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BJP अब इस दलित चेहरे का इस्तेमाल कर बहुजनो पर खेलगी बड़ा दाव

(image credits: neswsnation)

भारतीय जनता पार्टी दलितों को अपनी ओर साधने के लिए लगातार नए नए पैतरे अपना रही है हाल ही में बीजेपी ने राज्यसभा में नेता सदन पद पर भी सोशल इंजीनियरिंग का दांव खेला है। यह कोई छोटा मोटा दाव नहीं बल्कि दलित वोटो को साधने के लिए बहुत बड़ा डाव माना जा रहा है।

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आपको बता दे की भाजपा ने सियासी दांव चलते हुए दलित चेहरे थावरचंद गहलोत को अरुण जेटली वाली कुर्सी दी है। इसके जरिए बीजेपी ने बड़ा सियासी और सामाजिक संदेश दिया है। 71 वर्षीय थावरचंद गहलोत इस बार भी मोदी सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

इससे पहले अरुण जेटली बीजेपी की ओर से नेता सदन की कमान संभालते थे। मगर खराब स्वास्थ्य के कारण जेटली ने इस बार पीएम मोदी को पत्र लिखकर सरकार में किसी तरह की जिम्मेदारी न देने का अनुरोध किया था। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा में नेता सदन पद पर भी सोशल इंजीनियरिंग का दांव खेला है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से पहले भी कई बार बहुजनो के वोट को अपनी ओर साधने के लिए दाव खेले है और उसका सीधा फ़ायदा हमने लोकसभा चुनाव के दौरान देखने को भी मिला।

हाल ही में एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी एक ऐसा नेता अध्यक्ष बनाने की फिराक में है, जो सवर्ण और पिछड़ा के साथ दलित वोट बैंक को सहेजकर रखे, लेकिन ज्यादातर चांस सवर्ण नेता के ही बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा का नाम भी इस समय चर्चा में है। उनके पास सरकार का पांच साल का अनुभव है। वह संगठन के भी व्यक्ति माने जाते हैं। इसी तरह उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को भी संगठन में लाकर एक प्रयोग किया जा सकता है। महामंत्री विजय बहादुर पाठक भी अध्यक्ष पद के लिए संगठन की दृष्टि से उपयुक्त माने जा रहे हैं।

वही भाजपा ने केंद्र में सियासी दांव चलते हुए दलित चेहरे थावरचंद गहलोत को अरुण जेटली वाली कुर्सी दी है। इसके जरिए बीजेपी ने बड़ा सियासी और सामाजिक संदेश दिया है। 71 वर्षीय थावरचंद गहलोत इस बार भी मोदी सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बीजेपी दलितों के बीच लगातार पैठ बनाने में जुटी है। इससे पूर्व राष्ट्रपति पद पर रामनाथ कोविंद की नियुक्ति को भी बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग से जोड़कर देखा गया था। सूत्र बता रहे हैं कि पिछली सरकार में जिस तरह से दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं को लेकर विपक्ष हमला साधता था, उसके बाद से बीजेपी दलित चेहरों को आगे बढ़ाकर विपक्ष को माकूल जवाब देने की कोशिश में जुटी है। थावरचंद गहलोत की नियुक्ति इसी कड़ी का हिस्सा है।


गहलोत ने पिछली सरकार में पिछड़ों, वंचित तबकों और दिव्यांगों के लिए कई योजनाओं का खाका तैयार किया था । जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार उन्हें इसी मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया। सूत्र बताते हैं कि थावरचंद गहलोत पीएम मोदी की गुडलिस्ट में शुमार मंत्रियों में से एक हैं। भरोसे का ही प्रतीक है कि उन्हें पार्टी की ओर से गुजरात का केंद्रीय ऑब्जर्वर नियुक्त किया जा चुका है।

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