fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
राजनीति

यूपी में लोकसेवा में हो रही धांधली की खुली पोल, छात्रों ने योगी सरकार पर निकाला गुस्सा

fraud-in-UP-public-service,-students-gets-angry-on-Yogi-Sarkar
(image credits: jagran)

भाजपा सरकार की नीतियों के चलते कई लोगो को पहले भी सामना करना पड़ रहा था और आज भी उन्हें मुसीबतो का सामना करना पड़ है। यूपी में लोकसेवा में चल रही धांधली किसी से नहीं छुपी है। जान-पहचान से शामिल हो रहे लोग बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे है। परन्तु योगी आदित्यनाथ की सरकार इस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही। काफी समय से चल लोकसेवा धांधली की लड़ाई में कई छात्रों ने अपना खून पसीना बहाया है।

Advertisement

अधिकतर मारामारी सरकारी नौकरियों की है परन्तु सरकारी नौकरियों में धांधली बहुत जोरो से चल रही है जिसके चलते दूसरे लोग का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की भर्तियों में धांधली, भाई-भतीजा वाद, आर्थिक भ्रष्टाचार जैसे तमाम आरोपों को लेकर तीन-चार साल पहले छात्रों ने सड़कों पर जमकर पसीना और ख़ून दोनों बहाया था, परन्तु आज भी सरकार के आँखों को वह नहीं दिखाई देता।

उनके इस आंदोलन में आज की सरकार में शामिल दलों के कई नेता भी शामिल थे। छात्रों का ये आक्रोश राज्य में सरकार बदलने में तो क़ामयाब रहा लेकिन छात्र जिस अव्यवस्था को लेकर सड़क पर उतरे थे, उसी को लेकर एक बार फिर उन्हें उसी रास्ते पर जाना पड़ रहा है।

प्रयागराज स्थित यूपी लोकसेवा आयोग एक बार फिर लड़ाई का मैदान बना हुआ है। भीषण गर्मी के बिच छात्र, आयोग में कथित भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं तो पुलिस उन्हें वहां से खदेड़ रही है। आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की गिरफ़्तारी के बाद आयोग ने एक नोटिस जारी करके अगले छह महीने में होने वाली सभी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इनमें PCA 2018 की मुख्य परीक्षा भी शामिल है जो 17 जून से होने वाली थी।

आयोग ने परीक्षाएं क्यों रद्द कीं, इसके बारे में आयोग का कोई भी अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। लेकिन STF की कथित मनमर्जी का आरोप लगाते हुए आयोग के धरना देने वाली कर्मचारी कहते हैं, “एसटीएफ़ ने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है कि आयोग अगले छह महीने तक कोई भी परीक्षा कराने की स्थिति में ही नहीं है। जिसे मन कर रहा है कि गिरफ़्तार कर लिया जा रहा है।


दरअसल, यूपी पुलिस की एसटीएफ़ से कोलकाता पुलिस ने संपर्क किया था और उन्होंने शिक्षक परीक्षा में पेपर के लीक होने संबंधी जानकारी दी थी. कोलकाता पुलिस ने जिस प्रिंटिंग प्रेस के प्रतिनिधि को पकड़ा था उसने यूपी PSC की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार का नाम लिया और उसी के आधार पर एसटीएफ़ ने अंजू कटियार को गिरफ़्तार किया. हालांकि अपनी गिरफ़्तारी के बाद अंजू कटियार ने कहा था कि उनके ख़िलाफ़ ये साज़िश है और वो किसी भी अनियमितता में शामिल नहीं हैं.

लोकसेवा आयोग में साल 2012 से लेकर 2017 के बीच होने वाले सभी भर्तियों की CBI जांच जनवरी 2018 से ही शुरू हुई थी। लेकिन इस मामले में अभी एक-दो FIR को छोड़कर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई । हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोग में चल रही कथित धांधली के मामले में रविवार को कहा कि ‘गिरफ़्तारियां पिछली सरकार के कचड़े को साफ़ करने की कोशिशों का नमूना है’ लेकिन जांच का आदेश दिए डेढ़ साल हो गए और बीजेपी सरकार बने ढाई साल हो गए, बावजूद इसके अब तक ये नहीं पता चल पाया है कि जांच किस ओर जा रही है।

दो दिन पहले आयोग के बाहर धरना दे रहे तमाम छात्रों पर पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने लाठियां बरसाईं और उन्हें वहां से भगा दिया गया. बावजूद इसके, प्रतियोगी छात्र आंदोलन के मूड में दिखाई दे रहे हैं। तीन साल पहले आयोग की नियुक्तियों में धांधली के ख़िलाफ़ चले छात्र आंदोलन का हिस्सा रहे प्रतियोगी छात्र अशोक पांडेय बताते हैं कि आयोग में अवैध तरीक़े से भर्तियों का सिलसिला 2013 से ही चल रहा है और अभी तक जारी है।

उनके मुताबिक़, “साल 2013 में जब से त्रिस्तरीय आरक्षण शुरू हुआ, तब से ही आयोग और छात्रों के बीच टकराव शुरू हुआ। यह व्यवस्था इतनी पक्षपातपूर्ण और ग़ैर संवैधानिक थी कि बाद में सरकार ने इस फैसले को ख़ुद वापस ले लिया। उसके बाद भर्तियों में भ्रष्टाचार के मामले सामने लगे। पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव की नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी योग्यता को छात्रों ने कोर्ट में चुनौती दी। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार को उन्हें हटाना पड़ा। बीजेपी सरकार के आते ही 2012 से 2017 तक की नियुक्तियों की सीबीआई जांच की संतुष्टि दे दी लेकिन आयोग में जारी अव्यवस्था इसके बाद भी ख़त्म नहीं हुई।

कई अन्य छात्र भी कहते हैं कि नई सरकार के आने के बाद STF ने कुछ मामले दर्ज करके आयोग के लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई ज़रूर की है लेकिन आयोग में अव्यवस्था खुलेआम जारी है। छात्रों का आरोप है कि साल 2015 में चले छात्र आंदोलन में मौजूदा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बीजेपी के कई नेताओं ने भी अपना समर्थन दिया था, ख़ुद प्रधानमंत्री ने चुनावी सभाओं में इनकी चर्चा की थी लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखी है।

एक अन्य प्रतियोगी छात्र सौरभ राय कहते हैं, “नई सरकार बनने के बाद भी तो PCA 2015 की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर आउट हो गया। इसके अलावा कई अन्य परीक्षाओं के पेपर आउट हुए। PCA 2017 की मुख्य परीक्षा के निबंध का पेपर आउट हुआ। और ताज़ा मामला PCA 2018 की मुख्य परीक्षा का पेपर भी आउट होने वाला था जो परीक्षा नियंत्रक और अन्य गिरफ़्तारियों के बाद उजागर हो गया।”

प्रयागराज में वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश मिश्र बताते हैं कि पिछले क़रीब छह-सात साल से लोकसेवा आयोग की ऐसी शायद ही कोई परीक्षा रही हो जो विवादों में न रही है और विवादों से नाता अभी भी नहीं छूट रहा है। वो कहते हैं, “ताज़ा मामला आयोग में एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती का है. यह मामला क़रीब दस हज़ार पदों पर भर्ती के लिए 29 जुलाई 2018 को कराई गई परीक्षा से एक दिन पहले पेपर आउट होने का है, जिस विवाद में आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार आ गई हैं. एसटीएफ़ ने नौ लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. आरोप हैं कि हल किए गए पेपर लाखों रुपये में बेचे गए।” फ़िलहाल अंजू कटियार को पुलिस ने गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया है।

वहीं परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की गिरफ़्तारी के बाद लोकसेवा आयोग के कर्मचारी भी विरोध पर उतर आए हैं। आयोग के कर्मचारी भी आयोग के अंदर धरना दे रहे हैं और STF की काम करने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच इस मामले पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके योगी सरकार पर निशाना साधा था तो बीजेपी प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी इसके लिए पिछली सरकार को दोष देते हैं।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved