fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
राजनीति

कांग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी ने कहा मोदी सरकार संशोधन कर RTI कानून को करना चाहती है ख़त्म

Congress-chief-Sonia-Gandhi-said,-Modi-government-wants-to-end-RTI-law-by-making-amendment
(image credits: Moneycontrol)

सूचना अधिकार कानून 2005 मे बदलाव करने के लिए लाया गया विधयेक लोकसभा में पास कर दिया गया। इस बिल के जरिये RTI (राइट तो इन्फॉर्मेंशन) एक्ट में किये जाने वाले बदलाव का कई विपक्षी पार्टी ने विरोध किया है। कुछ पार्टी के नेताओं ने इस बिल के कारण सूचना के अधिकार में पारदर्शिता कम होने की भी बात कही है।

Advertisement

वही इसी बीच कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सरकार इस संशोधन के माध्यम से आरटीआई कानून को खत्म करना चाहती है जिससे देश का हर नागरिक कमजोर होगा। उन्होंने अपने एक बयान में कहा, ”यह बहुत चिंता का विषय है कि केंद्र सरकार ऐतिहासिक सूचना का अधिकार कानून-2005 को पूरी तरह से खत्म करने पर उतारु है.”

सोनिया गाँधी ने आगे कहा, ‘इस कानून को व्यापक विचार-विमर्श के बाद बनाया है और संसद ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया। अब यह खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है.’ ‘पिछले कई वर्ष में हमारे देश के 60 लाख से अधिक नागरिकों ने आरटीआई के उपयोग किया और प्रशासन में सभी स्तरों पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाने में मदद की. इसका नतीजा यह हुआ कि हमारे लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत हुई।

उन्होंने आगे बताया, ‘आरटीआई का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किये जाने से हमारे समाज के कमजोर तबकों को बहुत फायदा हुआ है.’ इसके साथ साथ उन्होंने यह भी दावा किया की, ‘यह स्पष्ट है कि मौजूदा सरकार आटीआई को बकवास मानती है और उस केन्द्रीय सूचना आयोग के दर्जे एवं स्वतंत्रता को खत्म करना चाहती है जिसे केंद्रीय निर्वाचन आयोग एवं केंद्रीय सतर्कता आयोग के बराबर रखा गया था.’

यूपीए प्रमुख ने कहा, ‘केंद्र सरकार अपने मकसद को हासिल करने के लिए भले ही विधायी बहुमत का इस्तेमाल कर ले, लेकिन यह प्रक्रिया में देश के हर नागरिक को कमजोर करेगी.’


बता दें की सोमवार को लोकसभा ने विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बीच सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी। वहीँ केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने पारदर्शिता कानून के बारे में विपक्ष की चिंताओं को निर्मूल करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार पारदर्शिता, जन भागीदारी, सरलीकरण, न्यूनतम सरकार…अधिकतम सुशासन को लेकर प्रतिबद्ध है।

मौजूदा सरकार द्वारा सूचना के अधिकार में संसोधन करने से पता चलता है की वह इसकी मदद से कानून की पारदर्शिता में कमी करना चाहती है, साथ ही इसके सहारे सरकार देश के नागरिको के प्रति अपनी जवाबदेही कम करना चाहती है। बीजेपी सरकार के इस प्रकार के रवैये से लोगो के बीच उनका विश्वास समाप्त हो सकता है। विपक्षी पार्टियों के कड़े विरोध के बाद भी इस बिल को पास कर देना उचित नहीं लगता है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved