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अपनी बारी का इंतजार मत करिए, वर्ना तुम्हें बचाने वाला कोई नहीं होगा….

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2 years ago

पहले वो यादवों को मारने आए.. मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं यादव नहीं था फिर वो जाटवों को मारने आए.. मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं जाटव नहीं था फिर वो पटेलों को मारने आए मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं पटेल नहीं था फिर वो जाटों को मारने के लिए आए मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं जाट […]

सहारनपुर: दबे-कुचले लोग अपना रास्ता ख़ुद तय कर रहे हैं

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2 years ago

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक समृद्ध जनपद सहारनपुर को लगता है राजनैतिक रोटियां सेकने वालो ने घेर लिया है। मुजफ्फरनगर, हरिद्वार, देहरादून, यमुनानगर, शामली से घिरा हुआ जनपद सहारनपुर उत्तर प्रदेश को उत्तराखंड और हरियाणा से जोड़ने का काम भी करता है। हालाँकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जनपद सांप्रदायिक दंगों के चलते संवदेनशील माने जाते हैं लेकिन सहारनपुर अपनी […]

4 साल पहले: जब एक चिट्ठी पीएमओ पहुंचकर लीक हुई थी…

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2 years ago

साल 2003 की बात है। तब हम स्टूडेंट थे और इंजीनियर सत्येंद्र दुबे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया में प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी सड़क योजना स्वर्णिम चतुर्भज सड़क योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार को नजदीक से देखा। उन्होंने तब प्रधानमंत्री अटलबिहारी वापजेयी को एक सीलबंद चिट्ठी लिखी जिसमें योजना में व्याप्त करप्शन का पूरा कच्चा चिट्ठा था। […]

आखिर कब तक इन जातिवादी मंदिरों में हम अपने सिर फुड़वाते रहेंगे?

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2 years ago

दलितों को सामूहिक रूप से हिन्दू धर्म छोड़ देना चाहिए!! आखिर इन जातिवादी मन्दिरों में कब तक हम अपने सिर फुड़वाते रहेंगे? खबर है कि सामन्ती राजस्थान के अतिसामन्ती जालोर जिले के किसी हिन्दू मंदिर में पत्थर के भगवान में प्राण फूंके गये। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा में बाड़मेर के प्राग मठ के दलित संत शम्भुनाथ भी अपने शिष्यों के […]

‘लालू प्रसाद यादव’ के नाम मात्र से सामन्तवाद की रूह कांप उठती है…

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2 years ago

लोग कहते हैं कि हनुमान चालीसा पढ़ने से भूत-प्रेत भाग जाते हैं, अब यह तो निश्चित नहीं है कि कोई भूत-प्रेत है या नहीं अथवा हनुमान चालीसा पढ़ने से ऐसा कोई चमत्कार हो जाता है या नहीं पर यह तो निश्चित है कि वर्तमान सन्दर्भ में लालू प्रसाद यादव जी का नाम ऐसा नाम है जिसके उच्चारण मात्र से शोषण […]

दलितों के प्रति सहारनपुर जैसी हिंसा को कैसे समझें?

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2 years ago

सहारनपुर के शबीरपुर गांव में हुई जातीय हिंसा में एक व्यक्ति की हत्या और 60 से ज्यादा दलित घरों को जला दिया गया था जिसके बाद से जिले के ठाकुर वर्चस्व वाले गांवों में रहने वाले अधिकांश दलित आगे हिंसा होने से डर रहे हैं। उनमें भय का माहौल है। इस मामले के दूसरे पहलुओं को समझाते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी […]

कार्ल मार्क्स जयंती पर विशेष: बंदे में दम था इतना तो उसके विरोधी भी मानते हैं

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2 years ago

आज कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है। उन्नीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक (1818 ई.) में एक छोटे से जर्मन शहर में उनका जन्म हुआ। बंदे में दम था इतना तो उसके विरोधी भी मानते हैं। लेकिन यह रेखांकित करना भी इतना ही जरुरी है कि कार्ल मार्क्स ने अवतार नहीं लिया था। उनका जन्म ही हुआ था – एक खास देश […]

मार्क्स, आंबेडकर और लोहिया की संगति

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2 years ago

आज कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है, ये हमारे लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाने का अवसर है। जाति चेतना या जातीय अस्मिता की राजनीति ने बहुजनों को क्या दिया?   कुछ दशकों के लिए इस चेतना ने जातीय दायरों में सिमटी अस्मिताओं को मजबूत किया। कुछ हद तक जातियों में आत्मसम्मान और गर्व का भाव भी भरा है। लेकिन अंबेडकर की […]

मसला नुमाइंदगी व समतामूलक समाज का

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2 years ago

न मार्क्स फेल हुए हैं, न मार्क्सवाद। मार्क्सवादी​ अपने समाज के ताने-बाने को समसामयिक परिप्रेक्ष्य में नहीं समझने की ऐतिहासिक जिद के चलते अपनी विफलता का ठीकरा मार्क्स पर फोड़कर उनके साथ ज़्यादती ही करेंगे। किसी विचारधारा को संपूर्णता में नहीं समझने की क़सम खाने पर बहुतेरे प्रयोग टिकते नहीं। जड़ता व ठहराव तोड़ने के लिए कुछ क्षेपक जोड़ना पड़े […]

जियो लड़कियों…घूमों लड़कियों…उड़ो लड़कियों

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2 years ago

अनुराधा बेनीवाल की किताब.. “आज़ादी मेरा ब्रांड “और चेतन भगत की” one indian girl” में अकेली लड़कियों का यात्रा वृतांत पढ़कर दिल में एक कसक सी उठती है….काश हम भी कर पाते ऐसी यात्रायें.. विदेश न सही, देश में ही सही.. पर तुरंत ख़्याल आता है …रे मूढ़ मन-तू भूल गया ! हम एक महान देश में पैदा हुए हैं […]

जब एक दलित प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गया…

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2 years ago

कद्दावर किसान नेता व उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार के प्रणेता चरण सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री, जिन्हें बतौर प्रधानमंत्री कभी सदन जाने और संसद सत्र में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिला, और श्री चंद्रशेखर अकेले ऐसे प्रधानमंत्री, जो कभी लाल क़िले पर झंडा फहराकर राष्ट्र को संबोधित नहीं कर पाए। दोनों पुराने कांग्रेसी होते हुए भी कांग्रेस की चालबाजी […]

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मधु लिमये: बेनज़ीर संसदीय बहस के कोहिनूर समाजवादी राजनेता

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पूर्व गवर्नर ने पुलवामा को लेकर मोदी पर दिया बड़ा बयान

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भारत में बढ़ रही है बेरोजगारों की संख्या, नोटबंदी है एक बड़ा कारण

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CISF रिक्रूटमेंट 2019  –  429 वैकेंसी

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