिए तीन शादियां की. जिसके बाद मैं पैदा हुआ. इसके बाद मुझे बुरी आत्माओं से बचाने के लिए एक मुस्लिम दंपति को 300 रुपये में बेच दिया गया. इसके बाद उस मुस्लिम परिवार के पास मैं कुछ दिनों तक रहा और मुझे नाम दिया गया शब्बीर अहमद।

शब्बीर अहमद ने बताया कि वे उस मुस्लिम परिवार से फिर दुबारा कभी नहीं मिले. उन्हें यहां तक पता नहीं है कि वे जिन्दा भी हैं कि नहीं ।
शब्बीर अहमद का नाम इन्हें दलितों के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं में भी फेमस बनाता है. शब्बीर अहमद 1993 से 2012 तक चार बार विधायक भी रहे. यही नहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में वे दूसरे नंबर पर थे. इस बार वे सपा बसपा गठबंधन के प्रत्याशी है. लिहाजा उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. मौजूदा बीजेपी सांसद भी कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं. उम्मीद है वे कांग्रेस की तरफ से यहां मैदान में होगी. ऐसे में बीजेपी के लिए इस सीट को बचाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होगा.


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