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JDU के बाद अब शिवसेना ने भी BJP से संबंध तोड़ने के दिए संकेत

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(image credits: Hindustan Times)

बीजेपी पार्टी के फैसलों से यूँ तो उनके अपने ही नेता नाराज़ होते रहे है परन्तु इस बार बीजेपी की सहयोगी पार्टियां भी उनसे खफा होती नजर आ रही है। खबर थी की NDA में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। ऐसा लगता है की NDA पार्टी में सब कुछ बिगड़ता जा रहा है। यहाँ तक की JDU के साथ भी NDA के रिश्ते बिगड़ते नजर आ रहे है। अब वही JDU के बाद बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना नाराज चल रही है।

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जनसत्ता खबर के अनुसार मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना और बीजेपी में मनमुटाव है। राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। दोनों पार्टियां यहां अपना-अपना मुख्यमंत्री चाहती हैं। शिवसेना एक बार फिर ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला चाहती है, वहीं, अमित शाह महाराष्ट्र में बीजेपी का मुख्यमंत्री चाहते हैं। शिवसेना के सूत्रों का कहना है कि अमित शाह ने कहा था कि दोनों दलों में ज़िम्मेदारियां बराबर बांटी जाएंगी। ऐसे में मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल भी बराबरी से बांटा जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें अमित शाह जी की बात पर पूरा भरोसा है। आख़िरी निर्णय अमित शाह और उद्धव ठाकरे लेंगे।

उधर, इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की भी नाराजगी सामने आई थी। बिहार में बीजेपी के सहयोग से सरकार चला रही JDU के किसी भी मंत्री को केंद्र सरकार में शामिल नहीं किया गया। हालांकि नीतीश कुमार ने यह साफ किया है कि हम पहले भी साथ थे और आगे भी रहेंगे। नीतीश कुमार ने कहा था कि जेडीयू के किसी भी नेता को केंद्र में मंत्रिमंडल न देने का मुद्दा अब खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र में बीजेपी की अपनी बहुमत की सरकार है और सरकार चलाने के लिए उनको किसी सहयोगी दल की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर भविष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र और बिहार सरकार साथ मिलकर काम कर रही है। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर नीतीश कुमार ने कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जेडीयू-बीजेपी साथ मिलकर लड़ेगी।

हालांकि रविवार को पटना में JDU की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया कि जेडीयू बिहार के बाहर NDA का हिस्सा नहीं होगी। बैठक में हुए फैसले के अनुसार नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड बिहार के बाहर होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव अकेली लड़ेगी. बता दें कि हाल ही में नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था, जिसमें जेडीयू के 8 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, लेकिन बीजेपी से किसी भी नेता को मंत्री नहीं बनाया गया।

उधर, महाराष्ट्र के वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुंगंटीवार का दावा है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री उनकी पार्टी का होगा। उनका यह भी कहना है कि भाजपा और गठबंधन सहयोगी शिवसेना इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के लिए जल्द ही सीटों के बंटवारे के लिये एक समझौते पर पहुंचेगी। मुंगंटीवार ने सोमवार को नासिक में कहा, ‘अगला मुख्यमंत्री भाजपा से होगा। इसे लेकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन में कोई नाराजगी नहीं है। इस बार हम 288 सदस्यीय विधानसभा में 220 से अधिक सीटें जीतेंगे।’ उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना के नेता राज्य विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे के लिए एक समझौता पर काम कर रहे हैं. मुंगंटीवार ने कहा, ‘सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय जल्द लिया जाएगा. हम अपने गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे।’


इस बीच, मुंगंटीवार की टिप्पणियों को नजरअंदाज करते हुए शिवसेना के एक नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि गठबंधन के दोनों सहयोगी सभी जिम्मेदारियां साझा करेंगे और विधानसभा चुनाव में बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।

देखा जाए तो सहयोगी पार्टी बीजेपी पार्टी से काफी नाराज चल रही है। पूरा बहुमत मिलने के चलते भाजपा को किसी सहयोगी पार्टी की जरूरत नहीं परन्तु भविष्य के लिए मोदी सरकार को सबके साथ की जरूरत है परन्तु घमंड के चलते अब बीजेपी सरकार किसी को भी मंत्री पद नहीं देना चाहती। या तो फिर ऐसा माना जा सकता की बीजेपी सिर्फ अकेले ही राज करना चाहती है।

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