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दो आर्थिक सलाहकारों की मोदी सरकार की आलोचना करने पर हुई छुट्टी

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(image credits: the wire)

एक बार फिर से मौजूदा सरकार के खिलाफ बोलने पर कार्रवाई करने का मामला सामने आता दिख रहा है। दरसअल पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक सलाहकार परिषद् से दो आर्थिक सलाहकारों ने सरकार की नीतियों की आलोचना की। जिसके बाद उन दोनों की छुट्टी कर दी गई है। आर्थिक सलाहकार परिषद् के पुनर्गठन के बाद पिछली समिति के सदस्य रहे रथिन रॉय और शामिका रवि को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

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देखा जाये तो इस समय जब देश में आर्थिक हालातो में सुस्ती आने पर सरकार को आर्थिक सलाहकार से उनकी राय जाननी चाहिए। लेकिन सरकार ने इसका उल्टा ही उन्हें उनकी नीतियों की आलोचना करने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया, जो की उचित नहीं है।

रथिन रॉय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के निदेशक हैं। टेलीग्राफ की खबर के अनुसार इससे पूर्व वह राजकोषीय घाटे को लेकर भगवा ब्रिगेड के रुख की आलोचना कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने विदेशी बाजार से सॉवरन बॉन्ड के जरिये रकम जुटाने की बजट में घोषणा किए जाने पर हाल ही में चिंता व्यक्त की थी। वहीँ कई एक्सपर्ट ने सरकार की इस घोषणा से निवेशकों में डर बढ़ने की भी बात कही थी।

वही दसूरी और आर्थिक सलाहकार शामिका रवि ब्रूकिंग्स इंडिया में डायरेक्ट ऑफ रिसर्च हैं। रवि ने इस महीने की शुरुआत में मौजूदा आर्थिक मंदी के लिए पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 1993 से कोयला ब्लॉक के आवंटन को रद्द करने को जिम्मेदार ठहराया था।

इससे पूर्व समिति के प्रमुख सदस्य डॉ. सुरजीत भल्ला इस साल की शुरुआत में ही समिति से अलग हो गए थे। यहां आपका एक बात जानना जरुरी है की आर्थिक सलाहकार परिषद् एक स्वतंत्र इकाई है जो आर्थिक व इससे संबंधित मुद्दों पर प्रधानमंत्री को सलाह देती है।


मौजूदा समय में इस समिति के चेयरमैन बिबेक एस देबरॉय हैं। इस समिति का कार्यकाल दो साल का होगा। समिति के पुनर्गठन के बाद इसमें रतन पी. वाटल को बरकरार रखा गया है।

समिति के पुनर्गठन पर सरकार की तरफ से वक्तव्य जारी करते हुए कहा गया की, भारत सरकार ने पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद् का पुनर्गठन किया है। इसकी अवधि दो साल की होगी और यह 26 सितंबर 2019 से प्रभावी होगी। दो पूर्ण कालिक सदस्यों के अलावा समिति में दो अंशकालिक सदस्य भी होंगे।

आपको बता दें की कुछ महीनो पहले शामिका रवि और भाजपा मंत्री के बीच आर्थिक मंदी दौरान कहासुनी हो गई थी। जिसमे शमीका रवि ने निर्मला सीतरमन पर निशाना साधा था। जिसको लेकर बीजेपी मंत्री ने उनकी आलोचना की थी।

अक्सर सरकार की आलोचना करने पर लोगो को प्रभावित होना पड़ता है। मौजूदा सरकार को उनकी आलोचना को सकारात्मक रूप मे लेने की जरुरत है। उन्हें यह सोचना चाहिए की अगर लोगो द्वारा उनके निर्णयों पर सवाल उठाये जा रहे है तो उसमे जरूर कोई कमी होगी। केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा लोगो के सवाल पूछने या निर्णय पर सवाल उठाने पर कार्रवाई कर देना उचित नहीं है।

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