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तमिलनाडु: जातिगत पहचान के लिए छात्र पहनते थे विभिन्न रंगों के बैंड? बीजेपी नेता ने इसके प्रतिबंध का किया विरोध?

Tamil-Nadu:-Students-wore -bands-of-different-colors-for-caste-identity?-BJP-leader-opposes-its-ban?
(image credits: newsbugj)

दक्षिणी भारत में तमिलनाडु ने जातिगत भेदभाव को लेकर एक अहम फैसला लिया है। दरअसल तमिलनाडु में जाति से जुडी एक अजीब ही मामला सुनने को आ रहा है, जहां छात्र अपनी कलाई पर बैंड पहनकर अपनी जाति को संकेत देते है। इसको लेकर स्कूल एजुकेशन के डायरेक्टर ने एक सर्कुलर जारी करते हुए अधिकारियों से कहा कि वो छात्रों की कलाई पर बैंड पहनने की प्रथा पर रोक लगाएं, जिससे उनकी जाति की पहचान होती है।

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वहीं दूसरी और इस सर्कुलर का बीजेपी नेता द्वारा आलोचना की गई और इसे हिन्दू विरोधी बताया गया। बीजेपी नेता द्वारा सर्कुलर पर इस प्रकार की प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है।

हालांकिे इस रिपोर्ट के सामने आने के कुछ दिनों बाद प्रदेश के स्कूल एजुकेशन मिनिस्टर ने यह कहते हुए अधिसूचना रद्द कर दी कि स्कूलों में ऐसी कोई प्रथा मौजूद नहीं है। बता दें की शुक्रवार (16 अगस्त, 2019) को ए सेनगोट्टैयन अपने बयान में कहा कि, स्कूलों में मौजूदा मानदंड जारी रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘अपनी जातिगत पहचान के लिए स्कूलों में कलाई बैंड पहनने वाले छात्रों का ऐसा चलन नहीं है। वर्तमान में स्कूलों में जो भी मानदंड हैं, वे जारी रहेंगे, कोई नए नियम नहीं हैं।’

मंत्री ने कहा, सर्कुलर एक समूह (2018 बैच के ट्रेनी आईएएस अधिकारियों) द्वारा प्रतिनिधित्व पर आधारित था। उन्होंने कहा, ‘उसके आधार पर, यह सर्कुलर संबंधित अधिकारी द्वारा मुझसे सलाह किए बिना जारी किया गया था। यही अब इस भ्रम का कारण है। अगर किसी स्कूल में ऐसी प्रथाएं मौजूद हैं, तो हम निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे। मुझे अब तमिलनाडु के स्कूलों में ऐसी किसी भी प्रथा की जानकारी नहीं है।’

ध्यान देने वाली बात है की सेनगोट्टैयन का बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब दो दिन पहले प्रदेश भाजपा महासचिव एच राजा ने सर्कुलर को ‘हिंदू विरोधी कृत्य’ करार दिया था। बीजेपी महासचिव ने AIADMK के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से सर्कुलर वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल ऑफ़ एजुकेशन के डायरेक्टर से पुछा की, क्या उन्होंने अन्य धर्मो के प्रतीकों पर रोक लगाने का सोचा है।


दरअसल सर्कुलर 31 जुलाई को जारी हुआ, जिसमें सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से उनके जिले में ऐसे स्कूलों की पहचान करने के लिए कहा जिसमें इस तरह के भेदभाव किया जाता है और ऐसे स्कूल संचालकों के प्रमुखों को निर्देश जारी करें कि वो ऐसी प्रथा पर तुरंत रोक लगाएं।

इसके साथ ही उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने को कहा जो ऐसी प्रथाओं को लिए जिम्मेदार हैं। सर्कुलर कहता है कि कलाई बैंड लाल, पीले, हरे और केसर के विभिन्न रंगों में होते हैं ताकि उनकी जाति की पहचान हो सके।

बीजेपी महासचिव ने भेदभाव रोकने के लिए जारी सर्कुलर के संदर्भ में ऐसा बयान क्यों दिया है, यह उनसे बेहतर कोई और नहीं बता सकता है। खैर कुछ भी हो उनके बयान को किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता है।

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