fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
राजनीति

तीसरे चरण में मुस्लिम-दलित का दिखेगा दम, देखिये गठबंधन का पूरा समीकरण

(Image Credits: Outlook india)

लोकसभा तीसरे चरण के चुनाव आज हुए और इन तीसरे चरण की 10 सीटों में पांच ऐसी हैं जहां मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार का दबदबा रहा है। साथ ही इन पांच सीटें मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, बदायूं और संभल में यादव वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है।

Advertisement

लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण की वोटिंग में उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर वोटिंग हुई . इस चरण में उत्तर प्रदेश की यादव और मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर वोटिंग आज वोटिंग हुई . देखा जाए तो इस चरण में मुस्लिम और यादव समीकरण का टेस्ट है. आइए इस चरण की सीटों पर एक नजर डालते हैं और मुस्लिम और यादव समीकरण को समझने की कोशिश करते हैं।

यादवो के गढ़ में मुलायम यादव का काफी दमखम देखने को मिल रहा है , तीसरे चरण की 10 सीटों में पांच ऐसी हैं जहां मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार का दबदबा रहा है। साथ ही इन पांच सीटें मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, बदायूं और संभल में यादव वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है. इन सीटों पर यादव वोटरों के साथ मुस्लिमों के वोट जुड़ने के बाद आंकड़ा निर्णायक हो जाता है। इतना ही नहीं इस बार महागठबंधन में बसपा सुप्रीमो मायावती के होने के बाद महागठबंधन काफी मजबूत होता दिखाई पड़ रहा है। महागठबंधन को एक तिहाई वोट सीधे तौर पर मिलते नज़र आ रहे है।

पिछले तीन दशक में मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में यादवों के सबसे बड़े नेता रहे हैं. माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव इस बार आखिरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. वे मैनपुरी सीट से दमदख दिखा रहे हैं. ऐसे में एनडीए के सामने मुलायम सिंह यादव के आगे टिक पाना बड़ी चुनौती है।

संभल लोकसभा सीट पर 28 फीसदी मुस्लिम और 21 फीसदी यादव हैं. इसके अलावा 17 फीसदी दलित हैं. जहां तक बदायूं सीट का सवाल है तो यहां मुस्लिम, यादव जोड़ देने पर वोटों का आंकड़ा 30 के पार पहुंच जाता है. इस सीट पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव का दबदबा है। दलित, मुस्लिम एक साथ होने के कारण यहाँ भी सीट महागठबंधन को जाती दिखाई पड़ रही हैँ।


तीसरे चरण में बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, आंवला और पीलीभीत में वोट डाले गए है . सपा के कद्दावर नेता आजम खान रामपुर सीट से भाग्य आजमा रहे हैं. इस इलाके में 50 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है. आजम के सामने ना केवल अपनी सीट जीतने की चुनौती है बल्कि उनके कंधों पर रुहेलखंड इलाके की बाकी सीटों पर भी मुस्लिम वोट महागठबंधन को दिलाने की जिम्मेदारी है।

रामपुर से सटे मुरादाबाद में 41 और आंवला में 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है. इसी तरह पीलीभीत में भी करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है. यूं तो बरेली में बीजेपी जीतती रही है. इलाके में जननेता के रूप में लोकप्रिय संतोष गंगवार 1989 से बीजेपी की तरफ से जीतते आ रहे हैं. साल 2009 में कांग्रेस के प्रवीण सिंह ऐरन ने उन्हें हरा दिया था।

हालांकि यहां करीब 29 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है, जो अगर एकजुट होकर वोट करें तो नतीजे प्रभावित कर सकते हैं. पीलीभीत सीट भी बीजेपी 4 बार से जीत रही है. इस बार वरुण गांधी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. पिछले दो बार से यहां से वरुण की मां मेनका चुनाव जीतती रही हैं। अगर पीलीभीत से मुस्लिम वोट एकजुट हो जाते है तो यहाँ से भाजपा की हार तय है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved