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इस वजह से टूट सकता है BJP और शिवसेना का गठबंधन, महाराष्ट्र में भाजपा खतरे में

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विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अगले महीने राज्य की यात्रा शुरू करने जा रहे हैं, जो लगभग हर विधानसभा क्षेत्र से गुजरेगी। इस यात्रा का मकसद कार्यकर्ताओं में गर्मी भरना तो है ही, साथ ही उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने का एक तरह से औपचारिक ऐलान भी होगा।

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सीएम देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की ओर से सीएम पद को लेकर नेताओं को बयान देने से मना करने के बावजूद महाराष्ट्र बीजेपी प्रभारी सरोज पांडे के बयान ने मामला कुछ ज्यादा ही पेचीदा बना दिया है। पांडे ने कहा है बीजेपी सभी 288 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और हर हाल में सीएम बीजेपी का ही होगा।

इधर शिवसेना इसे सहज रूप से इसलिए स्वीकार करने को तैयार नहीं है क्योंकि वह इस बार मुख्यमंत्री पद का बंटवारा चाहती है। उसकी इच्छा यह है कि सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद का आधा कार्यकाल शिवसेना के हिस्से में हो। शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे के बेटे और पार्टी की यूथ विंग के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने 18 जुलाई से जन आशीर्वाद यात्रा शुरू कर दी है। फडणवीस अगस्त से पद यात्रा शुरू करेंगे। इस बीच, बीजेपी प्रभारी सरोज पांडे का बयान बताता है शिवसेना के साथ इस मसले पर उसकी सहमति नहीं है। सीएम फडणवीस अगस्त महीने में अपनी विकास यात्रा निकाल रहे हैं। इसके लिए ‘फिर एक बार शिवशाही सरकार’ और ‘अबकी बार 220 के पार’ जैसे नारों का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि इस बात का ऐलान अभी तक नहीं किया गया है कि यात्रा की शुरुआत कहां से होगी।

शिवसेना फडणवीस को अकेले नेता के रूप में स्थापित होते नहीं देखना चाहती। इस वजह से पार्टी ने आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में समांतर ‘आशीर्वाद यात्रा’ शुरू करने का प्लान तैयार किया है। इसके जरिए पार्टी हाई कमान आदित्य को मुख्यमंत्री के रूप में पेश तो करना ही चाहता है, साथ ही यह संदेश भी स्पष्ट कर देना चाहता है कि मुख्यमंत्री पद के दावेदार अकेले देवेंद्र ही नहीं हैं और न ही शिवसेना की उनके नाम और चेहरे पर चुनाव लड़ने की कोई मजबूरी है।

शिवसेना महाराष्ट्र में अपनी जमीन को दोबारा मजबूत करना चाह रही है। इसी वजह से वह आदित्य ठाकरे को पार्टी धीरे-धीरे मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी बता रही है। इस सिलसिले में पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक आर्टिकल भी लिखा गया था.आर्टिकल में दावा किया गया था कि अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से होगा। पार्टी राज्य विधानसभा का चुनाव अपने ‘ब्रैंड’ पर लड़ना चाहेगी। वैसे बीजेपी लीडरशिप ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के बंटवारे के लिए शिवसेना की इच्छा पर किसी भी रूप में हामी नहीं भरी है।


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