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मोदी और शाह को क्लीन चिट देने से नाराज चुनाव आयुक्त, आयोग की बैठक में जाना छोड़ा

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(Image Credits: Inkhabar)

इस लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आचार सहिंता तोड़ने के कई आरोप लगे थे वही उसके बाद आयोग ने उन पर सुनवाई करते हुए सभी मामलों में क्लीन चिट दे दी थी। हालांकि तीन में से दो मामलों में क्लीन चिट देने का फैसला एकमत से नहीं हुआ और एक चुनाव आयुक्त ने पीएम मोदी को क्लीन चिट देने का विरोध किया। परन्तु बहुमत के आधार पर प्रधानमंत्री को क्लीन चिट दे दी गई।

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प्रधानमंत्री मोदी अपने बयानों के कारण तीन दफे अचार सहिंता का उल्लघन कर चुके हैं। कभी उन्होंने अल्पसंख्यक को लेकर बयान दिया, कभी उन्होंने बालाकोट एयर स्ट्राइक पर युवाओ से वोट की अपील करी, तो कभी उन्होंने अपनी चुनावी रैली में कहा था की ‘राहुल गांधी वहां से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां बहुसंख्यक कम हैं और अल्पसंख्यक ज्यादा।’ इन सभी मामलो को अचार सहित का उल्लंघन माना गया।

सभी मामलों में पीएम नरेन्द्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को क्लीन चिट देने पर असहमति जताने वाले चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने अब इससे नाराज़गी जताते हुए आयोग की बैठकों में जाना छोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया।

उन्होंने कहा कि जब तक उनके असहमति वाले मत को ऑन रिकॉर्ड नहीं लिया जाएगा तब तक वह आयोग की किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता की शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील रोड़ा, अशोक लवासा और सुशील चंद्रा शामिल थे।

बताया जा रहा है कि शिकायतों की जांच में अशोक लवासा की दो लोगों से राय अलग थी। इसके साथ ही वह उन्हें आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में मान रहे थे। हालांकि बहुमत से लिए गए फैसले में इसे आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना गया। लिहाजा उन्हें क्लिन चीट दे दी गई। सिर्फ यही नहीं लवासा चाहते थे कि उनका मत रिकॉर्ड पर लिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते विरोध में लवासा ने चार मई से आयोग की बैठक खुद को अलग कर लिया।


बताया जा रहा है कि अपना विरोध दर्ज कराते हुए अशोक लवासा ने चुनाव आयोग को एक पत्र भी लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि वह बैठकों में तभी आएंगे जब आदेश में बहुमत से लिए फैसले के साथ अल्पसंख्यक मत यानी एक सदस्य की राय को भी रिकॉर्ड पर लाया जाएगा।

देखने वाली बात यह है की भले ही चुनाव आयोग ने मोदी और अमित शाह को सभी मामले में दो एक के बहुमत के साथ क्लीन चिट दे दी हो पर क्या वो एक चुनाव आयुक्त का मत जिसने सच में यह माना की मोदी और शाह आचार सहित का उल्लंघन किया उसकी कोई एहमियत नहीं है और ना ही उनके मत को चुनाव आयोग ने किसी रिकॉर्ड में रखा। वरिष्ठ चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के मत को सीधे तौर नाकार दिया गया जिसे चुनाव आयोग द्वारा पक्षपात भी माना जा सकता है, इससे बात से नाराज चुनाव आयुक्त अशोक लवासा चुनाव आयोग की मीटिंग में जाने से साफ़ इंकार कर दिया है।

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