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चुनाव परिणाम से पहले EXIT POLL और EVM धांधली को लेकर सबसे बड़ा खुलासा

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(Image Credits: Patrika)

लोकसभा चुनाव 2019 के सभी चरणों में मतदान खत्म हो चुके है और पुरे देश को चुनाव के परिणाम का इंतज़ार है कल यानी 23 को सुबह से ही नतीजे आना शुरू हो जायेंगे। कई बड़ी न्यूज़ एजेंसियो के एग्जिट पोल में NDA की सरकार बनती दिखाई पड़ रही है।

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अब यहाँ यह सवाल उठता है की कही एग्जिट पोल के चौंकाने वाले नतीजों के पीछे ईवीएम का ‘खेल’ तो नहीं है? दरअसल एग्जिट पोल के नतीजों ने शक को तब जन्म दे दिया, जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ईवीएम बदलने की खबरें आने लगी।

एसपी-बीएसपी गठबंधन के उम्मीदवारों ने अपने-अपने जिलों में ईवीएम बदलने की आशंका जताते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। बड़ी मात्रा में EVM की हेरा फेरी की खबरे सामने आने लगी है। अब इन घटनाओं में कितनी सच्चाई है, ये तो जांच के बाद पता चलेगा, लेकिन सवाल उठता है कि क्या एग्जिट पोल के नतीजों का कनेक्शन ईवीएम से जुड़ी घटनाओं से तो नहीं है?

EVM की लापरवाही को लेकर हमेशा से चुनाव आयोग और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठते रहे है कही EVM की लापरवाही और एग्जिट पोल में दिखाय जाने वाले आंकड़े एक बार फिर सोची-समझी कोशिश लग रही है।

चंदौली, गाजीपुर और मिर्जापुर में ईवीएम को लेकर जिस तरह की खबरें सामने आई हैं, वो चौंकाने वाली हैं। चंदौली और अन्य दूसरे जिलों में चुनाव खत्म होने के 24 घंटे बाद ईवीएम से भरी गाड़ियों का पाया जाना कोई सोची-समझी कोशिश या फिर लापरवाही, क्या समझा जाए? जिला प्रशासन सफाई दे रहा है कि गाड़ियों से जो ईवीएम मिले, वो खाली थे। चुनाव अधिकारियों को रिजर्व के तौर पर इसे दिया गया था।


लेकिन सवाल इस बात का है कि चुनाव बीतने के तत्काल बाद इन्हें स्ट्रॉन्ग रूम तक क्यों नहीं पहुंचाया गया? ईवीएम रिजर्व थे या भरे, ये तो चुनाव अधिकारी जाने, लेकिन इस घटना ने एक नई बहस और शक को जन्म तो जरूर दे दिया। क्या सच में इस तरह बिना किसी सुरक्षा के साथ EVM को ले जाना सही थी यह चुनाव आयोग इसका कोई सबूत दे सकता है की जे जाने वाले EVM सच में खाली थे।

जिला प्रशासन इस घटना को भले ही लापरवाही बताकर अपनी गर्दन बचाना चाहता है, लेकिन बीजेपी के विरोधियों को अब चुनाव आयोग पर एतबार नहीं है. उन्हें लगता है कि बीजेपी की शह पर जिला प्रशासन ईवीएम बदलना चाहता है।

गाजीपुर में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना दे रहे अफजाल अंसारी कहते हैं। ”चुनाव जीतने के लिए बीजेपी हर स्तर पर उतर आई है। पहले चंदौली में ईवीएम से भरी दो संदिग्ध गाड़ियां मिलीं और अब गाजीपुर में ये कोशिश की जा रही है। चुनाव में संभावित हार देख बीजेपी अब ईवीएम बदलने की फिराक में है, लेकिन हम उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे.”

आपको बता दे की सरकार के द्वारा बनाए गए EVM की सुरक्षा को लेकर नियम बेहद सख्त हैं, पहले हम आपको कुछ नियम बता देते है।

नियम के अनुसार वोटिंग मशीन पूरी सुरक्षा के साथ स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाई जाए। मतगणना तक चौबीस घंटे ईवीएम की निगरानी होनी चाहिए। स्ट्रॉन्ग रूम की सीलिंग के वक्त राज्य और केंद्र की मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के नुमाइंदे मौजूद रहेंगे। स्ट्रॉन्ग रूम डबल लॉक सिस्टम वाला होना चाहिए, जिसका सिर्फ एक एंट्री प्वाइंट हो, स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी कैमरा और बिजली की व्यवस्था होनी चाहिए, और EVM को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने लिए प्रयाप्त साधन होने चाहिए साथ ही उनकी निगरानी के लिए सुरक्षा बल भी तैनात होने चाहिए।

रविवार की शाम एग्जिट पोल के नतीजे आएं और इसके बाद अगले दिन ईवीएम से जुड़ी घटनाएं एक के बाद एक सामने आने लगीं। अधिकांश एग्जिट पोल बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी का गठबंधन बीजेपी को चुनौती देने में कामयाब नहीं रहा।

सीटों के मामले में गठबंधन बीजेपी से काफी पीछे है. लेकिन एग्जिट पोल के ये नतीजे किसी के गले नहीं उतर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सभी को पता है की महागठबंधन के आगे बीजेपी कही मुकाबले में दूर दूर तक नहीं है पर एग्जिट पोल अलग ही कहानी बयां कर रहे है।

राजनीति का नासमझ व्यक्ति भी इसे मानने को तैयार नहीं है, क्योंकि पूरे चुनाव के दौरान जिस मजबूती से गठबंधन ने बीजेपी का मुकाबला किया, उसे हर किसी ने देखा। बीजेपी का राष्ट्रवाद इतना प्रचंड नहीं था कि वो जातिगत समीकरण पर भारी पड़े. खुद बीजेपी के कई नेताओं ने भी इसे स्वीकार किया है. तो ऐसे में बीजेपी के विरोधियों का ये सवाल उठाना लाजिमी है कि एग्जिट पोल के नतीजों के पीछे ईवीएम से जुड़ी घटनाएं तो नहीं हैं?

सबसे पहले हम यह जानते है की एग्जिट पोल के नतीजों पर सवाल क्यों उठ रहे हैं, इसे समझने के लिए हमें साल 2014 के चुनाव नतीजों पर ध्यान देना पड़ेगा। ये वो दौर था, जब पूरे देश की तरह यूपी में मोदी की लहर थी. गली-गली में मोदी की गूंज सुनाई देती थी. गुजरात से कट्टर हिंदुत्व और डेवलपमेंट के मॉडल के तौर पर आए PM मोदी से धारा 370 हटवाने और राम मंदिर बनवाने जैसी उम्मीदें थीं।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत 42.3 था वहीं समाजवादी पार्टी को 22.2 प्रतिशत वोट मिले और उसे 5 सीटें मिली थीं। बीएसपी को 19.6 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन उसका खाता नहीं खुला हालांकि उस दौरान एसपी और बीएसपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।

विपक्ष बिखरा था, लेकिन इस बार हालात अलग हैं. दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। तो ऐसे में 2014 के एसपी और बीएसपी के वोट प्रतिशत को मिला दिया जाए तो आंकड़ा पहुंचता है 41.8 प्रतिशत, जबकि मोदी लहर के बावजूद बीजेपी को 42.3 प्रतिशत वोट मिले थे। लगभग 40 सीटें ऐसी थीं, जहां एसपी-बीएसपी का कुल वोट प्रतिशत बीजेपी से ज्यादा था।

ऐसे में अगर 2014 के चुनाव नतीजों को ही मिसाल के तौर पर लें, तो एग्जिट पोल के नतीजे किसी के गले नहीं उतर रहे हैं। 2014 में सपा बसपा अलग भी उस समय हमने यह माना की उत्तर प्रदेश में बीजेपी का मत भारी था पर अब महागठबंधन को भी कई एग्जिट पोल ने नकार दिया ऐसा बिल्कुन मुमकिन नहीं है।

ऐसे में एग्जिट पोल के नतीजे किसी के गले नहीं उतर रहे हैं। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा है कि जिस गठबंधन ने बीजेपी की नींद उड़ा दी, उसे एग्जिट पोल रिपोर्ट में वोटरों ने कैसे खारिज कर दिया? यह एक सोची समझी साजिश के तौर पर ही किया जा रहा है अब तो कल आने वाले नतीजों को देख कर ही पता चल पायेगा।

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