fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अन्य

सरकार के खिलाफ आदिवादियों का बड़ा प्रदर्शन, ‘देवता’ को बचाने के लिए सरकार से ‘संघर्ष’

tribal-people-Protests-against-the-government,-'struggle'-from-the-government-to-save-the-'God',
(image credits: Business Standard)

आदिवासियों के लिए जल, जंगल, जमीन से बढ़कर कुछ नहीं होता। पहाड़ आदिवासी जीवनशैली में अत्यंत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनकी मान्यताएं, रहन-सहन इन्हीं पर केंद्रित होकर चलती हैं। शहरो की चकाचौंध से दूर आदिवासी समुदाय बड़ी ही सरलता के साथ अपना जीवन व्यापन करते है और इसी का फ़ायदा बड़ी बड़ी कंपनिया सरकार के साथ मिलकर उठाती है।

Advertisement

हमारी सरकारें एक पहाड़ को उखाड़ने में उफ तक नहीं करती हैं। उन्हें उस पहाड़ से खनिज संपदाएं चाहिए, लेकिन वो नहीं जानती हैं कि उन पहाड़ों में आदिवासी मान्यताओं के अनुसार, देवों का निवास होता है और उनके इस भावनाओ के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आदिवासियों का बड़ा समूह पिछले चार दिनों से NMDC नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन के चेकपोस्ट को घेरे हुए है। एनएमडीसी व सरकार के खिलाफ आदिवासी सड़क पर संघर्ष करते हुए धरना दे रहे हैं। बस्तर से अलग-अलग इलाकों से 5 हजार से अधिक संख्या में पहुंचे आदिवासी अपने देवता को बचाने के लिए धरना दे रहे हैं।

आदिवासी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले के किरंदुल क्षेत्र के अंतर्गत बैलाडील नंदराज पहाड़ी पर खनिज और लौह अयस्क के लिए खुदाई का विरोध कर रहे हैं। आदिवासियों का मानना है कि नंदग्राम पहाड़ की पूजा वे अपने कुलदेव के रूप में करते हैं, इसलिए वे उस पहाड़ की खुदाई होने नहीं दे सकते। इसको लेकर ही बीते 7 जून से सुबह तीन बजे से आदिवासियों का समूह एनएमडीसी के सामने धरना देकर प्रदर्शन कर रहा है। इस दौरान आदिवासी तीर धनूष सहित अपने पारंपरिक हथियार भी साथ रखे हैं।

इसके विरोध में दक्षिण बस्तर क्षेत्र के आदिवासी बीते छह जून से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं। अपना पहाड़ बचाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर एनएमडीसी मुख्यालय के सामने डटे 20 हजार से ज्यादा आदिवासी अपने साथ राशन-पानी लेकर भी आए हैं। संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के मंगल कुंजाम का कहना है कि जल जंगल जमीन के लिए ही आदिवासी जीते हैं. सरकार इसे ही छीनने की कोशिश कर रही है। जिस डिपॉजिट 13 की खुदाई का ठेका अडानी समूह की कंपनी को दिया गया है, वो हमारे देवता नंदराज की पत्नी पित्तोड़ रानी का मायका भी है. ऐसे में इस पहाड़ी का हम आदिवासियों के लिए धार्मिक महत्व है. ऐसे में इसकी खुदाई किसी को भी नहीं करने देंगे।

ग्राम पंचायत हिरोली की सरपंच बुधरी बताती हैं, ‘साल 2014 में एक फर्जी ग्रामसभा की बैठक कर डिपॉजिट 13 नंबर पहाड़ पर लौह अयस्क की खुदाई के लिए अनुमति दे दी गई। यह असल में हुई ही नहीं थी। मात्र 104 लोगों की मौजूदगी में ग्रामसभा के प्रस्ताव में ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। जबकि ग्रामीण साक्षर ही नहीं थे तो कहां से हस्ताक्षर करेंगे? ग्रामीण अंगूठा ही लगाते हैं, फिर ये हस्ताक्षर किसने किए?’ बुधरी आगे कहती हैं कि 104 लोगों में से जिनके हस्ताक्षर ग्रामसभा प्रस्ताव में दर्शाए गए हैं उनमें से दर्जनों की मृत्यु पहले ही हो चुकी है कागज़ो पर फ़र्ज़ी हस्ताक्षर करे गए है।


गौरतलब है कि सरपंच ने आदिवासी नेताओं और संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ मिलकर खनन के लिए प्रस्ताव पास कराने वालों के खिलाफ किरंदुल पुलिस थाने में एफआईआर के लिए आवेदन दिया है । आवेदन में दंतेवाड़ा के तत्कालीन कलेक्टर और एनएमडीसी के सीएमडी के खिलाफ फर्जीवाड़े का केस दर्ज करने की मांग की गई है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved