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महासम्मेलन के जरिए पिछड़ों के बाद दलितों को रिझाने में लगी बीजेपी, जानिए बीजेपी की प्लानिंग

BJP Flag

उत्तरप्रदेश में बीजेपी ने 2019 मिशन की तैयारी पूरी कर ली है। बीजेपी अपने बड़े बड़े जुमलों से फिर एक बार फिर समाज में झूठे वादे करने के लिए सम्म्मेलन और महासम्मेलन कर दलित समाज को रिझाने की भरपूर्ण कोशिश में लगी है। पिछले दिनों राजधानी में पिछ़ड़ी जातियों का सम्मेलन कार्यक्रम करने के बाद बीजेपी अब 21 नवम्बर से दलितों के उप जातियों का सम्मेलन करेगी।

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यह सम्मलेन वही किया जायेगा जहा पर पिछड़ी जातियों का सम्मेलन हुआ था। यह सम्मलेन पीडब्ल्यूडी के विश्वेसरैया हाल में होगा। बीजेपी के बड़े बड़े रणनीतिकारों ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए 2019 में दलित एवं पिछङे वर्ग को अपनी और रिझाने की पूरी तैयारी कर रही है। एक बाद फिर भाजपा सरकार अपने जुमलों के साथ दलित समाज वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने ही पूरी होड़ में जुट गई है।

सीएम योगी आदित्यनाथ भी होंगे शामिल

अपने आप को दलित समाज के हितेशी बनने वाले योगी आदित्यनाथ 21 नवम्बर से राजधानी लखनऊ में होने वाले दलित समाज सम्मेलन में खुद भी हिस्सा लेंगे। पहला सम्मेलन दलितों में जाटव एवं चमार उप जातियों का होगा। योगी के साथ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्रनाथ पांडे और बीजेपी संगठन मंत्री सुनील बंसल भी रहेंगे।

पिछले लोकसभा चुनाव 2014 विधानसभा चुनाव 2017 में भले भी बीजेपी अपने जुमलों से मोदी लहर और बाद में बीजेपी वेव के चलते बीएसपी प्रमुख मायावती के परंपरागत दलित वोट बैंक में सेंध लगाने में सफलता हासिल कि थी। पर अब दलित समाज इन जुमलों को अच्छे से समझ चूका है। भाजपा ने अपने झूठे वादों से लोकसभा चुनाव 2014 में जहां बीजेपी के 71 सांसद विजयी हुए थे वहीं विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी 312 सीटों पर विजय पाने में सफलता हासिल की थी। पिछले दो दशकों से, पहले कांशीराम ने दलित वोटबैंक को अपना बनाया और उसके बाद मायावती के बीएसपी की कमान संभालने के बाद भी दलित वोटबैंक बीएसपी के साथ निष्ठा बनाए हुए है। आशा है की यह दलित वोट बैंक भाजपा को जुमलों को समझ मायावती का साथ 2019 में बना रहेगा।

उत्तर प्रदेश में कुल वोटबैंक का लगभग 20 प्रतिशत दलितों का वोटबैंक है। ऐसे में भाजपा सरकार साम दाम दंड भेद को अपना कर दलित वोट अपने पक्ष में करने की होड़ में है। कोई भी राजनैतिक पार्टिया चाहे वह भाजपा को या कांग्रेस या कोई अन्य दल ऐसे में किसी भी दल के लिए दलितों के वोटबैंक का अपने पाले में करना बहुत जरूरी हो जाता है।


30 नवंबर तक चलेगे सम्मेलन

दलितों को लुभाने के लिए बीजेपी की यह रणनीति कितनी कामगार साबित होगी यह तो आने वाले चुनाव के परिणाम ही तय करेंगे। प्रश्न यह उठता है की क्या दलित समाज इस बार इन जुमलों और झूठे वादों से अपने आप को कैसे बचा पाती है। बता दें कि इसी कड़ी में 21 नवम्बर को बीजेपी का जाटव और चमार सम्मेलन होगा। इस सम्मलेन में पासी समाज, धनुक, कोरी और अन्य उप जतियों का भी सम्मेलन होगा जो की 30 नवंबर तक चलेगा।

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