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टिकट न मिलने से नाराज शाइना एनसी ने बीजेपी को दिया मैसेज, महिला आरक्षण का उठाया मुद्दा

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(Image Credits: Hindustan Times)

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों में महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा की बात करते आयें है। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी महिलाओ के सशक्तिकरण की बातें तो करती है। परन्तु सरकार अपने कार्यकाल में इन्हे पूरा करने असमर्थ शाबित हुई है। प्रधानमंत्री मोदी का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने को है। और इसके साथ साथ अब सरकार की विफलता भी सामने आने लगी है। एक तरफ मौजूदा सरकार के कामों पर विपक्ष तो सवाल उठा ही रहा, वहीं दुसरी ओर अब बीजेपी से ही कुछ लोग अपनी पार्टी की नीतियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

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हम बात करने जा रहे हैं, महाराष्ट्र बीजेपी से भाजपा की प्रवक्ता शाइना एनसी (Saina NC) की। दरअसल को बीजेपी प्रवक्ता ने महिलाओं के चुनाव में प्रतिनिधित्व की बात करते हुए अपनी ही पार्टी की आलोचना कर दी। बीजेपी प्रवक्ता शाइना एनसी (Saina NC) ने कहा वह निराश है की उनकी पार्टी सहित अधिकतर राजनीतिक दलों ने लोकसभा चुनावों में महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व नहीं दिया है।

शाइना ने एक तरफ अपनी पार्टी की आलोचना तो की। दूसरी ओर उन्होंने विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और उड़ीसा में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा इससे अन्य दलों को ”जागने की जरूरत है। क्योंकि वे महिला हितों को लेकर केवल बयानबाजी करते हैं। बता दे की पश्चिम बंगाल और ओडिशा में दोनों नेताओं ने क्रमश: 33 फीसदी और 41 फीसदी महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है।

उन्होंने बताया की कई पार्टियां महिलाओं के हितो के बारे में बाते तो करते हैं। परन्तु महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाते। ऐसा कहकर उन्होंने अपनी पार्टी भाजपा सहित उन विपक्षी दलों पर निशाना साधा है जो महिलाओ के बारे में बाते करते हैं।

शाइना ने आगे कहा ‘योग्यता को भी अवसर की आश्यकता होती है। प्रतिभा को निखरने के लिए मौका चाहिए होता है। पार्टी नेतृत्व को चाहिए वह महिलाओं को भी उनकी चुनावी क्षमताएं साबित करने का मौका दे। सभी पार्टियों को जागने की जरूरत है। देश की करीब आधी मतदाता महिलाएं हैं।


बता दें की महराष्ट्रा में 48 लोकसभा सीटों पर प्रमुख दलों ने केवल 13 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। महाराष्ट्र में इस बार भाजपा ने सात महिला उम्मीदवारों, कांग्रेस ने तीन और राकांपा और शिवसेना ने एक-एक महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है।

शाइना NC ने इसके साथ साथ महिला आरक्षण की भी बात की। उन्होंने टीएमसी और बीजेडी की तरफ से 33 फीसदी टिकट महिलाओं के लिए आरक्षित करने के बावजूद बाकी पार्टियों के ऐसा न करने पर सवाल उठाए हैं।

इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘ऐसा करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, महिलाओं के प्रति सम्मान और भरोसे की जरूरत होती है, सिर्फ घोषणापत्रों से कुछ नहीं होता। राजनीतिक दलों में पुरुषवादी मानसिकता हावी है, जब भी किसी महिला का नाम प्रत्याशी के रूप में सामने आता है तो उसके जीतने की संभावना और फंडिंग पर सवाल उठते हैं। खासतौर पर तब जब वो किसी बड़ी हस्ती की रिश्तेदार न हो। मैं पुरुषवादी मानसिकता से लड़ाई जारी रखूंगी चाहे वो मेरी पार्टी में हो या दूसरी पार्टियों में।’

बताया जा रहा है भाजपा ने इस बार शाइना एनसी को टिकट नहीं दिया है। जब उनसे इस बारे में पुछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, सवाल सिर्फ मेरा नहीं है। हम सभी चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन यह व्यक्तिगत नहीं है। लेकिन अगर आप उन्हीं महिलाओं को मौका देंगे जिनका बड़े नेताओं से पारिवारिक संबंध है तो हम जैसी महिलाएं कैसे आगे बढ़ पाएंगी? यह मेरे या किसी एक राजनीतिक दल के संबंध में नहीं है।’

जब उन्हें महाराष्ट्र में बीजेपी द्वारा अपने कोटे की 25 सीटों में से सात यानी 28 फीसदी महिला प्रत्याशियों को देने के बारे में बताया गया। तब उन्होंने कुछ इस प्रकार कहा, ‘इनमें से अधिकांश पार्टी नेताओं की बेटियां हैं। क्या आपको लगता है कि सात प्रत्याशी पर्याप्त हैं? इनमें से पूनम महाजन, प्रीतम मुंडे और हिना गावित पार्टी नेताओं की ही बेटियां हैं। स्मिता वाघ पार्टी नेता की पत्नी है। क्या आप इसे महिलाओं का प्रतिनिधित्व कहेंगे। मुझे किसी के पारिवारिक संबंधों से शिकायत नहीं है लेकिन यदि दूसरों में प्रतिभा है तो उन्हें भी मौका मिलना चाहिए।’

मौजूदा सरकार पर इन सभी आरोप से पता चलता है की, कांग्रेस की तरह बीजेपी भी अपनी पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा दे रही है। बीजेपी भी विपक्षी पार्टी कांग्रेस की तरह अधिकतर अपने परिवार के सदस्यों को ही टिकट दे रही है। परिवारवाद के मामले में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही एक समान है। इसके साथ साथ भाजपा प्रवक्ता ने पार्टी में पुरषवादी मानसिकता होने की भी बात कही है। इससे यह पता चलता है की बीजेपी में महिलाओ को पूर्ण रूप से निर्णय लेने का हक नहीं है।

सरकार वैसे तो महिलाओ के अधिकार और समाज में उनका बराबर के योगदान जैसी बड़ी बड़ी बातें करती है। परन्तु उनके ही पार्टी में एक आम महिला के साथ इस प्रकार का व्यवहार होना पार्टी में महिलाओ के प्रति नीतियों को दिखाता है।

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