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भाजपा से जुड़े पूर्व दलित सांसद बीड़ी बनाकर कर रहे है गुजारा, आज भी चलते है साईकिल से

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(Image Credits: Navbharat Times)

आज के दौर जब भी हम सांसद या पूर्व सांसद शब्द सुनते है तो हमारे मन में एक साधन संपन्न और रसूखदार व्यक्ति की छवि मन में उभर आती है। मगर मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में एक ऐसे दलित पूर्व सांसद हैं, जिनकी छवि इसके ठीक उलट है। वह साइकिल से चलते हैं और वक्त मिलने पर बीड़ी भी बना लेते हैं। पूर्व सांसद अपनी रोज़ी रोटी चलाने के लिए मीलो दूर साईकिल से सफर करते है और अपनी हाथ से बनाई गई बीड़ी को भी बेचते है।

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उन्हें इलाके के लोग ‘साइकिल वाले नेता जी’ कह कर बुलाते हैं. पूर्व दलित सांसद ही छवि दुसरो नेताओ से काफी अलग सी है उनका घर सागर शहर की पुरव्याउ टोरी मुहल्ले में संकरी गली में स्थित हैं। पूर्व सांसद का घर देखने में काफी सामान्य है जैसा हम सोचते है उनसे एकदम उल्टा। पूर्व सांसद राम सिंह अहिरवार अच्छे खासे पढ़े लिखे है उनके पास दर्शन शास्त्र में स्नातक और अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री है.

उन्होंने वर्ष 1967 में भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर सागर से ही लोकसभा का चुनाव लड़ा और पहले ही बार में उन्होंने जीत दर्ज कराई थी.

82 साल पार कर चुके पूर्व सांसद राम सिंह आज भी हर रोज कई किलोमीटर साइकिल चला कर अपनों से मिलते-जुलते रहते हैं और अपना काम करते है उनके पास कोई मोटर वाहन नहीं है. राम सिंह कहते हैं, “मोटर वाहन की कभी जरूरत ही महसूस नहीं हुई और न तो मोटर वाहन हासिल करने का प्रयास ही किया.” पिछले दिनों राम सिंह को लकवा मार गया, जिससे बोलने में उन्हें कुछ दिक्कत होती है, मगर साइकिल अब भी उन्होंने नहीं छोड़ी है. फुर्सत के समय बीड़ी भी बना लेते हैं, जिससे उन्हें कुछ कमाई हो जाती है.

सांसद होने के बावजूद भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा उन्हें सांसद की अपनी पेंशन पाने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. वह बताते हैं, “मेरी सांसद की पेंशन वर्ष 2005 में किसी तरह शुरू हो पाई. पेंशन के लिए कई सालों तक संघर्ष करना पड़ा था.” वह भले ही आयु के 82 वर्ष पार कर चुके हैं, मगर सक्रियता कम नहीं हुई है, हां राजनीतिक तौर पर वह सक्रिय नहीं हैं.


केंद्र में भाजपा की सरकार है और डेढ़ दशक तक राज्य में भी भाजपा की सरकार रही, मगर उनकी पार्टी ने न तो उन्हें कभी महत्व दिया, और न ही कभी उनसे कोई राय-मशविरा किया गया. राम सिंह राजनीति में आई इस गिरावट को लेकर चिंतित हैं.

अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले राम सिंह सांसद बनने की कहानी बयान करते हैं, “विश्वविद्यालय में पढ़ाई करता था और घर पर बीड़ी बनाकर अपना जीवकोपार्जन करता था. उसी दौरान जनसंघ ने सागर संसदीय सीट से उम्मीदवार बना दिया, और मैं चुनाव जीत गया.” राम सिंह की पत्नी राजरानी वर्तमान दौर के नेताओं की संपन्नता के सवाल पर कहती हैं, “सुविधाएं हों तो अच्छी बात है, मगर मुझे और मेरे पति को सांसद की पेंशन पाने के लिए भी कई साल तक संघर्ष करना पड़ा था. अब इसी पेंशन से जीवन चलता है.”

दलित होने की वजह से उन्हें कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा पर उन्होंने हारे नहीं माने उन्होंने सामज के सामने एक सांसद होने के साथ साथ के मिसाल पेश की उनकी छवि की चर्चा पुरे सागर में है राम सिंह के पड़ोसी गोविंद कहते हैं, “राम सिंह अन्य नेताओं से अलग हैं. वह ऐसे नेता नहीं हैं, जो एक बार सांसद बने और खूब सुविधाएं हासिल कर ले. वह सज्जन और सीधे सरल स्वभाव के हैं. कभी लगता ही नहीं कि वह सांसद भी रहे हैं. साइकिल पर चलते हैं और बीड़ी बनाकर जीवन गुजारा करते हैं.”

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