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बीजेपी प्रत्याशी रवि किशन ने भी चुनाव आयोग को दी गलत जानकारियां लेकिन उनपर कोई एक्शन नहीं

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(Image Credits: The Indian Express)

भारतीय जनता पार्टी ने रवि किशन को गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से उम्‍मीदवार बनाया है। 2014 में वे कांग्रेस टिकट पर जौनपुर से लड़े थे। वही अब उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर से भाजपा प्रत्‍याशी रवि किशन की दावेदारी मुश्किल में पड़ सकती है।

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गोरखपुर के निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की गई है कि रवि किशन ने लोकसभा चुनावों के नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामों में हेरफेर किया है। कुशीनगर के संतोष कुमार की शिकायत है कि गोरखपुर से नामांकन में रवि किशन ने जो हलफनामा दिया है, उसने अपनी शैक्षिक योग्‍यता इंटरमीडिएट बताई है।

यह पहला मामला नहीं है जहा भाजपा ने प्रत्याशियों ने अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारियां दी हो इससे पहले भी भाजपा की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर भी इसी तरह के आरोप है की उन्होंने भी चुनाव आयोग को अपने शिक्षा को लेकर गलत जानकारिया दी थी।

स्मृति ईरानी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन शपथ पत्र चुनाव आयोग को सौंप दिया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ कॉमर्स में अपनी डिग्री पूरी की थी, लेकिन अब 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने हलफनामे में उन्होंने यह है उल्लेख किया कि उन्होंने अपनी डिग्री पूरी नहीं की है”

चुनाव आयोग ने द्वारा भी भाजपा प्रत्याशियों और अन्य पप्रत्याशियों के बीच भेद भाव किया जाता है। तेज़ बहादुर यादव का नामांकन रद्द होना इसका एक बाद उदहारण है। वही भाजपा प्रत्याशी रवि किशन की शिकायत करने वाले शिकायतकर्ता का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर से पर्चा भरते समय रवि किशन ने खुद को 1992-93 में रिजवी कॉलेज ऑफ साइंस एंड कॉमर्स, मुंबई से बी.कॉम पास दिखाया था। 2019 के हलफनामे में भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन ने शैक्षिक संस्‍थान का नाम तो वही रखा है, मगर योग्‍यता बी.कॉम की जगह 12वीं बताई है और 12वीं पास करने का साल 1990 बताया गया है।


वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्वी दिल्ली की उम्मीदवार आतिशी ने भाजपा के उम्मीदवार गौतम गंभीर के खिलाफ दो वोटर कार्ड रखने का मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि गंभीर के पास दिल्ली के दो अलग-अलग क्षेत्रों -करोल बाग और राजेंद्र नगर- से दो अलग-अलग वोटर कार्ड हैं पर शिकायत करने के बावजूद भी अभी तक कोई एक्शन आयोग की तरफ से नहीं लिया गया। अब देखना यह है की चुनाव आयोग ने जहा तेज़ बहादुर की एक गलती के कारण उनका नामांकन रद्द करने में कोई देरी नहीं दिखाई वही क्या आयोग इतनी सख्ती रवि किशन के लिया दिखाएगी के नहीं या फिर स्मृति ईरानी की तरह ही रवि किशन को चुनाव आयोग के द्वारा भाजपा का प्रत्याशी होने का लाभ मिलेगा।

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