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महारष्ट्र: स्टिंग वीडियो में चारा घोटाला का हुआ खुलासा, बीजेपी और शिवसेना नेताओं ने लूटा सरकारी खजाना

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(image result: the week)

बिहार में हुए चारा घोटाले के बारे में देश की जनता को पता ही होगा, जिसके लिए मौजूदा सरकार के कुछ लोग लालू यादव पर अभी भी आरोप लगाते रहते है। लेकिन अब कुछ इसी प्रकार महराष्ट्र से चारा घोटाले का मामला सामने आता दिख रहा है। एक अंग्रेजी न्यूज चैनल इंडिया टुडे के स्टिंग में इस बात का खुलासा किया गया है। स्टिंग में दावा किया गया है महाराष्ट्र में बिहार जैसा ही चारा घोटाला हुआ है।

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एक तरह महारष्ट्र में बीते तीन सालो से सूखे के कारण मवेशियों को दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर राज्य में इस प्रकार का चारा घोटाला सामने आना निंदनीय है। मवेशियों को सूखे से बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने चारा कैंप स्थापित किए हैं। लेकिन इस व्यवस्था का बीजेपी और शिवसेना समर्थित नेताओ द्वारा ही फायदा उठाया जा रहा हैं।

बता दें की महाराष्ट्र सरकार ने इस साल मार्च महीने में किसानों के मवेशियों के लिए कई सुविधाओं देने का एलान किया था। जिसमें सरकार द्वारा सूखा प्रभावित इलाकों में चारा कैंपों के जरिए किसानों को कम दामों में चारा उपलब्ध कराने की घोषण की गई थी। इसके पश्चात 11 लाख मवेशियों के लिए करीब 1,635 पशुधन कैंपों का निर्माण किया गया। इसके तहत प्रति मवेशी के हिसाब से पशुधन सहायता 9 से 18 किलोग्राम 50 रुपये से 100 रुपये के बीच निर्धारित की गई है।

चारा कैंप से जुड़े संस्थान बीजेपी और शिवसेना समर्थित नेताओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। ये संस्थान खुद को गैर-लाभकारी सिद्धांत पर संचालित होने का दावा करते हैं। गणेश वाघमारे ग्राम पंचायत के सदस्य जो शिवसेना से भी जुड़े है, वह बीड के कालसंबर गांव में चारा कैंप चलाते हैं। उन्होंने इंडिया टुडे के स्टिंग में लूट के इस खेल पर कई खुलासे किए हैं। वाघमारे ने कहा, सभी अधिकारियों के लिए एक निश्चित राशि पहले से ही तय की गई। पशुओं को निर्धारित मात्रा से कम चारा पहुंचाया जा रहा है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं कोई भी दस्तावेज पेश कर सकता हूं। मैंने किसी को भी सप्लीमेंट मुहैया नहीं करवाए हैं। बड़े मवेशियों को दिया जाने वाला चारा 18 किलो और छोटे मवेशियों के लिए 9 किलो निर्धारित है लेकिन मैं केवल 12 और 6 किलोग्राम ही देता हूं। चारे की खपत को दस्तावेजों में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।’ इनके साथ साथ अलग अलग क्षेत्रों में चारा कैंप चलाने वाले लोगो ने भी कुछ इसी प्रकार का दावा किया। उन्होंने कहा की जाँच करने वाले अधिकारियों को भी 10 से 15 हजार रुपए दे दिए जाते हैं।


हालाँकि नेशनल दस्तक इंडिया टुडे के इस स्टिंग की फ़िलहाल कोई पुष्टि नहीं करता है। परन्तु न्यूज़ चैनल के स्टिंग के मुताबिक यह घोटाला महारष्ट्र में बीजेपी सरकार के प्रसाशन व्यवस्था पर बड़े सवाल उठाती है। इसके साथ साथ बीजेपी को अब उन सवालों पर गौर करना चाहिए जो बीजेपी द्वारा अक्सर बिहार में लालू यादव के पार्टी से पूछे जाते रहे है।

अब देखने वाली बात तो यह है की अक्सर बीजेपी और शिवसेना विपक्षी पार्टियों पर घोटाले के आरोप लगाती रही है। लेकिन अब जब उनके ही नेताओं द्वारा इस प्रकार की हरकतों को अंजाम दिया जायेगा तो वह क्या जवाब देंगे। शिवसेना अक्सर अपने सख्त रवैये के लिए जानी जाती है और सरकार से अलग लग मुद्दों पर सवाल भी करती है। परन्तु अब वह उनके नेताओं द्वारा चारा घोटाले में शामिल होने पर किस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया देगी, यह देखने लायक होगा।

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