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बीजेपी राज्य में EVM के खाली बक्सों से भरे मिले दर्जनों ट्रक, विरोधी दलों ने किया हंगामा

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(Image Credits: Prabhat Khabar)

EVM पर बवाल रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। evm को लेकर देश भर से कई संदिग्द मामले सामने आ रहे है। कभी EVM की सुरक्षा और स्ट्रांग रूम पर सवाल उठने की खबर सुनने में आ रही है तो कभी कुछ और ही सुनने को मिल रहा है। इसी तरह एक बार फिर EVM को लेकर ही झारखण्ड से एक मामला सामने आता दिख रहा है।

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मामला झारखंड के देवघर का है जहाँ मंगलवार को सुबह करीब 10 बजे EVM के दर्जनों खाली बक्से से भरे ट्रक मिले। बताया जा रहा है कि यह ट्रक बैजनाथपुर चौक के पास मिले हैं। इसकी सूचना मिलते ही इलाके के नेता मौके पर पहुंच गए। वहीं, इसको लेकर विपक्षी पार्टियों ने अपना विरोध जताया है। राजनीतिक दलों विरोध के देखते हुए सिविल एसडीओ विशाल सागर, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी प्रवीण प्रकाश व एसडीपीओ विकासचंद्र श्रीवास्तव घटनास्थल पर पहुंचे।

चुनाव खत्म होने के बाद इतनी भारी मात्रा में EVM के खाली बक्सों का मिलना, लोगों के मन में शक पैदा करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रक में सारवां अंचल कार्यालय के क्लर्क देवेंद्र मुर्मू ड्राइवर के साथ सवार था। उन्होंने बताया कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीसी देवघर के कार्यालय ने उन्हें यह बक्सा दुमका पहुंचाने का आदेश दिया है। उन्होंने एक पत्र भी दिखाया जिसमें यह आदेश दिए हुए थे। यह पत्र 20.05.2019 को लिखा गया था। क्लर्क ने यह भी बताया कि चुनाव के बाद इवीएम को इन खाली बक्सो में रखना है। यही कारण है कि इसे दुमका ले जाया जा रहा है।

यह भी बताया जा रहा है की विपक्षी पार्टियों के विरोध करने पर एक दर्जन EVM के बक्शो के खुलवाकर देखा गया। मात्र एक दर्जन बक्सों को खोल कर दिखाने के बाद सिविल एसडीओ ने ट्रक को दुमका के लिए रवाना करने के लिए आदेश दे दिए।

इस मामले में झारखंड विधानसभा के पूर्व स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता ने प्रशासन पर आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रही है। बता दें की झारखण्ड में बीजेपी की सरकार है। उन्होंने कहा कि इस तरह से चुनाव के बाद खाली बक्सों को ट्रक में ले जाना संदेहास्पद हैं।


साथ ही शशांक शेखर भोक्ता ने कहा की, पुलिस को ट्रक थाने ले जाना चाहिए था। और सही तरीके से जांच के बाद ही ट्रक को छोड़ना चाहिए था। उन्होंने पुलिस पर NDA के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है।

EVM को लेकर देश भर से संदिग्द मामलो का सामने आना विपक्षी पार्टियों के बीच संदेह पैदा करता है। और करे भी क्यों न, क्यूंकि जिस प्रकार EVM की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे है, तो संदेह होना स्वभाविक है। देश भर में वोटिंग मशीन को लेकर कुछ न कुछ मामले सामने आए हैं। लेकिन जब प्रशासन से इन घटनाओ के बार में पुछा जाता है तो वो कोई और ही कहानी कहते है।

EVM समबन्धित जितने भी मामले सामने आ रहे हैं उन सभी मामलो को देखना प्रशासन की जिम्मदारी बनती है। लेकिन प्रसाशन कभी कभी इन पर लापरवाही दिखा देता है। अब देखने वाली बात यह है की यह लापरवाही प्रसाशन द्वारा गलती से होती है या इन सब चीजों को जानबूझकर अंजाम दिया जाता है। इसके साथ ही चुनाव आयोग की भी यह जिम्मदारी बनती है की EVM से संबंधित जितने भी मामले सामने आ रहे हैं उनपर गहन विचार करे।

इतना ही नहीं विपक्षी पार्टियों के साथ साथ एक दिन पहले ही पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी EVM को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने पहले तो चुनाव आयोग की तारीफ़ की लेकिन इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग को वोटिंग मशीन पर उठ रहे सवालों पर लोगो को जवाब देने के लिए कहा।

इन सभी घटनाओ से विपक्षी दलों का वोटिंग मशीन को लेकर शक और भी गहराता जा रहा है। खैर अब चुनाव का समापन हो चूका है और जो भी परिणाम है वह कल यानी 23 मई को देश की जनता के सामने होंगे।

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