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गाँव में दलितों के अंतिम संस्कार को रोका, लोगो ने प्रशाशन पर निकाला गुस्सा तो पुलिस ने कराया अंतिम संस्कार 

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(Representational Image) (Image Credits: TeluguIN)

हाल ही में कुछ समय से दलितों पर अत्याचार काफी बढ़ गया है। कही दलितों से मारपीट तो कभी कुछ। कहा जा सकता है की लोग अब इस हद तक गिर चुके है की वह जिन्दा तो जिन्दा मुर्दा दलित व्यक्तियों पर भी कोई रहम नहीं करते । जात-पात की इस ओछी मानसिकता रखने वाले लोग किस प्रकार से खोखले हो गए गए है यह बात इसी घटना से पता चलता है। महू के मेंमदी गांव में एक बुजुर्ग व्यक्ति के शव को मुक्तिधाम में दाह संस्कार करने के लिए ले जाया गया परन्तु उसके दाह संस्कार को रोक दिया गया।  वो इसलिए क्योंकि वह दलित था। इस ओछी मानसिकता से नाराज ग्रामीणों ने शव को रास्ते पर रख चक्काजाम कर दिया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने स्थिति को संभाला और बुजुर्ग का अंतिम संस्कार संपन्न करवाया। मामले में जांच कर कार्रवाई करने की बात अधिकारियों ने कही है।

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इंदौर से चंद किलोमीटर दूर महू के मेंमदी गांव के रहने वाले 95 साल के बुजुर्ग व्यक्ति छोगालाल परमार का शनिवार को निधन हो गया था। परिजनों ने छोगालाल का अंतिम संस्कार पंचायत के मुक्तिधाम में करने के लिए सरपंच पति रूपेश वाघमारे और गांव के पटेल गब्बूलाल के पास अनुमति लेने के लिए पहुंचे। परन्तु इन दोनों ने अनुमति देने से इंकार कर दिया।

लोगो की जाति पर ओछी बात करते हुए  सरपंच पति वाघमारे ने मृतक के परिजनों से कहा की  कि तुम्हारे समाज के लोगों का अंतिम संस्कार तालाब के किनारे होता हैं..वहीं जाकर दाह संस्कार करो, शमशान जाने की जरूरत नहीं है। सरपंच पति ने धमकी देते हुए कहा कि यदि पंचायत के शमशान में अंतिम संस्कार किया तो इसका परिणाम ठीक नहीं होगा। वाघमारे का कहना था कि 6 माह में तुम लोगों के लिए अलग से शमशान बना दिया जाएगा, फिर वहीं करना अंतिम संस्कार।

इस बात की जानकारी  परिजनों ने बलाई समाज के इंदौर में रहने वाले पदाधिकारियों को दी। जानकारी मिलते ही अखिल भारतीय बलाई महासंघ के अध्यक्ष मनोज परमार सहित अन्य समाज जन मेंमदी गांव पहुंच गए। मामले की जानकारी एसडीओपी, सिमरोल थाने के साथ ही तहसीलदार को भी दी गई। अधिकारी और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गए। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाकर जैसे तैसे बुजुर्ग का अंतिम संस्कार श्मशान में कराया।

बुजुर्ग व्यक्ति की शवयात्रा भी पुलिस की मौजूदगी में निकाली ही गई। जातिगत भेदभाव से नाराज लोगों ने शव को गांव के चौराहे पर रखकर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों ने मांग की है की भेदभाव करने वाले सरपंच और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाये । तहसीलदार राहुल गायकवाड़ और पुलिस ने मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया तब जा कर चक्काजाम समाप्त हुआ।


इस मामले में ग्रामीणों ने खुल कर अपनी भड़ास निकाली। ग्रामीणों ने कहा की जाति  के नाम पर कुछ गिरी हुई मानसिकता के लोग दलितों की बारात भी नहीं निकलने देते। दूल्हे को घोड़ी से उतारकर कर मारा जाता है। गांव में जाति के नाम पर भेदभाव किया जाता है। अब यह भी हो गया की दलितों के शव को भी शमशान में जगह नहीं दी जा रही।

ऐसी ही एक दूसरी घटना धनगांव थाना क्षेत्र के ग्राम डोंगरगांव है जहाँ एक दलित महिला के अंतिम संस्कार को लेकर कुछ छोटी मानसिकता रखने  वाले लोगो ने बवाल कर दिया। कुछ लोगो ने दलित महिला के शव यात्रा को खेत के रास्ते से ले जाने से मना कर दिया और कहा की अंतिम संस्कार खेत में नहीं मुक्तिधाम में करे। शवयात्रा की बात को लेकर विवाद हुआ तो पुलिस को आकर यहाँ मामला संभालना पड़ा। यहाँ भी पुलिस ने कड़ी कार्रवाई का आश्वाशन देते हुए दलित महिला के साहव का अंतिम संस्कार कराया। पुलिस ने मामले में फरियादी की शिकायत पर सावन पिता सुंदरलाल और सरोज पति सुंदरलाल के खिलाफ मामले को जांच में लिया है।

 

जात-पात के नाम पर अब किस तरह से जिन्दा लोगो से लेकर मुर्दा लोगो तक बदसुलूकी की जा रही है यह इन्ही बातो से पता चलता है। .पुलिस प्रशाशन कार्यवाही का आश्वाशन तो दे देती है पर क्या किसी को न्याय मिल पाता है।  हर रोज दलितों पर जाति के नाम पर अत्याचार होते ही रहते हैं।

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