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मोदी के शपथ ग्रहण के दिन केरल का यह मुस्लिम संगठन मना सकता है ‘काला दिवस’

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(Image Credits: Awaaj Nation)

जब से बीजेपी सरकार दोबारा सत्ता में आई है तब से मोदी सरकार पर कई प्रकार के सवाल उठाये जा रहे है। क्या मोदी जैसा प्रधानमंत्री देश के लिए ठीक है या नहीं। कई विपक्षी पार्टियों का मानना है की लोकसभा चुनाव में EVM में खराबी के चलते भाजपा को जीत मिली है। वहीँ कई ऐसे समुदाय है जिन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर ऐतराज जताया है। विरोध करने वालो में मुस्लिम समुदाय भी शामिल है जिन्हीने प्रधानमंत्री शपथ के समय काला दिवस मनाने का फैसला लिया है।

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दरअसल उन मुस्लिम समुदायों का मानना है की मोदी के प्रधानमंत्री बनने के मुस्लिम समुदाय खतरे में आ जायेगा जिसके चलते वह यह कदम उठा रहे है। वह मोदी के दोबारा पीएम बनने का विरोध करेंगे ।

बीजेपी और एनडीए के संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी जिस दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे, उस दिन केरल का एक मुस्लिम संगठन इस वजह से काला दिवस मनाएगा। सोमवार यानि 27 मई, 2019 को केरल मुस्लिम जमात परिषद की ओर से कहा गया कि 30 मई को राज्य भर में काला दिवस मनाया जाएगा। जमात परिषद के अध्यक्ष एम.पूकनुजू के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया, “30 मई को जब मोदी देश के पीएम पद की शपथ लेंगे, तब राज्य भर में काला दिवस मनाया जाएगा।” पूकनुजू ने यह भी बताया कि राज्य के मुसलमान अब खतर में हैं और उनकी सुरक्षा सवालों के घेरे में है।

हालांकि, कहा जा रहा है कि विवाद पनपने के बाद पूकनुजू ने यह बयान वापस ले लिया। पर इस बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ‘टाइम्स नाऊ’ से उन्होंने कहा- रमजान के पाक महीने में परिषद की ओर से संकल्प लिया गया है कि हम इस दौरान रोजाना इबादत करेंगे। बता दें कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में 30 मई को शाम सात बजे नरेंद्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह है। उस दौरान उनके अलावा नई सरकार में मंत्री भी पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।

चौंकाने वाली बात है कि केरल के संगठन की तरफ से यह बयान तब आया, जब मोदी ने शनिवार को संसद के सेंट्रल हॉल में निर्वाचित किये गए नए सांसदों को सलाह दी थी, “आप खास तौर पर उनके लिए काम करें, जिन्होंने आपको वोट नहीं दिया।” हालांकि, मोदी ने उस दौरान किसी समुदाय या वर्ग का नाम नहीं लिया, पर माना जा रहा है कि उन्होंने यह बात अल्पसंख्यकों के संदर्भ में कही थी।


मोदी ने आगे यह भी कहा था, “विपक्षी सरकारों ने लंबे समय से अल्पसंख्यकों के साथ धोखा किया है, पर अब समय आ चुका है कि हम उनका दिल जीतें।” वह बोले कि अल्पसंख्यकों के बीच बने काल्पनिक भय के मौहाल को खत्म करने का समय आ चुका है। उन्होंने इसके अलावा अपने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे में संशोधन करते हुए इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ कर दिया।

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