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मध्यप्रदेश: बीजेपी सांसद के खिलाफ बीजेपी विधायक ने कांग्रेस को किया समर्थन, सांसद ने जातिगत समीकरण को बताया वजह

Madhya-Pradesh:-BJP-MLA's-support -to-Congress-MP-going-against-BJP-MP,-MP-told-the-caste-equation-is-the-reason
(image credits: Inkhabar)

लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद भी बीजेपी नेताओं के बीच नाराजगी चल रही है। किसी किसी राज्य में बीजेपी नेता पार्टी में दूसरे दलों के नेताओं के शामिल होने से नाराजगी जाहिर कर रहे है। तो कहीं पार्टी में नेताओं के बीच आपस में किसी मुद्दे को लेकर कहासुनी की खबर सुनने को आ रही है। दरअसल मध्य्प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में बीजेपी के जीत के बाद भी पार्टी के नेताओं के बीच दरार आती दिख रही है।

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मामला सतना से बीजेपी सांसद गणेश सिंह और महर सीट से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का है। खबर यह है की, चार बार सतना से सांसद रह चुके गणेश सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से उन लोगों को धमकाने का मामला सामने आया है। जिन्होंने उनके मुताबिक चुनावों में उनके खिलाफ प्रचार किया था। सिंह के सार्वजनिक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मैहर सीट से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा है कि सांसद ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है।

विधायक त्रिपाठी ने कहा, ”अप्रत्याशित जीत से सांसद सतना गणेश सिंह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं और वे यह भूल चुके हैं कि मिली जीत उनकी लोकप्रियता नहीं है अपितु यह जीत देश के यशश्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुशल रणनीतिकार अमित शाह जी की है. यह जीत केवल सतना में नहीं हुई बल्कि पूरे देश में हुई है. इसके लिए मैं देश के सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह जी का आभार प्रकट करता हूं. साथ ही सतना जिले सहित पूरे देश की जनता का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए भारतीय जनता पार्टी पर अपना विश्वास जताया.”

नारायण त्रिपाठी ने आगे कहा ,”जीत के जश्न में डूबे सांसद ने नागौद में जिस तरह का उद्बोधन दिया वह अत्यंत निंदनीय है. उसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम होगी. साथ ही वे जिस तरह से अपने प्यादों से बयानबाजी करा रहे हैं वह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है.”

आपको बता दें की सांसद गणेश सिंह विंध्य क्षेत्र से ताकतवर कुर्मी नेता हैं। जिन्होंने लगातार चौथी बार सतना सीट से जीत हासिल की है। इस बार गणेश सिंह की जीत 2.81 लाख से अधिक मतों की रही। सांसद गणेश सिंह का यह मानना है की कथित रूप से उनकी जाति के कारण बीजेपी के कुछ लोगो द्वारा लोकसभा चुनाव में उनके खिलाफ प्रचार किया गया।


सांसद सिंह ने नागौद विधानसभा क्षेत्र में धन्यवाद सभा को सम्बोधित करते हुए, उन्होंने उन बीजेपी नेताओ और कार्यकर्ताओं पर निशाना साधा है। जिन्होंने कथित तौर पर प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के लिए प्रचार किया था। उन्होंने कहा कि, “मैं उन सभी को जानता हूं जिन्होंने भाजपा से होने के बावजूद प्रतिद्वंद्वी पार्टी के उम्मीदवार के लिए काम किया है. इसलिए मैं ऐसे कार्यकर्ताओं को स्पष्ट रूप से कह रहा हूं कि मेरे पास गलती से भी न आएं, क्योंकि मैं उनके लिए ऐसे शब्दों का उपयोग कर सकता हूं, जो अच्छा नहीं लगेगा. यदि पार्टी का उम्मीदवार आपकी पसंद का नहीं था, तो आपको घर वापस रहना चाहिए और उसके लिए प्रचार नहीं करना चाहिए, बल्कि आपने प्रतिद्वंद्वी पार्टी के उम्मीदवार के लिए खुलकर प्रचार किया.”

आपको यह भी बता दे की इस बार बीजेपी ने विंध्य क्षेत्र की सभी चार लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की। सन 2018 के विधानसभा चुनावों में भी विंध्य में बीजेपी की लहर थी। और इस लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी की लहर के कारण पार्टी के सभी चार उम्मीदवार, हिमाद्री सिंह (शहडोल) से , रीति पाठक (सीधी) से और गणेश सिंह (सतना) से और इसके साथ ही जनार्दन मिश्रा (रीवा) से जीत हासिल करने ने कामयाब रहे।

मध्य्प्रदेश के सतना जिले से भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों से पता चला है की, सांसद गणेश सिंह ने रामपुर-बघेलान के विधायक विक्रम सिंह और मैहर के विधायक नरेंद्र त्रिपाठी के अलावा सतना सीट से पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी पर निशाना साधा है। उन्हें लगता है कि जातिगत समीकरणों की वजह से इन नेताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार राजाराम त्रिपाठी का समर्थन किया था।

जातिगत कारणों से बीजेपी में एक नेता द्वारा दूसरे नेता के खिलाफ प्रचार करना बेहद ही निंदनीय है। बीजेपी नेताओ द्वारा जातीय आधार पर किसी से ईर्ष्या रखना उनकी मानसिक दुर्दशा को दिखाता है।

इस लोकसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद प्रधानमंत्री समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने इस जीत को जातिवाद के खिलाफ बताया था। और इस जीत को राष्ट्रवाद की जीत बताया। इसके साथ ही बीजेपी ने विपक्षी पार्टियों पर जातीय आधारित राजनीति करने का आरोप भी लगाया था। परन्तु अब जब उन्ही के पार्टी के कुछ नेता कथित तौर पर सिर्फ जाति को आधार मानकर अपने ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करेंगे तो इससे क्या शाबित होगा।

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