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चुनाव आयोग ने मोदी को दिया क्लीन चीट

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(Image Credits: Zee News)

चुनाव से पहले भाजपा के विधायकों ने आचार सहिंता का उल्लंघन किया था यहाँ तक की देश के प्रधान मंत्री ने भी आचार सहिंता का उल्लंघन किया था जिसके चलते चुनाव आयोग उन पर एक्शन लेने वाला था। परन्तु चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद से ऐसा नहीं लगता की मोदी पर कोई कार्यवाही होगी। ऐसा लगता है जैसे चुनाव आयोग भी मोदी के खिलाफ खड़ा होने से डरता है या फिर मोदी के इशारो पर नाच रहा है।

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चुनाव आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है। चुनाव आयोग का यह फैसला महाराष्ट्र के वर्धा में दिए गए पीएम मोदी के बयान पर आया है। उनके बयान पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। दरअसल, यहां उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के केरल राज्य के वायनाड सीट से चुनाव लड़ने को लेकर निशाना साधा था।

नरेंद्र मोदी ने वर्धा में भाषण दिया था जिको आचार सहिंता का उलंघन माना गया परन्तु उसके लिए मंगलवार को क्लीन चिट दे दी जिसमें उन्होंने वायनाड सीट से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आलोचना की थी और ‘‘संकेत’’ दिया था कि केरल के इस संसदीय क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं की संख्या अधिक है।

चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता का कहना है की, ‘‘मामले की आदर्श आचार संहिता के मौजूदा दिशानिर्देशों/प्रावधानों, जनप्रतिनिधि कानून के तहत और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुरूप विस्तृत जांच पड़ताल की गई। आयोग का यह विचार है कि इस मामले में ऐसा कोई उल्लंघन नहीं दिखा है।’’ कांग्रेस ने इस महीने के शुरू में चुनाव आयोग से सम्पर्क किया था और प्रधानमंत्री मोदी के ‘‘विभाजनकारी’’ भाषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

प्रधानमंत्री ने गत एक अप्रैल को वर्धा में एक रैली को संबोधित करते हुए कथित रूप से कहा था कि विपक्षी दल लोकसभा की उन सीटों से अपने नेताओं को खड़ा करने से ‘‘डरता’’ है जहां बहुसंख्यकों का प्रभुत्व है। उन्होंने यह बात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के केरल के वायनाड से दूसरी सीट के तौर पर चुनाव लड़ने के निर्णय की ओर इशारा करते हुए की थी। राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के अमेठी से भी चुनाव लड़ रहे हैं।


मोदी ने कथित रूप से यह कहा था की, ‘‘कांग्रेस ने हिंदुओं का अपमान किया और देश के लोगों ने पार्टी को चुनाव में दंडित करने का फैसला किया है। उस पार्टी के नेता अब उन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने से डर रहे हैं जहां बहुसंख्यक जनसंख्या का प्रभुत्व है। इसी कारण से वे ऐसे स्थानों पर शरण लेने के लिए बाध्य हैं जहां बहुसंख्यक अल्पसंख्यक हैं।’’

देखा जा सकता है कि उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा आदर्श आचार संहिता का कथित रूप से उल्लंघन करने के मामले में कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की याचिका पर मंगलवार को निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि इन दोनों नेताओं ने कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण देकर और ‘‘राजनीतिक प्रचार’’ में सैन्य बलों का जिक्र करके आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

आचार सहिंता लागू होने के बाद भी मोदी सरकार ने चुनाव प्रचार करने और अपशब्द भाषण देने में कमी नहीं छोड़ी। इसके बावजूद भी मोदी और उनके नेताओ पर कोई कड़ी कार्यवाही नहीं हुई। कई बार देखा गया की चुनाव आयोग ने कार्यवाही के नाम पर सिर्फ चेतावनी दी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने के साथ ही असम से कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव की याचिका गुरुवार को सुनवाई के लिये लिस्ट में दिया है । देव ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ शिकायतों और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगते हुए कहा है की आयोग की कथित निष्क्रियता ‘पक्षपात’ का लक्षण और मनमाना है , जिसकी अनुमति नहीं है क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता के लिये नुकसानदेह है।

यहाँ साफ़ जाहिर होता है की चुनाव आयोग भी मोदी की ओर झुका हुआ है जिसके चलते मोदी सरकार पर कोई कार्यवाही हो रही। इस तरह का पक्षपात हमे देश और लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है। मोदी जहा देश के क़ानून वयवस्था की बात करते थे वहीँ अब मोदी सभी कानून को अपने मुट्ठी में लिए घूम रहे है

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