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सपा बसपा गठबंधन के बाद यूपी में दलितों को लुभाने की तैयारी में भाजपा

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(Image Credits: The Week)

लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने बाकी है ऐसे में सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियां में जुट गई हैं। ऐसे ही उत्तर प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन के बाद भाजपा दलितों के वोट को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में एससी के लिए रिजर्व सभी सीटों पर जीत हासिल की थी।

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आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी फिर से वही प्रदर्शन दोहराना चाहती है लेकिन इस बार राह आसान नहीं है। खासतौर पर सपा और बसपा के साथ आने के बाद भाजपा के लिए दलितों को अपने पक्ष में करना एक चुनौती है।

बसपा सुप्रीमों मायावती ने अपने जन्मदिवस पर पार्टी कार्यकर्ताओं से पिछली बातों को भुलाकर गठबंधन के लिए जुट जाने को कहा है। वही बीजेपी दलितों को किसी भी सूरत में अपने साथ रखना चाहती है। सबका साथ सबका विकास की बात कह कर दलितों को जोड़ना चाहती है।

2014 में बीजेपी ने गैर जाटव दलितों को अपने साथ जोड़ने का सूत्र अपनाया था और ये काफी कामयाब भी रहा था। भाजपा के पास लालगंज में नीलम सोनकर, कौशांबी में विनोद कुमार सोनकर हैं। बुलंदशहर में भोला सिंह खटीक जाति के हैं।

शाहजहांपुर के कृष्णराज पासी हैं, मिसरिख में अंजूबाला, हरदोई में अंशुल वर्मा, मोहनलालगंज में कौशल किशोर, बांसगांव में कमलेश पासवान, बाराबंकी में प्रियंका रावत और सावित्री फुले बहराइच से सांसद हैं।


हाथरस के सांसद राजेश कुमार धोबी, जालौन के भानु प्रताप कोरी, रॉबर्ट्सगंज से सांसद छोटेलाल खरवार,आगरा के एमपी रामशंकर कथेरिया, नगीना के यशवंत सिंह और इटावा से सांसद अशोक डोहरे जाटव हैं।

नगीना और इटावा सीट पर जाटव समुदाय के सांसद हैं। सबसे ज्यादा सात सीट पासी कैंडिडेट के पास हैं। वहीं बीजेपी आने वाले समय में कोरी समुदाय को ज्यादा प्रतिनिधित्व दे सकती है।

(News Source: Oneindia)

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