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चुनावी में मिली हार के बाद कायापलट में जुटी कांग्रेस, राहुल गांधी ने बनाए यह पांच योजनाएं !

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(image credits: Reuters India)

लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में मिली हार के बाद कांग्रेस कुछ बड़े फैसले लेने को तैयार है। एक तरफ पार्टी हार के कारणों को तलाशने में जुटी है। तो वहीं कांग्रेस चीफ राहुल गाँधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्तारूढ़ बीजेपी के विकास रथ को पछाड़ने के लिए हरकत में आ गए हैं। दरअसल राहुल गाँधी कांग्रेस की कायापलट करने के लिए पांच अहम योजनाएं लेकर आये हैं।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पार्टी आलाकमान ने हार पर सभी प्रभारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जिसमे गहराई से समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस इसके आलावा अपने काम करने के तरीकों में संशोधन करने पर विचार विमर्श कर रही है, ताकि भविष्य में उन्हें पुरानी गलतियों का सामना न करना पड़े।

बताया जा रहा है की कांग्रेस द्वारा लाये जा रहे पांच योजनाओं में से पहली चीज होगी, चुनाव में मिली हार पर प्रभारियों पर रिपोर्ट जुटाना। राहुल गाँधी ने पार्टी के सभी प्रभारियों से चुनाव में मिली हार पर रिपोर्ट मांगी है, जिसकी समीक्षा होनी है। दूसरे प्लान के अनुसार कांग्रेस ऊपर से लेकर नीचे तक यानी कि बूथ स्तर पर अपनी हार की वजहें तलाशेगी। इसके साथ साथ इस प्लान में स्थानीय लोगो से प्रतिक्रिया लेने और इन प्रतिक्रियाओं पर नेताओं का रुख जाना जाएगा।

वहीं कांग्रेस के तीसरे योजना के तहत पार्टी राहुल की कार्य शैली और संगठन में बदलाव करने पर सोचेगी। इस योजना में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत और आपसी सहमति के बाद उसपर अम्ल करना भी संभव है। चौथे प्लान में यह जाना जाएगा कि आखिर गलती कहां और कैसे हुई, जबकि पांचवें और आखिरी योजना में प्लान का मकसद पाई गई सभी कमियों को दूर करके नए और सकारात्मक चीजों को अपनाकर बदलाव में जुटना होगा।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह बताया जा रहा है की, कांग्रेस आने वाले दिनों में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के रास्ते पर बढ़ती हुई नजर आ सकती है, क्योंकि बीजेपी ने इस चुनाव में उसी के आधार पर अच्छा-खासा जनादेश हासिल किया।


कांग्रेस द्वारा सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर चलने की बात से यह लगता है की कांग्रेस भी बीजेपी की राह पर चलने को तैयार है। बता दें कि 542 सीटों पर हुए इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अपने दम पर 303 और एनडीए को 353 सीटें हासिल हुई थीं।

वहीँ कांग्रेस को इस चुनाव में बीजेपी की तुलना में महज 52 लोकसभा सीटों से संतुष्ट होना पड़ा। हालांकि, इससे पहले 2018 के अंत में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों में किला फतह किया था, जिसमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में उसकी सरकार बनी थी।

एकतरफ कांग्रेस पार्टी अपने गलतियों पर मंथन कर उससे उभरने की कोशिश कर रही है। वहीँ दूसरी ओर मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेता व मुक्यमंत्री कमलनाथ अपने बेटे के साथ विपक्षी पार्टी बीजेपी के नेता व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ से मुलाकात करते देखे गए। पीएम मोदी से कमलनाथ और उनके बेटे की मुलाकात के निर्णय को कांग्रेस में हैरानी के रूप में देखा जा रहा है।

आपको बता दे की कांग्रेस को चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी द्वारा बुलाई गई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी कमलनाथ शामिल नहीं हुए थे। वहीं कुछ लोगों का यह मानना है कि कमलनाथ अपने बेटे के साथ पीएम मोदी से मुलाकात कर गांधी परिवार को संकेत भी देना चाहते हैं।

हार के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा इसकी समीक्षा करना, उनकी पार्टी और बीजेपी छोड़ बाकी पार्टियों के लिए भी सही शाबित हो सकता है। देखा जाये तो कांग्रेस के साथ साथ चुनाव में बाकि विपक्षी पार्टयों को भी इसपर गहन विचार करके एक बार फिर बीजेपी के सामने मजबूत विपक्ष बनकर सामने आना चाहिए।

बीजेपी ने इस चुनाव में जीत तो हासिल कर लिया है, परन्तु वह देश की जनता से किये गए वादों पर खरा उतरेगी या नहीं यह तो आने वाले पांच साल बताएंगे। यह सभी को पता है कि, किस तरह बीजेपी ने लोगो को गुमराह करके इस चुनाव में जीत हासिल की है। अब देखना यह होगा की आने वाले पांच सालो में बीजेपी देश की जनता को और कितना गुमराह करेगी।

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