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भाजपा के लिए चुनाव आयोग ने रचा बड़ा खेल, तेज़ बहादुर का नामांकन निरस्त लेकिन स्मृति इरानी का नहीं

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(Image Credits: Deccan Herald)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर नामांकन करने वाले तेज बहादुर यादव पर चुनाव आयोग ने दोहरा रवैया अपनाते हुए उनका नामांकन रद्द कर दिया है। यानि अब तेज़ बहादुर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक तेज़ बहादुर यादव के कागज़ो में गलत हलफ़नामा दिया था जिसके लिए उन्हें एक प्रमाण पत्र जमा करने को कहा गया था लेकिन वह नहीं कर पाए।

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तेज बहादुर यादव ने खुद ही नामांकन स्थल के बाहर आकर इसकी जानकारी दी. वाराणसी जिला निर्वाचन कार्यालय ने तेज बहादुर यादव को मंगलवार चुनाव आयोग से अपनी बर्खास्तगी के मामले में प्रमाणपत्र लाने के लिए एक नोटिस जारी किया था। नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर यादव ने इसे तानाशाही बताते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। तेज बहादुर यादव ने कहा कि चुनाव आयोग से मैंने कहा था कि मैं अंबानी नहीं हूं कि इतने कम समय में सूचना ले आउंगा। तेज़ बहादुर ने प्रमाण पत्र जमा करने के लिए थोड़ा समय माँगा था पर चुनाव आयोग ने उनकी एक न सुनी और सीधा नामांकन ही रद्द कर दिया।

तेज बहादुर यादव ने कहा कि कल शाम 6.15 बजे चुनाव आयोग ने साक्ष्य देने को कहा था। हमने साक्ष्य तैयार कर लिए फिर भी मेरा नामांकन खारिज कर दिया गया। पर्चा गैरकानूनी तरीके से निरस्त किया गया है. यह जानबूझकर साजिश रची गई है। वही अगर देखा जाये तो केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी के खिलाफ शनिवार को उनके चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया। यह मामला शहर के कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष तौहीद सिद्दीकी ने दायर किया था।

सिद्दीकी ने अपनी शिकायत में कहा की “स्मृति ईरानी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन शपथ पत्र चुनाव आयोग को सौंप दिया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ कॉमर्स में अपनी डिग्री पूरी की थी, लेकिन अब 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने हलफनामे में, यह है उल्लेख किया कि उसने अपनी डिग्री पूरी नहीं की है” केंद्रीय मंत्री पर चुनाव आयोग से झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए, सिद्दीकी ने कहा: “उसने चुनाव आयोग से झूठ बोला है और अपने झूठ का हलफनामा भी प्रस्तुत किया है जो कि पूर्णतः जालसाजी प्रतीत होता है और विश्वासघात का कार्य है।”

भाजपा नेता स्मृति ईरानी के इतने बड़े झूठ बोलने के बावजूद भी चुनाव आयोग द्वारा उनपर कोई एक्शन नहीं लिया गया पर वही तेज़ बहादुर का सीधे तौर पर बिना समय दिए उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। चुनाव आयोग भाजपा सरकार की कठपुतली बानी हुई है या फिर आप यह भी कह सकते है की चुनाव आयोग भी अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को जिताने के लिए हर प्रयास कर रही है।


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