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सभी राजनैतिक पार्टियों में मची दलित वोटो को जोड़ने की होड़, बसपा ने किया दलित वोटो पर कब्ज़ा

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आने वाले लोकसभा चुनाव में राजनैतिक पार्टिया किसी भी तरह से कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। भाजपा समेत सभी राजनैतिक दलों ने अपनी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। भाजपा वही अपने पुराने राम मंदिर और हिन्दू मुस्लिम मुद्दे को उजागर कर वोट हासिल करने में जुटी है और भाजपा हाल ही में दलित कार्ड खेलने की तैयारी में है।

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वही दूसरी और सपा और कांग्रेस ने भाजपा सरकार के नकमयाबीओ को सबके सामने लाने का मन बना लिया है। सपा और कांग्रेस देश मे भाजपा सरकार के नाकामयाबी को उजाकर करने की रणनीति में जुट गई है। बसपा अपना पुराना दलित एजेंडे पर ही कायम है। बसपा दलित समाज से जुड़े मुद्दों को उठाकर सत्ता मे वापसी की तैयारी में है। देखना यह है की क्या दलित समाज मायावती जी का साथ देगा या नहीं।

अब भाजपा के पक्ष में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत बनारस आ गए हैं और भाजपा ने अभी से ही अपने रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है आरएसएस के कार्यकर्त्ता भाजपा के किया चुनाव प्रचार करने में जुट गए है। वही 25 नवम्बर को अयोध्या में बड़ा आरएसएस ने एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया है जिसमे भाजपा और आरएसएस के सभी कार्यकर्त्ता और मंत्री शामिल होंगे और अपने रणनीति के तहत काम करेंगे।

भाजपा का अनुसूचित जाति मोर्चा सक्रिय

भाजपा ने अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय कर दिया है। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे को चुनावी मुद्दा बनाएगी इस मोर्चे में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 23 दिसंबर को मान्यवर कांशीराम स्मृति उपवन में दलितों के बीच जाकर उन्हें संबोधित करेंगे और उनसे अपने रिश्ते को मजबूत करेंगे। भाजपा जान चुकी है की लोकसभा चुनाव में जीत के लिए दलितों और गरीबो के वोट कितने कीमती है वह दलित वोट बैंक को किसी भी तरह से हाथ से नहीं निकलने देना चाहती। इसी लिए भाजपा को दलित प्रेम जाग गया है।

दलितों के लिए किये गए कामो को गिनवा रही है कांग्रेस

कांग्रेस भी अपने दलित वोटो को बचाने के लिए काम शुरू कर दिया है। लम्बे समय से कांग्रेस के स्थाई समर्थक रहे दलितों को फिर से एक करने का काम शुरू हो चूका है। वही कांग्रेस ने अपने कामो की माउथ पब्लिशिटी करनी शुरू कर दी है, दलितों के साथ खाना खाने से लेकर उनके विकार के लिए किये गए कामो को कांग्रेस सरकार गिनवा रही है। कांग्रेस इन कामो को गिनवा कर रह सोच रही है आने वाले चुनाव में इस काम के आधार पर ही कुछ वोट मिल सके। बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चे को दलित स्वाभिमान के लिए काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। अनुसूचित जाति मोर्चा इसके लिए पूरी तैयारी कर रहा है। दलितों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने क्या काम करवाएं हैं। इसके पर्चे भी बनवाए जा रहे हैं।


बसपा ने किया दलित वोटो पर कब्ज़ा

बसपा ने दलितों के लिए जो कार्य किये है उसको सभी जानते है तभी बसपा अपने दलित वोट बैंक को सुरक्षित मान कर चल रही है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने वोटो को तस ने
मस न होने के लिए अलग रणनीति बनाई है। मायावती भाजपा ने कार्यकाल के दौरान हुए दलितों पर हमले और उत्पीडन के मामलो को सबके सामने उजागर कर रही है। मायावती यह बताने में जुटी हैं कि भाजपा सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया वहीं भाजपाइयों द्वारा दलितों के बीच गांव-गांव जाकर इन सारे कामों को बताया जाएगा?

वही मायावती ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए यह कहा की कैसे प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, उज्जवला और सुविधा योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं में दलित और पिछड़े वर्ग के लाभार्थियों को फायदा मिला है। उत्त्तर प्रदेश समेत भाजपा शाषित राज्यों में दलितों पर अत्याचार और उत्पीड़न के मामले बढे है।

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