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दलितों की मदद और उन्हें रोजगार देने वाली संस्था बंद होने की कगार पर

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(Image Credits: nsfdc.nic.in)

उत्तर प्रदेश में दलितों के आर्थिक विकास में मदद कर रही संस्था उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाती जनजाति वित्त विकास निगम अब गरीब दलितों की मदद नहीं कर पा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो कभी भी संस्थान बंद हो सकता है। दलितों को हर प्रकार से रोजगार मिले इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 30 करोड़ रूपये की मदद मांगी है।

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उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और जनजाति वित्त विकास निगम दो दशकों में हजारो गरीब दलितों को रोजगार के लिए कर्ज दिया। मौजूदा समय में इस संस्थान से कर्ज लेने वालो की संख्या 50 हजार से ऊपर बताई जा रही है। परन्तु पिछले पांच सालो में इस संस्थान ने किसी भी गरीब दलित को एक पैसे का भी कर्ज नहीं दिया। इससे दलित समाज में काफी नाराजगी है।

सवाल यह उठता है की सरकार ने वित्त विकास निगम की स्थापना की थी ताकि गरीब दलितों को रोजी रोटी मिल सके वे रोजगार स्थापित कर सके। केंद्र सरकार से दलितों को कर्ज देने के लिए धन मिलता था और यहाँ अधिकारी अपने स्टार पर कर्ज दिया करते थे। पर राजनितिक दबाव के कारण 99 प्रतिशत कर्ज लेने वालो ने अपने लिए हुए कर्ज की वापसी नहीं की।

नतीजन सरकार ने यह फैसला किया की संस्थान के अनुरोध पर केंद्र सरकार की इस योजना के तहत बैंक के द्वारा कर्ज दिया जायेगा। बैंक ने रिकॉर्ड को देखते हुए कर्ज नहीं बांटे। जिसके चलते यह संस्थान बंद होने की कगार पर है।

संस्थान के निदेशक प्रबंधन मनोज सिंह ने यह कहा है की यह संस्थान दलितों के हितो के लिए काफी लम्बे समय से काम कर रही है। इसे फिर से अच्छी स्तिथि में लाया जायेगा ताकि यह गरीब दलितों की मदद कर सके। उन्होंने केंद्र सरकार को मदद करने के लिए पत्र लिखा है।


इस निगम के जरिये दलितों की होने वाली मदद की पूरी जानकारी भी केंद्र सरकार को दी है। पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत ही 30 करोड़ रुपए की मांग की है ताकि ऐसी एसटी वित्त विकास निगम की योजना आगे चलाई जा सके और दलितों की मदद कर सके।

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