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बजट को लेकर केंद्र सरकार के अंदर हुई अनबन

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(image credits: BW Businessworld)

केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल में बजट सत्र पेश होने के बाद से ही केंद्र सरकार पर कई सवाल उठाये जाने लगे है। यहां तक की बजट को लेकर खुद केंद्र सरकार के ही कुछ लोग नाखुश नजर आ रहे है। बजट में कई ऐसे क्षेत्रों को पीछे छोड़ दिया गया जिन्हे विकास की जरूरत है। यहाँ तक की शिक्षा को लेकर भी बजट में कुछ खास नहीं है। जितना शिक्षा के लिए बजट होना चाहिए उतना बजट नहीं है। शिक्षा पर पेश किये बजट पर भी विपक्ष पार्टी ने जम कर हमला बोला था। वही अब पार्टी के अंदर ही अनबन शुरू हो गयी है। 

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माना जा रहा है की इस बार भी बजट मिडल क्लास परिवार के लिहाज से काफी अलग है। इस बजट ने एक बार फिर मिडल क्लास और लौ क्लास परिवार की मुसीबते बढ़ा दी है। 

बजट में अमीरों पर ज्यादा सरचार्ज लगाने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार का एक धड़ा खुश नजर नहीं आ रहा। उनका मानना है कि सरकार के इस कदम से नए निवेशको की मुश्किलें बढ़ेंगी और ज्यादा संपत्ति वाले लोगों के भारत छोड़ने का ट्रेंड और बढ़ जाएगा। बता दें कि हालिया बजट का फोकस इस बात पर है कि देश में सुस्त पड़ते निवेश को निजी भागेदारी के जरिए रफ्तार दी जाए। हालांकि, अमीरों पर सरचार्ज के इस प्रस्ताव को इससे ठीक उलट कदम माना जा रहा है।

एनडीए सरकार के एक शीर्ष नीति निर्माता ने नाम न बताने की शर्त पर द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सरचार्ज का निवेश पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। इससे ‘यूनिकॉर्न’ यानी वे टेक स्टार्टअप कंपनियां जिनकी मार्केट वैल्यू 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा है, हतोत्साहित होंगे। इसके अलावा, उच्च आय वर्ग वालों की संख्या देश में बढ़ने पर भी बुरा असर पड़ेगा।

अधिकारी ने यह भी कहा, ‘अगर हम 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वाले लोगों पर ज्यादा सरचार्ज लगाएंगे तो मुमकिन है कि फिर वे भारत में निवेश न करना चाहें और देश छोड़कर कहीं और बसने पर विचार करें। उम्मीद है कि इन प्रस्तावों में कुछ बदलाव किए जाएंगे जब वित्त मंत्री संसद में फाइनेंस बिल पर जवाब देंगी।’


बता दें कि सरकार को उम्मीद है कि ज्यादा आमिर श्रेणी के टैक्स देने वाले लोगो पर सरचार्ज लगाकर 12 हजार करोड़ का अतिरिक्त रेवन्यू हासिल होगा। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इसका उलटा असर निवेश पर पड़ेगा। नए टैक्स की वजह से इनवेस्टमेंट ट्रस्टों के जरिए होने वाले निवेश पर बुरा असर पड़ेगा। इन इनवेस्टमेंट ट्रस्टों के जरिए विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में पैसे लगाते हैं।

अधिकारी का कहना है कि सरकार को नॉर्वे जैसे विकसित देशों की टैक्स दरों से तुलना करते हुए यह तर्क नहीं देना चाहिए कि हमारे यहां अपेक्षाकृत कम दर है। अधिकारी के मुताबिक, सरकार को तुलना चीन, इंडोनेशिया और साउथ कोरिया जैसे देशों से करना चाहिए, जो निवेशकों को प्रतिस्पर्धात्मक टैक्स दर उपलब्ध कराते हैं। जहां तक नॉर्वे का सवाल है, वहां प्रति व्यक्ति आय बेहद ज्यादा है, सामाजिक सुरक्षा का दायरा काफी बड़ा है और निवेशकों को वे कई दूसरे फायदे मिलते हैं, जो भारत में नहीं हैं।

यूँ तो और भी ऐसे कई मुद्दे है जिनसे सरकार के  खेमे में हलचल मची रहती है परन्तु बजट को लेकर सभी लोग असहमति जाता रहे है। जहाँ माना जा रहा था की बजट से विकास दर में बढ़ोतरी होगीं वही कई जानकारों का मानना है की इस बजट से विकास दर और व्यापारिक व्यवस्था बिगड़ेगी। 

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