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भाजपा सांसद हेमा मालिनी के खिलाफ एफआईआर, किया आचार संहिता का उल्‍लंघन

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(Image Credits: thenews)

मौजूदा सरकार में मानो आचार सहिंता तोड़ने का प्रचलन सा चल रहा है। कभी प्रधानमंत्री मोदी आचार सहिंता का उल्लंगन करने से संबंधित कुछ ऐसा करते है, तो कभी उनके पार्टी के नेता द्वारा आचार सहिंता का उल्लंगन किया जाता है। देखा जाये तो मौजूदा सरकार के लोगो को कानूनों और नियमो को कोई परवाह नहीं है। इसी कारण अक्सर इन लोगो द्वारा आये दिन आचार सहिंता का उल्लंघन किया जाता है। कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री योगी द्वारा भारतीय सेना को मोदी जी सेना बताकर आचार सहिंता का उल्लंघन करने की कोशिश की गई।

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इसी प्रकार एक बार फिर भाजपा सांसद हेमामालिनी द्वारा भी आचार सहिंता का उल्लघन करने का मामला सामने आया है। मथुरा लोकसभा सीट से भाजपा से चुनाव लड़ रहीं हेमामालिनी के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के मामले में एफआईआर दर्ज किया गया है। दरअसल हेमामालिनी पर आरोप है की उन्होंने जिला प्रशासन से बिना इजाजत लिए मथुरा के अजेही गांव में एक जनसभा को संबोधित किया। जो कि आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। इस संबंध में मथुरा के वृन्दावन थाने में हेमामालिनी के खिलाफ यह एफआईआर दर्ज की गई है।

इस मामले में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ने बताया, ‘भाजपा प्रत्याशी की ओर से चुनाव सभा आयोजक पंकज शर्मा ने आझई गांव में सभा की अनुमति ली थी पर, उस दिन वहां सभा न करके विद्यालय में शिक्षण कार्य के दौरान ही मंच एवं अन्य व्यवस्थाएं करके सभा आयोजित की गई। जो पूरी तरह से आदर्श चुनाव आचार संहिता के विरुद्ध था।’

अब यहाँ देखने वाली बात यह है की वैसे तो हमारे प्रधानमंत्री मोदी शिक्षा को बढ़ावा देने की बाते करते हैं। परतु उनके ही लोगो द्वारा किसी विधालय में शिक्षण कार्य को बाधित करके पार्टी के कामो का प्रचार किया जाता है। इससे यह पता चलता है की भाजपा के नेता चुनाव प्रचार में इस प्रकार जूट गए है। जिससे की ऐसा लगता है की उन्हें किसी की भी परवाह नहीं रही है। भाजपा नेताओं द्वारा इस प्रकार नियमों का उल्लघन करना, सत्ता में उनकी सरकार से जुड़े उनके अहंकार को दिखाता है।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया की, इस मामले में हमे जानकारी मिलने के बाद हमने नोटिस भेज कर भाजपा से जवाब माँगा था। लेकिन भाजपा ने जो जवाब दिया है वह संतोष जनक नहीं है। इसलिए संबंधित अधिकारी ने मामले को आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज किया और निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेज दी है।


आचार सहिंता उल्लंघन के संबध में वृन्दावन से कोतवाली प्रभारी संजीव कुमार दुबे ने बताया, ‘आचार संहिता उल्लंघन के मामले में भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी एवं सभा आयोजक भाजपा नेता पंकज शर्मा को नोटिस जारी किए गए थे। जिनके जवाब से संतुष्ट न होने पर जिला स्तरीय चुनाव आचार संहिता परिपालन समिति के निर्देश पर हेमामालिनी एवं पंकज शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

इस मामले में हेमामालिनी के आलावा एफआईआर में 2 अन्य लोगों का भी नाम शामिल किया गया है। आपको बता दे कि हेमामालिनी मथुरा से मौजूदा सांसद हैं। और ऐलान कर चुकी हैं कि यह उनका आखिरी चुनाव होगा। बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने साल 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर के चलते मथुरा से रालोद नेता जयंत चौधरी को हराया था।

इसी कारण भाजपा ने आने वाले चुनावों को देखते हुए एक बार फिर से हेमामालिनी को मैदान में उतारने का सोचा। हेमामालिनी ने बीते हफ्ते मथुरा में चुनाव प्रचार शुरु कर दिया है। हालांकि इस बार हेमामालिनी की संसद की राह थोड़ी मुश्किल नजर आ रही है। इस बार मथुरा में विपक्षी पार्टियों द्वारा स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठाया जा रहा है। बता दें की सपा-बसपा और रालोद के गठबंधन के तहत मथुरा लोकसभा सीट रालोद के खाते में जा चुकी है। रालोद ने मथुरा सीट पर कुंवर नरेंद्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने महेश पाठक को टिकट दिया है।

दरअसल मथुरा सीट पर कड़ा मुकाबला होने की जानकारी उसी दिन हो गई थी, जिस दिन हेमामालिनी ने यहां से पर्चा दाखिल किया था। हेमामालिनी ने पर्चा दाखिल करने के बाद उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ मथुरा में एक जनसभा को संबोधित किया। लेकिन हैरानी की बात ये थी की योगी आदित्यनाथ, जो कि भाजपा के स्टार कैंपेनर और कद्दावर नेता माने जाते हैं, उनकी जनसभा में भी बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली रह गईं।

हेमामालिनी इस बार पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरी हैं और मथुरा के किसानों और मजदूरों के बीच पहुंचकर चुनाव प्रचार कर रही हैं। इसके साथ साथ हाल ही में उनकी कुछ तस्वीरें सामने आयी थीं, जिनमें वह खेतों में तो कभी ट्रैक्टर पर सवार नजर आयीं। खैर चुनाव से पहले भाजपा नेताओ द्वारा इस प्रकार का दिखावा करना आम बात है।

जैसे जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं मौजूदा सरकार के नेताओ द्वारा आचार सहिंता का उल्लंघन के मामले सामने आने लगे है। ध्यान देने वाली बात यह की बीजेपी के नेताओं द्वारा बार बार ऐसा करने पर भी चुनाव आयोग कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा आचार सहिंता उल्लंघन के मामले में सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ देना उचित नहीं है। बल्कि बार बार आचार सहिता का उल्लंघन करने के मामले चुनाव आयोग सख्त कदम उठाना चाहिए।

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