fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
राजनीति

अखिलेश यादव का बड़ा बयान, पार्टी में करेंगे यह बड़े बदलाव

Akhilesh-Yadav's-big-statement,-will-make-a-big-change-in-the-party
(Image credits: hindi.thequint.com)

बहुजन समाजवादी पार्टी को लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद भी लोकसभा चुनाव में बहुमत के करीब भी नहीं पहुँच पायी। सपा बसपा गठबंधन को इस समय काफी मजबूत माना जा रहा था और कहा जा रहा था की वह मोदी की भ्रष्ट सरकार को सत्ता से निकाल फेकेगी। चुनाव के नतीजों के बाद अखिलेश यादव ने मोदी पर निशाना भी साधा था।

Advertisement

दूसरी और बसपा प्रमुख अखिलेश यादव इस हार के बाद एक बड़ा कदम उठाने जा रहे है। बसपा और रालोद से गठबंधन के बाद भी लोकसभा चुनाव में 32 प्रत्याशियों की हार से समाजवादी पार्टी ने संगठन स्तर पर बड़े फेरबदल की शुरुआत कर दी है। चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद मिली हार की वजहों पर घमसान भी शुरू हो गया है। सोमवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं से अलग-अलग फीडबैक लिया। इस दौरान संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी मौजूद रहे।

कहा तो यह जा रहा है कि अखिलेश यादव ने चुनाव में सुस्त रहे नेताओं पर अपना गुस्सा निकाला है। और इसी के चलते अब कई नेताओं पर एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है। संगठन में बड़े स्तर की फेरबदल की शुरुआत भी हो चुकी है। अखिलेश यादव ने सपा के चारों फ्रंटल संगठन लोहिया वाहिनी, समाजवादी युवजन सभा, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड और समाजवादी छात्रसभा को भंग करने का मन बना लिया है। इसके अलावा नए प्रदेश अध्यक्ष की भी तलाश शुरू हो गई है।

समाजवादी पार्टी ने हार पर मंथन की शुरुआत पार्टी के मीडिया पैनेल को भंग कर कर दी थी। सोमवार को अखिलेश यादव ने पार्टी के प्रमुख नेताओं और विधायकों से अलग-अलग मुलाकात की। इनमें पूर्व मंत्री अहमद हसन, ओमप्रकाश सिंह, अरविन्द सिंह गोप, अवधेश प्रसाद, मनोज परस, योगेश प्रताप सिंह, पूर्व विधायक भीम प्रसाद सोनकर, एमएलसी उदयवीर सिंह, सुरेश यादव आदि ने अखिलेश से मिलकर उन्हें फीडबैक दिया. कहा यह भी जा रहा है कि कई नेताओं ने बसपा का वोट सपा प्रत्याशी को उम्मीद के मुताबिक ट्रांसफर न होने की बात भी कही।

लोकसभा चुनाव में सपा को पिछले चुनाव के बराबर 5 सीटें मिली थी हालांकि सपा के गढ़ के तौर पर विख्यात कन्नौज, बदायूं और फिरोजाबाद में उसे हार का सामना करना पडा था। देखा जाए तो बसपा से गठबंधन के तहत सपा ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन उसके पांच प्रत्याशी ही जीतने में कामयाब रहे। जबकि परिवार के ही तीन सदस्य पत्नी डिंपल यादव और दो चचेरे भाई अक्षय यादव और धर्मेंद्र यादव को हार झेलनी पड़ी ।


अखिलेश यादव उपचुनाव और 2022 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव को देखते हुए जल्द ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने की कोशिश में हैं। यह एक अच्छी बात है की हार से सबक लेते हुए अखिलेश यादव फिर एक बार खड़े हो गए है और पार्टी के हक़ में बड़े फैसले ले रहे है। अब देखना यह है की वह उन नेताओ पर क्या एक्शन लेते है जिन्होंने चुनाव के दौरान काफी ढिलाही बरती।

अखिलेश यादव का नाखुश होना और सांसदों पर एक्शन लेना यह साफ़ दर्शाता है की वह आने वाले चुनाव को हलके में नहीं ले सकते उन्हें वह लोग चाहिए जो पार्टी को जीजान से जितने का दम रखते हो, जो पार्टी को आगे लेजाने में सक्षम हो।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved