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नोटबंदी पर आधारित मलयाली डोकेमेंटरी फिल्म की स्क्रीनिंग को कथित रूप से संघ कार्यकर्ताओं ने रोका, फिल्म न दिखाने की दी धमकी

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(image credits: business standard)

अभी एक दो दिन पहले ही बीजेपी कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने प्रधानमंन्त्री मोदी द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की प्रक्रिया को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के जानकारी दी। जिससे की आने वाले समय में युवा जान सकेंगे की प्रधानमंत्री मोदी ने किस तरह विशेष दर्जा को समाप्त किया।

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देखा जाए तो मौजूदा सरकार उनके हिसाब से माने जाने वाले अपनी सफलता को भविष्य में अधिक से अधिक युवाओ तक पहुँचाना चाहती है। लेकिन बीजेपी कार्यकाल में लिए गए कुछ ऐसी भी निर्णय है जिससे काफी लोगो को नुकसान उठाना पड़ा, नोटबंदी इसका ही एक उदाहरण है। वही अब जब कुछ लोगो द्वारा नोटबंदी पर मूवी बनाई गई तो इस पर सरकार के कुछ लोग द्वारा विरोध किया जा रहा है।

दरअसल एक मलयाली डॉक्युमनेत्री जो नोटबंदी पर आधारित है उसे दिल्ली स्थित केरला कल्ब (Kerala Club) में स्क्रीनिंग होने नहीं दिया गया। बताया जा रहा है की सोमवार को कथित रूप से संघ कार्यकर्ताओं के संभावित विरोध को देखते हुए इसका फिल्मांकन नहीं हो पाया। बता दे की मलयाली भाषा में यह डॉक्यूमेंट्री कोलम में चाय बेचने वाले एक शख्स के बारे में है, जो नोटबंदी की वजह से फजीहत झेलता है। ‘ओरु चायाक्कडकंटेरेंटे मन की बात’ नाम की इस फिल्म में चाय बेचने वाले की संघर्ष की कहानी है।

‘द टेलीग्राफ’ की खबर के मुताबिक केरला क्लब के सदस्यों और आयोजकों का कहना है कि उन्हें इस इस फिल्म को नहीं दिखाने की चेतावनी दी गई थी, क्योंकि, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को ‘खराब’ ढंग से पेश किया गया। सानू कुम्मिल की यह डॉक्यूमेंट्री 75 वर्षीय याहिया की जीवन गाथा को दर्शाती है, जिसने नोटबंदी के विरोध में अपना आधा सिर मुंडवा लिया और बदले में मिले धन को जला दिया।

द हिन्दू के अनुसार दिल्ली में डॉक्यूमेंट्री दिखाने के अलावा केरला कल्ब में मौजूदा वित्तीय संकट पर चर्चा भी होनी थी। जिसमें वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद सुकुमार मुरलीधरन के बोलने का कार्यक्रम था।


इस मामले में सानू कुम्मिल ने द हिन्दू से टेलीफोनिक वार्तालाप में बताया, “कल रात मुझे आयोजकों से एक कॉल मिला, जिसमें कहा गया कि फिल्म की स्क्रीनिंग के साथ समस्या हो सकती है। आज दोपहर उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास संघ परिवार (RSS) से जुड़े स्थानीय नेताओं के फोन आए और स्क्रीनिंग रद्द करने को कहा गया। लिहाजा, हमने इसे फिलहाल के लिए रद्द कर दिया है। मैं अब दिल्ली में फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए वैकल्पिक स्थानों की तलाश कर रहा हूं।”

नोटबंदी पर आधारित इस मलयाली डॉक्यूमेंट्री को कथित रूप से संघ से जुड़े लोगो द्वारा विरोध उचित नहीं लगता है। इसके विरोध से एकबात का
साफ साफ पता चलता है की, मौजूदा सरकार अपनी असफलताओ को लोगो के सामने आने नहीं देना चाहती है। देखने वाली बात यह है की एक तरफ मौजूदा सरकार उनके द्वारा लिए गए कुछ फैसलों को तो लोगो के बीच खूब प्रचार करती है। लेकिन जब उनकी असफलताओ के बारे में बात होती है तो उन्हें बूरा लगता है।

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