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राम के जन्म स्थान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने की अहम् टिप्पणी, जानिए आखिर ऐसा क्या कहा

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(image credits: the hindu)

रामजन्म भूमि को लेकर एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बात कही हैं। रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्ष ने अपनी अपनी दलीले सामने रखी। परन्तु अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को लेकर अहम् टिप्पड़ी कर सबको चौका दिया है।

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1991 में आई चार इतिहासकारों की वो रिपोर्ट जिसमें बाबरी मस्जिद वाली जगह को राम जन्म भूमि बताने के दावे को खारिज किया गया था, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इतिहासकारों की यह रिपोर्ट एक बेहतर ‘राय’ तो हो सकती है लेकिन मामले पर फैसला देने के लिए इसे ‘सबूत’ के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह ज्यादा से ज्यादा एक ‘राय’ हो सकती है।

बता दें कि जस्टिस चंद्रचूड़ उस पांच सदस्यीय संविधान बेंच का हिस्सा हैं जो राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक विवाद की सुनवाई कर रहा है। जज ने यह बात एडवोकेट राजीव धवन से बातचीत के दौरान कही । धवन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की पैरवी कर रहे हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब धवन ने अदालत का ध्यान ‘राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद, ए हिस्टोरियंस रिपोर्ट टु द नेशन’ की ओर दिलाया। इस रिपोर्ट के लेखक आरएस शर्मा, एम अतहर अली, डीएन झा और सूरज भान हैं। धवन ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला देते वक्त इस रिपोर्ट पर विचार नहीं किया। धवन के मुताबिक, ‘शायद इसलिए क्योंकि डीएन झा ने इस पर साइन नहीं किए थे।’

बता दें कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगाई की अध्यक्षता वाली बेंच 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिए फैसले को खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबड़े ने धवन से कहा, ‘उन्हें रिपोर्ट तैयार करने के लिए किसने  कहा था?’ वहीं, मस्जिद के पक्ष की पैरवी करने वाले सीनियर वकील जफरयाब जिलानी ने बताया कि वे इतिहासकार के एक विचार विमर्श में शामिल हुए थे और खुद से यह रिपोर्ट तैयार की थी।


हालांकि, रिपोर्ट को ‘राय’ बताए जाने के खिलाफ धवन ने कहा की यह ‘निश्चित तौर पर यह राय नहीं है। यह विशेषज्ञों का इतिहास है।’ इसके बाद, धवन ने  रिपोर्ट में छपी बातों का जिक्र किया। हालांकि, बेंच इससे प्रभावित नहीं हुई । जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘यह बातचीत के दौरान विश्व हिंदू परिषद के रुख को लेकर प्रतिक्रिया थी। जैसे विहिप की कही गई बातें हमारे समक्ष इतिहास की तरह नहीं रखी जा सकतीं, वैसे ही ये भी।’

धवन ने इस बात को खारिज किया कि यह रिपोर्ट विश्व हिंदू परिषद को एक जवाब के तौर पर दिया गया था। हालांकि, बेंच ने साफ किया कि रिपोर्ट में यह बात साफ की गई है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘यह अलग बात होती अगर इतिहासकार आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से रखे गए सबूतों पर प्रतिक्रिया देते।’ बता दें कि एएसआई ने हाई कोर्ट के आदेश पर उस स्थल की खुदाई की थी।

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट भी मानने लगा है की वह भूमि श्री राम की है। पेश किये गए सभी रिपोर्ट को कोर्ट ने ख़ारिज करके यह संकेत दे दिए है की आने वाले समय में राम मंदिर का निर्माण होना तय है। ऐसे में बाबरी मस्जिद के पक्ष में और क्या दलीले राखी जाएँगी यह आगे होने वाली सुनवाई में ही पता चलेगा।  

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