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बीजेपी सांसद हरिओम सिंह राठौड़ ने चुनाव लडऩे से किया इनकार

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(Image Credits: News18 Hindi)

लोकसभा के चलते पार्टियों में लोगो को टिकट देने पर मुश्किलें बढती जा रही है। किसको टिकट दे या नहीं यह तय करना मुश्किल हो रहा है। वहीं भाजपाओं की मुसीबत बढती जा रही है। टिकट के चलते चुनावी माहौल जंग का मैदान बनता जा रहा है। किसी को टिकट नहीं मिल रही तो कोई मिले मौके को ठुकरा रहा है।

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ऐसा ही किस्सा बीजेपी के खेमे से सुनने में आया है। चुनाव जैसे जैसे करीब आ रहे है बीजपी सरकार सुर्ख़ियों में बनती जा रही है। बीजेपी की तरफ से सांसद ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया जिसके चलते अब बीजेपी में हलचल मची हुई है। सांसद हरिओम सिंह राठौड़ के चुनाव लडऩे से इनकार कर दिया जिससे भाजपा के आला नेता दंग रह गए। चुनाव के लिए उनका नाम बहुत पहले तय हो चुका था, केवल पार्टी की मुहर लगनी बाकी थी।

कृषि राज्य मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत का टिकट तय होने के बाद उनके नाम की अटकलों पर भी विराम लग गया है। अब इस सीट पर कई दावेदार टिकट के लिए जयपुर से दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं। हरिओम के नाम पर किसी ने विरोध नहीं जताया लेकिन वह हटे तो कई दावेदार सामने आ गए हैं। इस सीट पर प्रत्याशी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के बीच भी कश्मकश है। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पुन: सर्वे कराने को कहते हुए फैसला टाल दिया है।

पार्टी ने केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत व पूर्व विधायक दीयाकुमारी को राजसमंद से लड़ाने का ऑफर दिया लेकिन इन नामों पर गुलाबचंद कटारिया ही सहमत हुए, परन्तु राजे की सहमति नहीं मिली। राजे ने नागौर के भंवरसिंह पलाड़ा का नाम आगे बढ़ाया तो दिया लेकिन सहमति नहीं बनी।

हरिओम के पीछे हटने के बाद कई दावेदार सामने आये। राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी, भाजयुमो नागौर जिलाध्यक्ष और वसुंधरा राजे के नजदीकी माने जाने वाले भंवर सिंह पलाड़ा, भाजपा प्रदेश महामंत्री वीरमदेव सिंह जैसास, पूर्व विधायक हरिसिंह रावत, पूर्व प्रदेश मंत्री व गुलाबचंद कटारिया के नजदीकी प्रमोद सामर, सहित जगत नारायण जोशी, गजपालसिंह राठौड़ आदि।


भाजपा में टिकटों को लेकर युद्ध शुरू हो गया है। पहली सूची घोषित होने के साथ ही शेष सीटों पर टिकट लेने वालो की हलचल बढ़ गई है। दौसा से ओमप्रकाश हुड़ला की पत्नी के नाम की चर्चा के बीच पूर्व मंत्री और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं गोलमादेवी ने भी टिकट के लिए दावा ठोक दिया है। वह शुक्रवार शाम भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचीं और बड़े नेताओं से मिलकर दौसा सीट से टिकट मांगा।

इससे पहले दोपहर में राजसमंद से बड़ी संख्या में आए लोगों ने बाहरी उम्मीदवार नहीं थोपने की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी से मिलकर इन लोगों ने कहा कि राजसमंद सीट से स्थानीय व्यक्ति को ही प्रत्याशी बनाया जाए।

देखा जाए तो चुनावी माहौल शुरू होते ही बीजेपी के खेमे में हलचल मच जाती है। सभी सांसद अपने टिकटो के लिए लड़ते नजर आते है। बीजेपी के सांसद टिकट पाने के लिए अपने ही पार्टी पर आरोप प्रत्यारोप लगाने पर उतारू हो जाते है। जब पार्टी में यह हाल है तो चुनाव जितने के बाद इनके ठाठ कितने बढ़ जायेंगे या सोचने वाली बात है। जनता को ऐसे उम्मीदवार की जरूरत है जो उनकी समस्याओ का हल निकाले न की खुद आपस में लडे।

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