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असम: BJP के शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों पर दिया विववित बयान

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(image credits: Firstpost)

बीजेपी के मंत्रियो और नेताओं के विवादित बोल थम नहीं रहे। जहाँ बीजेपी को जीत के बाद नेताओं को अपने शब्दों पर काबू रखना चाहिए वहीँ इनके बोल विवादों में घिरते जा रहे है। बीजेपी नेताओ और मंत्रियो की हरकते इस प्रकार से सामने आ रही है की सभी लोग उनके विरोध में उतर रहे है। कभी किसी के साथ मारपीट तो कभी गाली गलोच। यहाँ तक की अपने ही पार्टी के लोगो के साथ झगड़ा मोड़ लेना अब कोई बड़ी बात नहीं है। वही एक और नया मामला सामने आया है जिसमे असम की बीजेपी सरकार के शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को लेकर बड़ा बयान दिया है।

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इस बयान के चलते अध्यापक लोग शिक्षा मंत्री से नाराज है और उनके विरोध में है। यहाँ भी बीजेपी के मंत्री ने इस प्रकार के बोल बोले है जिससे अध्यापको की भावनाओ को ठेस पहुंची है और अब वह सभी अध्यापको ने एक अभियान शुरू कर दिया है जो काफी वायरल हो रही है।

असम की BJP सरकार के शिक्षा मंत्री सिद्धार्था भट्टाचार्य को अपना एक बयान काफी भारी पड़ता दिख रहा है, जिसकी वजह से राज्य के स्कूल टीचर्स ने भाजपा के लोकसभा चुनाव अभियान 2019 के मुख्य स्लोगन ‘मैं भी चौकीदार’ की जगह ‘मैं भी ड्राइवर’ अभियान छेड़ दिया है। टीचर्स का यह अभियान ट्वीटर और फेसबुक पर जबरदस्त वायरल हो रहा है। हालांकि शिक्षा मंत्री ने अपने बयान को गलत तरीके से लेने की बात कहते हुए कहा कि उनका मकसद टीचर्स और ड्राइवरों की तुलना करना नहीं था।

दरअसल असम सरकार में शिक्षा मंत्री सिद्धार्था भट्टाचार्य ने अपने बयान में यह कहा दिया था की टीचर्स एलिजिबिलिटी यानी टेट ड्राइविंग लाइसेंस की तरह है और इसको समय—समय पर रेन्यूअल कराया जाना चाहिए। हालांकि यह सर्टिफिकेट प्राप्त टीचर्स राज्य के प्रथमिक और उच्च प्रथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। इन टीचर्स ने शिक्षा मंत्री के बयान को दुखद बताते हुए सोशल मीडिया पर यह अभियान छेड़ा है।

टेट का ( Teaching eligibility test ) पहला टेस्ट साल 2012 में जारी किया गया था जिसकी वैधता 7 सालों तक है। हालांकि असम में टेट सर्टिफिकेट प्राप्तकर्ता 41000 लोगों में कईयों ने इसको जारी रखने की मांग है। लेकिन सरकार अब 7 साल बाद एक बार फिर से यह टेस्ट आयोजित करने जा रही है। राज्य में अभी लगभग 36500 अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं।


जोरहाट के कुछ अध्यापकों ने अपनी पहचान ना बताने की शर्त पर कहा है कि वो ड्राइवर के पेशे का भी सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि भट्टाचार्य की उस टिप्पणी का विरोध अपने नाम के आगे ‘मैं भी ड्राइवर’ लिखकर कर रहे हैं। हालांकि इसके बाद मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनका कहने का मकसद बस इतना था कि जिस तरह ड्राइवर अपनी योग्यता दिखाने के लिए अपने लाइसेंस का रिन्यूअल कराते हैं, उसी तरह टीचर्स को भी अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री के इस बयान के विरोध में ऑल असम स्टूडेंट यूनियन भी उतर चुकी है। यह राज्य की सबसे बड़ी स्टूडेंट यूनियन है। अब देखना यह है की शिक्षा मंत्री शिक्षकों से माफ़ी मांगते है या फिर उनके इस अभियान के चलते मुसीबते झेलते है।

शिक्षकों की तुलना ड्राइविंग लाइसेंस से करना शर्मनाक है। बीजेपी सरकार के लोग इस तरह बयान बाजी करके अक्सर बचते नजर आये हैं परन्तु इस बार अध्यापको की तरफ से चलाये अभियान मे ‘मैं भी ड्राइवर’ को लेकर विवाद काफी बढ़ रहा है। ऑनलाइन चलाये इस अभियान से कई अन्य क्षेत्रों के शिक्षक भी बीजेपी मंत्री के खिलाफ है

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