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झारखंड: टिकट कटने से नाराज हुए बीजेपी सांसद ने छोड़ी पार्टी, निर्दलीय लड़ने की कही बात

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(Image Credits: Patrika)

लोकसभा चुनाव शुरू हो चुके है, सभी पार्टियों द्वारा पूरी तैयारी कर ली गई है। पार्टियों द्वारा अपने मनपसंद उम्मीदवार की सूची भी तय कर ली गई है। एक तरफ पार्टियों के उम्मीदवारों को टिकट मिलने से उनमे खुशी का माहौल है। वहीं दूसरी और जिन उम्मीदवारो को टिकट नहीं दिया गया है। उन लोगो में पार्टी के प्रति नाराजगी है। एक तरफ कुछ लोगो द्वारा टिकट ने मिलने पर सिर्फ नाराजगी जाहिर की जाती, वहीँ दूसरी तरफ कुछ नेता टिकट न मिलने पर पार्टी से इस्तीफा ही दे देते है।

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इसी प्रकार टिकट ने मिलने पर बीजेपी से सांसद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी के बागी लोकसभा सांसद रामटहल चौधरी ने बुधवार को पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देकर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की है। संवाददाता सम्मेलन में रामटहल चौधरी ने कहा, “मैंने बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. मैं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ूंगा और 16 अप्रैल को नामांकन दाखिल करूंगा.”

दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने सिर्फ सांसद रामटहल चौधरी का टिकट नहीं काटा है। बीजेपी ने झारखंड से इनके आलावा तीन और लोगो का टिकट काटा है। पार्टी ने रबिंद्र राय (कोडरमा) से रबिंद्र पांडे (गिरीडीह) से तथा (खुती) से करिया मुंडा का टिकट काट दिया है। बीजेपी ने रामटहल चौधरी की सीट से राज्य के खादी बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ को चुनाव मैदान में उतारा है।

रामटहल चौधरी ने टिकट काटे जाने के काऱणों की चर्चा करते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री रघुवर दास पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेरी गलती यही थी कि मैंने पारा शिक्षक, स्थानीयता, स्कूल विलय, सीएनटी-एसपीटी और पिछड़ों के आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार के फैसले के खिलाफ जाकर जन हित में मुद्दा उठाया।

सांसद रामटहल चौधरी ने कहा, “मेरा टिकट काटने और रांची से नया चेहरा उतारने पर पार्टी ने मुझसे पूछा तक नहीं. मैंने पीएम के नाम पर लोकसभा चुनाव नहीं जीता था। मुझे सच बोलने के लिए दंडित किया गया है.” उन्होंने रघुबर दास नीत राज्य की बीजेपी सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, “रघुबर दास सरकार को लोगों के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है.”


रामटहल चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि जनसंघ के समय से वे अब तक भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी को सींचते रहे। बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि भाजपा नेतृत्व ने उम्र का अधिक होना कह कर उन्हें टिकट नहीं दिया। इससे दुखी हूं। मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। इसे स्वीकर किया जाए।

बता दे की बीजेपी से रामटहल चौधरी पांच बार सांसद रह चुके हैं। चौधरी ने 1991 में पहली बार बीजेपी से रांची सीट पर जीत हासिल किया था। फिर इसके बाद वह लगातार चार बार सांसद रहे। 1996 और 1998 तथा 1999 चुनाव भी चौधरी ने जीत हासिल की। फिर 2004 और 2009 के चुनाव में कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय से सांसद को शिकस्त खानी पड़ी। 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर एक बार उन्हें मैदान में उतारा। उन्होंने उस दौरान भी जीत हासिल की, लेकिन जब उन्होंने छठी बार टिकट माँगा तो पार्टी ने इनकार कर दिया।

इस मामले में कमाल की बात तो है यह है की सांसद रामटहल चौधरी का नाम स्टार प्रचारकों के में शामिल था। बीजेपी में मगंलवार 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की थी, उसमें रामटहल चौधरी का भी नाम शामिल है। महतो का कहना है कि उनकी सीट में महतो वोटर की तादाद बहुत ज्यादा है। चौधरी ने कहा, “मैंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और झारखंड इकाई के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ को पत्र भेज दिया है. मैं रांची से 16 अप्रैल से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल करूंगा.”

सांसद ने अपने बयान में बताया था की बीजेपी उन्हें सच बोलने की सजा दे रही है। दरअसल उन्होंने कहा था की झारखण्ड की रघुवरदास नीत बीजेपी सरकार पर इल्जाम लगाया था की,राज्य की रघुवर सरकार को लोगो के जनकल्याण से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा उनके ऐसे कहने पर उन्हें दण्डित करते हुए उनका टिकट काट दिया गया।

मौजूदा सरकार में यह अक्सर देखा गया है की पार्टी के खिलाफ सच बोलने वाले को इसका अंजाम भुगतना पड़ता है। बीजेपी अक्सर उनके खिलाफ बोलने वालो पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटती है। इससे पता चलता है की बीजेपी में सच बोलने वालो और सरकार की गलतियों को सामने रखने वालो लोगो के साथ पार्टी दोहरा रवैया अपनाती है।

दरअसल मौजूदा सरकार द्वारा पार्टी के नेताओ के साथ इस प्रकार का व्यवहार इसलिए करती है, क्यूंकि बीजेपी यह नहीं चाहती की उनकी सच्चाई आम जनता के सामने आये। मौजूदा सरकार वो सभी कार्य करेगी जिससे की वो अपनी असली छवि को लोगो के सामने आने से रोक सके। पार्टी के इसी प्रकार के व्यवहार के कारण लगभग एक महीने पहले बीजेपी से एक साथ कई लोगो पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह हालफिलहाल की बात करे तो बिहार पटना साहिब से बीजेपी सांसद शत्रुघन्न सिन्हा ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

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