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बीजेपी नेता मुकुल रॉय ने पश्चिम बंगाल की सीएम पर निशाना साधा, कहा- वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठी हैं

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(image credits: DNA India)

केंद्र की बीजेपी सरकार और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बीच तकरार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कभी बीजेपी नेताओं द्वारा वेस्ट बंगाल में मुख्यमंत्री पर तानशाही करने के आरोप लगाए जाते है तो कभी तृणमूल कांग्रेस के तरफ से भी इसका जवाब दिया जाता है। दरअसल लोकसभा चुनाव में राज्य में बीजेपी की हार के बाद इन आरोप प्रत्यारोपो में इजाफा देखा गया है।

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इसी प्रकार एक बार फिर बीजेपी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच एक दूसरे पर बयानबाजी करने का मामला सामने आया है। दरअसल बीजेपी नेता मुकुल रॉय ने पश्चिम बंगाल की सीएम पर निशाना साधा है। उन्होंने सोमवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना ‘‘मानसिक संतुलन’’ खो चुकी हैं क्योंकि वह भाजपा नेताओं से काला धन लौटाने की मांग कर रही हैं।

उनके बयान पर जवाब देते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि, बनर्जी का मानसिक संतुलन सिर्फ उसी वक्त खोया था जब उन्होंने 2012 में रेलमंत्री के तौर पर तत्कालीन तृणमूल सांसद रॉय के नाम की सिफारिश की थी। रॉय ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठी हैं। वह भाजपा से काला धन लौटाने की मांग कर रही हैं।

बीजेपी नेता मुकुल रॉय ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि वह और लोगों को 25 प्रतिशत धन कटौती का भाषण दे रही हैं। लेकिन बाकी 75 प्रतिशत का क्या, जिसे उनके वरिष्ठ नेताओं ने बेईमानी से चुरा लिया? पहले तो उन्हें पैसे लौटाने चाहिए, फिर दूसरों को नसीहत देनी चाहिए।’’

बता दें की उनका यह बयान रविवार को मुख्यमंत्री बनर्जी के उस बयान के सन्दर्भ में आया है, जिसमे ममता बनर्जी ने कहा था कि पार्टी 26 जुलाई को राज्यव्यापी कार्यक्रम आयोजित करेगी और उज्ज्वला योजना के माध्यम से भाजपा द्वारा कथित रूप से लिये गये काले धन को लौटाने की मांग करेगी।


बीजेपी नेता अक्सर ब्यानबाजी करते वक्त कुछ भी बोलने से नहीं चूकते है, वो यह भूल जाते है की वह लोगो के द्बारा चुने गए है। उनके इस प्रकार के हरकतों के कारण लोगो के बीच गलत संदेश जाता हैं। वहीं अगर देखा जाये तो, ज्यादातर इस प्रकार की बयानबाजी के मामले मौजूदा सरकार की पार्टी के नेताओं द्वारा ही सुनने को मिलती है।

बीजेपी नेताओं द्बारा किसी भी प्रकार की बयानबाजी कर विपक्षी पार्टियों के नेताओं के बारे में कुछ भी बोल देना उचित नहीं लगता। बल्कि उन्हें तो कुछ भी बोलने से पूर्व सोच समझ लेना चाहिए। क्यूंकि उन्हें समझना होगा की वर्तमान में उनकी ही सरकार है और ऐसे हालत में इस तरह का व्यवहार बेहद गलत है।

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