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BJP के मंत्री अपनी पार्टी के खिलाफ दिल्ली में खोलेंगे मोर्चा, क्या टूट सकती है BJP

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(image credits: the week)

चुनाव के समय टिकट ना मिलने पर बीजेपी में बगावत होती रही रही कई लोगो के पार्टी से अलग होने की खबर सामने आई। परन्तु ऐसा लगता है बगावत का सिलसिला बीजेपी में जीत के बाद भी जारी है। उनके अपने नेता खुश नजर नहीं आ रहे इसलिए बीजेपी के नेता अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलने पर अड़े है। बीजेपी के नेता अपनी पार्टी के कामो से नाखुश नजर आ रहे है। ऐसे में बीजेपी की सरकार में एक जंग छिड़ सकती है या फिर यह कहा जा सकता है की आने वाले चुनाव में बीजेपी को भारी नुक्सान उठाना पड़ सकता है।

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मामला मणिपुर का है जहाँ से बीजेपी के नेता, दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए आएंगे। इस मोर्चे में कई बड़े नेता भी शामिल हो सकते है। काम को और फण्ड को लेकर ना खुश नेताओ ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। ऊपर से बीजेपी अपने ही सदस्यों के पद छीन रही है।

मणिपुर की एन बीरेन सिंह की अगुआई वाली सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। सूबे के डिप्टी सीएम वाई जॉयकुमार सिंह और मंत्री टीएच बिस्वजीत सिंह से उनके विभाग छीन लिए गए हैं। इसके बाद, दोनों नेताओं ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जॉयकुमार से वित्त जबकि बिस्वजीत से कार्य एवं ऊर्जा आदि विभाग छीन लिए गए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि आर्थिक दिक्कतों से जूझती प्रदेश सरकार के इन विभागों ने जरूरत से ज्यादा फंड इस्तेमाल किए है। अब सीएम एन बीरेन सिंह खुद इन विभागों का कामकाज देख रहे हैं। सीएम ऑफिस की ओर से खबर सामने आई है कि यह कैबिनेट का फैसला है।

हालांकि, कैबिनेट मीटिंग में शामिल हुए डिप्टी सीएम ने बात ख़ारिज करते हुए यह दावा किया कि बैठक में सिर्फ ओवरड्राफ्ट के मुद्दे पर चर्चा हुई। जॉयकुमार ने आरोप लगाया कि ओवरड्राफ्ट के लिए सीएम जिम्मेदार हैं। उन्होंने मांग की कि अगर कोई ऐक्शन लिया जाना चाहिए तो वह सीएम के खिलाफ लिया जाना चाहिए था। वहीं, बिस्वजीत ने उन आरोपों को खारिज किया कि फंड्स के ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से उन्हें अपने विभाग गंवाने पड़े। उन्होंने कहा, ‘पूर्व में भी सरकारों को ओवरड्राफ्ट के ऐसे हालात का सामना करना पड़ा, लेकिन इस बार इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। इसकी वजह क्या है, वे ही बेहतर बता सकते हैं।’

बता दें कि यह टकराव बीजेपी की अगुआई वाली मणिपुर सरकार के लिए सिरदर्द बन सकता है। सीएम की कार्रवाई के बाद दोनों मंत्री केंद्रीय आलाकमान को हालात की जानकारी देने के लिए दिल्ली पहुंच गए। इसके अलावा, सत्ताधारी पार्टी के 10 विधायक, तीन मंत्री और दो सांसद भी शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। हालांकि, इनके जाने के मकसद के बारे में स्पष्ट जानकारी मालुम नहीं हो पाई है। बीजेपी के मंत्री नेमचा किपगेन, एनसीपी के मंत्री एल जयंतकुमार और एनपीएफ के मंत्री एल दिखो दिल्ली में पहुंचे नेताओं में प्रमुख हैं। दिल्ली पहुंचे किसी भी विधायक या मंत्री से उनकी टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं किया जा सका।


मंत्रियों की नाराजगी साफ़तौर पर यह दर्शाती है की आने वाले समय में बीजेपी सरकार को कितना नुक्सान हो सकता है। अपनी ही पार्टी का ख्याल न रखने वाली बीजेपी सरकार अपने ही नेताओ के विरोध से घिरती जा रही है। बीजेपी अपने लोगो को मना सकती है या फिर उनकी बगावत युहीं जारी रहेगी यह तो देखने वाली बात है। परन्तु यह साफ नजर आता है की आने वाले समय में बीजेपी सरकार खुद की खड़ी की गयी मुसीबतो से टूट सकती है।

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