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इस IAS ऑफिसर ने तोड़ी जाति की दीवार, किया ऐसा काम सब हो गए हैरान

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(IMAGE CREDITS: The Better India)

देश भर में जहा हम एक नए भारत बनाने का नारा देते नहीं थकते वही देश के कई इलाकों में आज भी छुआछूत, जात-पात, घृणा वैसी ही है जैसे सदियों पहले थी। अगर आपको यह लगता है की छुआछूत के खिलाफ बना 6 दशक पुराना विधेयक, अस्पृश्यता अधिनियम, 1955 लोगों में कुछ बदलाव लेकर आया है तो यह सोचना भी एकदम गलत होगा। दलितों की बात तो हर सरकार कर रही है पर सिर्फ अपने वोट बैंक के लिए और यह दलित समाज उनके झूठे वादों में लगातार फसता आया है।

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हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसको देख एक IAS ऑफिसर को खुद सामने आना पड़ा। मामला धौलपुर जिले की बसेड़ी ग्राम पंचायत का है। जहां नुनहेरा गांव में मनरेगा का काम चल रहा था। जब कार्य का निरीक्षण करने के लिए डीएम नेहा गिरी पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि एक महिला अपने बच्चे के साथ काम पर लगी है, जबकि उससे हट्टा-कट्टा आदमी वहां पानी पिलाने का काम कर रहा है।इसे देखकर जब उन्होंने इसका कारण पूछा तब पता चला कि वह महिला वाल्मीकि समुदाय से आती है। इस समुदाय को अछूत माना जाता है इसलिए कोई उसके हाथ से पानी नहीं पीता।

उन्होंने वहां मौजूद लोगों को जमकर लताड़ लगाई और उस महिला के हाथों पानी भी पिया। उन्होंने गांव के लोगों को समझाया कि छुआछूत जैसी कोई चीज नहीं होती है और हर इंसान बराबर होता है। भारत में जाति व्यवस्था में वाल्मीकि समुदाय को निचले पायदान पर रखा जाता है। यहां तक कि दलितों में भी उन्हें सबसे नीचा माना जाता है। इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि आधुनिक होते समाज में आज भी ऐसी कुप्रथाएं जारी हैं। कलेक्टर नेहा गिरी ने वाल्मिकी महिला को न केवल सामाजिक हक दिलाया बल्कि उसके अंदर आत्मविश्वास भी भरा।

आपको बता दे की 2010 बैच की आईएएस अफसर नेहा गिरी इसके पहले बूंदी और प्रतापगढ़ जिले की कलेक्टर रह चुकी हैं। उनके पति इंद्रजीत सिंह भी आईएएस अफसर हैं और फिलहाल अलवर जिले में डीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डीएम नेहा गिरी का यह कदम सरहनिये था पर सोचने वाली बात यह है की ऐसी कई जगह है यहाँ ऐसे घटनाय आम बात है वह शायद ही कोई नेहा गिरी जैसा अफसर खुद अत्यचार के खिलाफ सामने आये।


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