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चुनाव आयुक्त ने माना मोदी ने किया आचार संहिता का उल्लंघन, फिर भी आयोग ने दिया क्लीन चीट

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(Image Credits: Zee News)

हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आचार सहिंता तोड़ने के आरोप लगते ही जा रहे हैं। और जैसे जैसे उनपर आरोप लग रहे हैं, चुनाव आयोग द्वारा उन्हें क्लीन चिट भी दिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने उन पर सुनवाई करते हुए तीन मामलों में क्लीन चिट दे दिया। हालांकि तीन में से दो मामलों में क्लीन चिट देने का फैसला एकमत से नहीं हुआ और एक चुनाव आयुक्त ने पीएम मोदी को क्लीन चिट देने का विरोध किया। परन्तु बहुमत के आधार पर प्रधानमंत्री को क्लीन चिट दे दी गई।

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प्रधानमंत्री मोदी अपने बयानों के कारण तीन दफे अचार सहिंता का उल्लघन कर चुके हैं। कभी उन्होंने अल्पसंख्यक को लेकर बयान दिया, तो कभी उन्होंने बालाकोट एयर स्ट्राइक पर युवाओ से वोट की अपील करी।

अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने 1 अप्रैल को वर्धा में चुनावी रैली को सबोधित करते अल्पसंख्यक को लेकर बयान दिया था। जिसे चुनावी आचार सहिंता का उल्लंघन माना गया। दरअसल मोदी ने चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी के केरल के वायनाड से चुनाव लड़ने पर निशाना साधा था और कहा था कि ‘राहुल गांधी वहां से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां बहुसंख्यक कम हैं और अल्पसंख्यक ज्यादा।’

इसके बाद 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी पर दूसरी बार आचार सहिंता का उल्लघन करने का मामला सामने आया। जब लातूर में जनसभा को सम्बोधित करते वक्त उन्होंने पहली बार वोट कर रहे युवाओ से बालाकोट एयर स्ट्राइक के नाम पर वोट देने की अपील की थी। पीएम की इस अपील के खिलाफ कांग्रेस चुनाव आयोग पहुंच गई। लेकिन अब इन दोनों मामलो में चुनाव आयोग ने मोदी को क्लीन चिट दे दिया है। परन्तु क्लीन चिट देने का फैसला एकमत से नहीं हुआ है।

चुनाव आयोग में मुख्य आयुक्त, आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुशील चंद्रा शामिल हैं। दे इंडियन एक्सप्रेस के खबर के मुताबिक इन दोनों मामलो में 2-1 मतो से फैसला हुआ है। इसका मतलब किसी एक चुनाव आयुक्त ने यह माना था की प्रधानमंत्री ने आचार सहिंता का उल्लघन किया है। लेकिन बाकि दो चुनाव आयुक्त का बहुतमत होने के कारण मोदी को क्लीन चिट दे दिया गया।


आपको यह बता दे की बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी के परमाणु बम वाले बयान पर चुनाव आयुक्त द्वारा एकमत से उन्हें क्लीन चिट दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने 21 अप्रैल को बाड़मेर में अपने भाषण में न्यूक्लियर हथियारों को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि ‘हमने इन्हें दिवाली के लिए नहीं रखा है।” इस पर आयोग ने क्लीन चिट देते हुए कहा, किसी भी नियम का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

खबर के अनुसार चुनाव आयोग एक्ट, 1991 की धारा 10 के मुताबिक ‘जहां तक संभव हो चुनाव आयोग में फैसले एकमत से होने चाहिए। यदि किसी मामले में चुनाव आयोग के सदस्यों के मत भिन्न हैं, तो ही बहुमत के आधार पर फैसला होना चाहिए।’

भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस लोकसभा चुनाव के दौरान आचार सहिंता मामले में क्लीन चिट दे दी गई हो। परन्तु तीन चुनाव आयुक्तो में से एक आयुक्त का प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आचार सहिंता का उल्ल्घन मानना बहुत बड़ी बात है। इससे पता चलता है की कहीं न कहीं बीजेपी नेताओं द्वारा सही में आचार सहिता का उल्ल्घन किया जा रहा है। इसके साथ साथ देश के प्रधानमंत्री द्वारा भी आचार सहिंता का उल्लघन किया जा रहा है।

चुनाव आयोग द्वारा बीजेपी नेताओ पर प्रतिबंद लगाने के बावजूद बीजेपी नेता इसकी भी अवहेलना करते हुए देखे जा सकते है। अभी हाल ही में चुनाव आयोग ने साध्वी प्रज्ञा पर 72 घंटे का प्रतिबंध लगाया था। प्रतिबंद लगने के बाद भी साध्वी प्रज्ञा ने गुरवार को मंदिरो में दस्तक दी और मौन रही, इस दौरान बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता उसके साथ रहे।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रज्ञा ठाकुर ने बीजेपी नेताओं के साथ पीरगेट चौराहा, सोमवारा, गुफा मंदिर और लालघाटी इलाके में जुलूस निकाला। कांग्रेस ने प्रचार के इस तरीके को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए निर्वाचन आयोग से शिकायत की है। चुनाव प्रचार पर रोक के बावजूद प्रज्ञा ठाकुर की सक्रियता बनी रहने पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया है।

प्रधानमंत्री मोदी को अबतक तीन मामलो में चुनाव आयोग द्वारा क्लीन चिट देने से पता चलता है की आयोग सिर्फ नाम के लिए रह गया है। हैरान करने वाली बात तो यह है इन तीन मामलो में से दो तो ऐसे थे जिसपर एक चुनाव आयुक्त ने अपना विरोध जताया था। इससे कहीं न कहीं ऐसा लगता है की आयोग द्वारा बड़े नेताओं के खिलाफ फैसले लेने में बेहद ही नरमी दिखाई जा रही है। इसी प्रकार हाल ही में मोदी के साथ साथ राहुल गांधी को भी चुनाव आयोग द्वारा क्लीन चिट दे दिया गया था।

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