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सपा बसपा गठबंधन के बाद बढ़ी भाजपा की मुसीबतें, अपना दल (एस) ने मांगी 6 सीटें

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(Image Credits: AajTak)

सपा बसपा गठबंधन के ऐलान के बाद लोकसभा चुनाव 2019 की राजनीति का घमाशान शुरू हो चूका है। लोकसभा चुनाव की तैयारी की बात करे तो गठबंधन की घोषणा के साथ सपा और बसपा ने शुरुआत की बढ़त बना ली है। अपने-अपने कार्यकर्ताओं के बीच उवापोह और संशय के संकट को खत्म कर दिया है।

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परतुं भाजपा और अपना दल (एस) के बीच अभी भी गतिरोध समाप्त नहीं हुआ है। अपना दल (एस) के नेता एनडीए गठबंधन का हिस्सा रहने के बाद भी अभी भी बीजेपी की प्रदेश के प्रति खुलकर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।

जिले में दोनों दलों के बीच इस गतिरोध का कोई हल निकलने में देर होता हुए देख अब कार्यकर्ताओं में निराशा होती जा रही है। कार्यकर्ताओं के मुताबिक अगर समाधान जल्दी नहीं निकला तो नुकसान हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार पटेल और कुर्मी मतों का प्रतिनिधित्व का दांवा करने वाले इस पार्टी ने अब बीजेपी के समक्ष 6 सीटों की मांग रख दी है। इसके साथ ही पार्टी योगी मंत्रिमंडल में एक और स्थान चाहती है। अपनी मांग को लेकर दबाव के लिए बीजेपी से नाराज अपना दल (एस) ने समस्या का समाधान नहीं होने के कारण प्रदेश की सरकार के किसी भी कार्यक्रम में शामिल न होने का एलान कर दिया है।

लोकसभा चुनाव में प्रदेश के हाई प्रोफाइल सीटों में मिर्जापुर संसदीय सीट भी शामिल है। जहां पर एनडीए गठबंधन की मुख्य सहयोगी अपना दल (एस) कि नेता अनुप्रिया पटेल सांसद है। वह एक बार फिर से इस संसदीय सीट से चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही हैं। किन्तु जिस एनडीए गठबंधन के साथ वह चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है वहां अभी सब कुछ तय नहीं ही पाया है।


सबसे बड़ी बात तो दोनों दलों में सीटों के बटवारें को लेकर मुद्दे की है। भाजपा ने अपना दल को 2014 के लोकसभा के चुनाव में सहयोगी के रूप में मिर्जापुर और प्रतापगढ़ से दो सीटें दिया था। जहां से पार्टी ने जीत हासिल करके पहली बार संसद में अपना दल की नुमाइंदगी दर्ज कराया और मोदी सरकार में मंत्री बनाकर अपना दल नेता अनुप्रिया पटेल को स्थान दिया गया।

लेकिन समय के साथ पारिवारिक विवाद में दो हिस्से हुए अपना दल से अलग होकर अपना दल (एस) के नाम से गठित अनुप्रिया पटेल और आशीष पटेल की नई पार्टी की ताकत बढ़ती गई। विधानसभा चुनावों में भी अपना दल (एस) ने बेहतर प्रदर्शन किया।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने कहा कि प्रदेश में हमारी ताकत बड़ी है। इसलिए सीटें ज्यादा चाहिए और इसके साथ-साथ हमारे कार्यकर्ताओं का भी सम्मान होना चाहिए। समय के साथ दोनों पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तल्ख़ी बढ़ती जा रही है।

मगर अब एक तरफ जहां सपा और बसपा के मेल के बाद सामने एक मजबूत गठबंधन से जीत के प्रति आशांवित सपा और बसपा के कार्यकर्त्ता उत्साहित है तो दूसरी तरफ दोनों दलों में खिंच रही इस नाराजगीं से अब दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं में निराशा होती जा रही है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी को जल्द से जल्द स्थिति साफ कर देनी चाहिए नहीं तो चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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