fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
राजनीति

ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा समिति को आयकर का नोटिस जारी करने पर करी केंद्र सरकार की आलोचना

Mamata-Banerjee-criticized-the-central-government-for-issuing-notice-of-Income-Tax-on-Durga-Puja-Committee
(image credits: Hindustan Times)

अभी कुछ महीनो पहले ही केंद्र की मोदी सरकार और ममता बनर्जी के बीच का मामला थमता दिख रहा था। वहीं अब वापस उनके रिश्ते में तनाव देखने को मिल रहा है। मोदी सरकार जो अक्सर सभी धर्मो और संस्कृति से जुड़े कार्यकर्मो को सम्मान देने की बाते करते है। वही सरकार ने अब दोहरा चरित्र दिखाना शुरू कर दिया है।

Advertisement

दरअसल केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में ‘दुर्गा पूजा समिति मंच’ को नोटिस भेजा दिया है। जिसके लिए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को वहाँ के उत्सव आयोजकों की शीर्ष संस्था ‘दुर्गा पूजा समिति मंच’ को कर (टैक्स) का नोटिस जारी करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि ‘पूजा समितियों’ को आयकर के दायरे में नहीं रखा जाना चाहिए. चुनावों के दौरान हिंदू धर्म के नाम पर राजनीति करने का भाजपा पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वही लोग चुनावों के बाद दुर्गा पूजा आयोजकों से कर लेना चाह रहे हैं। मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, ‘चुनावों के दौरान, वे (भाजपा) हिंदू धर्म की बात करते हैं और इसके बाद वे दुर्गा पूजा के आयोजकों से आयकर इकट्टा करने का प्रयास कर रहे हैं.’ बता दें की दुर्गा पूजा समितियों के मंच को कथित रूप से पिछले सप्ताह आयकर का नोटिस भेजा गया।

ममता बनर्जी ने कहा कि यह त्योहार एक सामाजिक समारोह है, न कि एक वाणिज्यिक, जबकि सरकार के कुछ सामाजिक दायित्व भी हैं। उन्होंने पूछा, ‘दुर्गा पूजा समितियां आम लोगों से दान एकत्र करती हैं और प्रायोजकों को ‘पूजा’ आयोजित करने के लिए भी कहती हैं। वे अपनी कमाई से ऐसा नहीं करते हैं, तो ऐसे में आईटी रिटर्न दाखिल करने का सवाल ही कहां है?’

उन्होंने कहा, ‘मैं पूजा समितियों को आयकर के दायरे में लाये जाने के केन्द्र के रूख की निंदा करती हूं. यह पूजा का अपमान है. यह कोई वाणिज्यिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सामाजिक है और सरकार के सामाजिक दायित्व होते हैं. समाज के प्रति हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है.’


मालूम हो की दुर्गा पूजा समितियों के मंच को आयकर विभाग ने उत्सव के दौरान अपने खर्चो पर रिटर्न दाखिल करने को कहा है। यहाँ देखने वाली बात यह है की एक तरफ सरकार चुनाव प्रचार में हजारो करोड़ो रुपयों को खर्च कर देती है जिसका कोई हिसाब ही नहीं, परन्तु दूसरी और सरकार धार्मिक उत्सव में होने वाले खर्चो का हिसाब ले रही है।

सरकार को धार्मिक उत्सव से संबधित समारोह पर थोड़ा नरमी बरतना चाहिए। इन मामलो में टैक्स वसूली करना उचित नहीं लगता है। उन्हें यह समझना चाहिए की ऐसा करने पर कभी कभी लोग भी उनके खिलाफ हो सकते है, और इसके साथ सरकार के ऐसे रवैये से लोगो की धार्मिक भावना भी आहत हो सकती है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved