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बसपा सुप्रीमो मायावती ने मिशन मोड में शुरू किया काम

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(image credits: The Pioneer)

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद और लगाकर भाजपा के द्वारा दलितों को अपनी ओर करने के लिए अपनाये जाने वाली योजनाओं वाली मुहिम की काट में अब बसपा ने बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है।

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भाजपा के द्वारा लगातार नए नए वादों ने उनको लुभाने का प्रयास किया जा रहा है जिसको देखते हुए अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने मिशन मोड में काम शुरू किया है। बसपा अब भाईचारा कमेटियों के जरिए एक बार फिर दलितों में पैठ बढ़ाने के साथ सर्वसमाज में विस्तार की रणनीति बनाई है। इसके लिए मंडल स्तर पर बैठकें पूरी होते ही 16 जून से जिला स्तर पर वरिष्ठ नेताओं की बैठकें शुरू हो जाएंगी।

लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद प्रदेश की भाजपा सरकार ने पहला ही फैसला दलितों को प्रभावित करने के लिहाज से उठाया तो बसपा ने इसे समझने में देर नहीं की है। बसपा के एक जिम्मेदार नेता कहते हैं कि भाजपा को पता है कि 2022 का विधानसभा चुनाव बसपा से ही होना है। 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा अभी से रणनीति बना रही है और धीरे धीरे दलित हितेषी बनने के लिए नए नए वादे करती जा रही है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा में भाजपा की सीधी टक्कर बसपा से रहेगी जिसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है।

भाजपा सरकार ने चुनाव नतीजे आते ही दलितों को ध्यान में रखकर चालें चलनी शुरू कर दी हैं। 50 प्रतिशत से अधिक एससी आबादी वाले गांवों को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत लाकर उनके सर्वांगीण विकास का फैसला सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। यह योजना 2009-10 में यूपीए सरकार ने शुरू की थी। अब भाजपा सरकार दलित बहुल 724 गांवों में यह योजना लागू करने की बात कर दलितों को लुभाने की तैयारी कर रही है। वे कहते हैं बसपा, भाजपा की यह चाल समझ गई है। बसपा की भाईचारा कमेटियां बनाने की मुहिम न सिर्फ दलितों में पार्टी की पैठ फिर से बढ़ाएगी, बल्कि सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाने में कारगर साबित होगी।

सबसे पहले हम आपको बसपा की भाईचारा कमेटी के बारे में बता देते है। बसपा ने 2007 के विधानसभा चुनाव से पहले सर्वसमाज को जोड़ने के लिए भाईचारा बनाओ मुहिम शुरू की थी। इसी रणनीति से बसपा अपने बलबूते सत्ता में आई थी। अब 2022 के लोकसभा चुनाव से पहले बसपा ने भाईचारा कमेटियों के जरिए सर्वसमाज को जोड़ने के लिए सोशल इंजीनियरिंग पर काम शुरू किया है। बसपा ने हर 10 बूथ पर एक सेक्टर संगठन बनाया है। भाईचारा कमेटियां सेक्टर व विधानसभा क्षेत्र स्तर पर बननी हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में 10 हजार से अधिक मतदाता वाली हर जाति की भाईचारा कमेटी बनेगी। अहम बात ये होगी कि दलित समाज का प्रतिनिधि हर समाज की दो सदस्यीय भाईचारा कमेटी में होगा।


दूसरा सदस्य संबंधित समाज का होगा। इस प्रयोग के जरिए बसपा सेक्टर व विधानसभा क्षेत्र स्तर पर बड़ी संख्या में दलितों को जोड़ सकेगी। अपरकास्ट व पिछड़े समाज की एक बड़ी टीम खड़ी हो जाएगी। भाईचारा कमेटियों के गठन की जिम्मेदारी चार-पांच मंडलों पर बनाए गए सेक्टर इंचार्ज, मंडल जोन इंचार्ज व दो-दो जिलों पर दो से तीन सेक्टर इंचार्जों की बनाई गई टीम के निर्देशन में होगी। मायावती समय-समय पर इस काम की समीक्षा करेंगी।

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