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मोदी की नीतियों को लेकर आडवाणी का फूटा गुस्सा, उठाये यह सवाल ?

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(Image Credits: Hindustan times)

भारतीय जनता पार्टी में अभी भी टिकट को लेकर समस्या है। टिकट पाने की लाइन में सभी पार्टयों के नेता अपना सारा जोर लगा है। परन्तु इस लाइन एक शक्श ऐसा भी है जिसने अपनी पूरी जिंदगी बीजेपी पार्टी को समर्पित कर दी परन्तु टिकट के भागिदार न बन पाए। हम बात बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की कर रहे है जिन्हे बीजेपी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। आडवाणी ने चुनाव को लेकर कोई भी बयान नहीं दिया था परन्तु उन्होंने इस बार ब्लॉग लिख कर अपने मन की बात कही।

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आडवाणी ने लिखते हुए कह, बीजेपी ने कभी भी अपने आलोचकों को दुश्मन या फिर देश-विरोधी नहीं करार दिया। उन्होंने यह भी कहा- मेरी इच्छा है कि हम सभी देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाने के मकसद से आगे बढ़ें। चुनाव लोकतंत्र का पर्व होते हैं, यह बिल्कुल सच बात है। पर इसके साथ ही यह भारतीय लोकतंत्र के सभी भागीदारों के लिए आत्मनीरिक्षण का मौका भी होता है, जिसमें राजनीतिक दल, मीडिया, चुनाव प्रक्रिया को अंजाम देने नए अधिकारी समेत अन्य संबंधित लोग होते हैं।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने चुनाव के टिकट कटने के बाद ब्लॉग लिखकर चुप्पी तोड़ी, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उस पर जवाब दिया। गुरुवार को ट्वीट कर उन्होंने कहा कि आडवाणी जी ने सही मायने में बीजेपी के सार को पेश किया है। उन्होंने पार्टी को राह दिखाते हुए ‘देश पहले, फिर पार्टी और सबसे बाद में स्वयं’ का मंत्र दिया। मुझे बीजेपी कार्यकर्ता होने पर गर्व है। साथ ही इस बात पर भी फक्र है कि आडवाणी जी सरीखे महानुभव ने पार्टी को मजबूत बनाया।”

दरअसल, पार्टी ने इस बार आडवाणी को गुजरात के गांधी नगर से टिकट नहीं दिया। आडवाणी के बजाय बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चुनावी मैदान में उतारा गया है। आडवाणी ने पत्ता साफ होने के बाद चुप्पी साध ली थी, जबकि छह अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस से पहले इसी बाबत एक लंबा-चौड़ा ब्लॉग लिखा।

मोदी सरकार का विरोध करने वाले राजनीतिक स्वरों को ‘राष्ट्र विरोधी’ करार देने के चलन को लेकर छिड़ी बहस के बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता के इस टिप्पणी को बेहद अहम माना जा रहा है। ‘नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट ’’ शीर्षक से अपने ब्लाग में आडवाणी ने कहा, ‘‘भारतीय लोकतंत्र का सार विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिये सम्मान है। अपनी स्थापना के समय से ही भाजपा ने राजनीतिक रूप से असहमत होने वालों को कभी ‘दुश्मन’ नहीं माना बल्कि प्रतिद्वंदी ही माना।’’


ब्लॉग में लिखी गयी बात ने यह साबित कर दिया की बीजेपी अपने समर्थको और पार्टी के लोगो को दुशमन नहीं समझेगी। आडवाणी ने यह बात बोल कर बीजेपी और मोदी दोनों पर ही सवाल खड़े कर दिए परन्तु आडवाणी के ब्लॉग पर मोदी ने सहमति जताई। अब मोदी की सहमति है या फिर दिखावा यह तो नहीं पता परन्तु इतना यह बात तो साफ़ है की आडवाणी को बीजेपी पार्टी ने टिकट नहीं देने का मन बना लिया है। बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेता के साथ इस प्रकार के व्यहवाहर कही बीजेपी पार्टी को चुनाव में न ले डूबे।

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