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मायावती के इस दाव ने बढ़ाई भाजपा की मुसीबत, कांग्रेस की भी बोलती हुई बंद

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Image Credits: The Financial Express

बसपा सुप्रीमो मायावती अपनी राजनीती की सूझ बुझ से एक बार फिर यह साबित कर दिया है की उनके आगे किसी की चाल कामयाब नहीं हो सकती चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस या अन्य राजनैतिक दल।

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उत्तर प्रदेश की सत्ता पर चार बार काबिज़ होने वाली मायावती के एक बयान ने कांग्रेस और भाजपा दोनों में खलबली मचा दी है। कांग्रेस मायावती ने इस राजनैतिक खेल को नहीं समझ सकी और कांग्रेस अब दोतरफा घिरती नज़र आ रही है।

आपको बता दे की कुछ दिन पहले ही मायावती ने एक बयान देते हुए कहा कि एससी एसटी आंदोलन को लेकर दलितों के खिलाफ एमपी और राजस्थान में तत्कालीन बीजेपी सरकार ने जो मुकदमा दर्ज कराया था अब सरकार उसे वापस ले, नहीं तो हम सरकार समर्थन वापस लेंगे।

मायावती जी के इस धमकी का सीधा असर देखने को मिल रहा है, दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारों ने दलितों पर दर्ज मुकदमें वापस लिये जाने के प्रयास तेज कर दिया।

बहन मायावती जी के इस साहसी कदम से उनके मूलभूत वोटरों में यह सन्देश गया है की चाहे सत्ता रहे या न रहे वह हमेशा ही दलितों की सेवा के लिए ऐसे कदम उठाने में पीछे नहीं हटेंगी। बहन जी ही दलितों के लिए दमदारी से आवाज उठा सकती हैं चाहे कोई उनका साथ दे या न दे वह सदैव ऐसे कदम उठाती रहेंगी ।


बसपा सुप्रीमो के इस कदम से भाजपा के अरमानो पर फिरा पानी

आपको बता दे की जिस एससी एसटी एक्ट को लेकर दलितों के आंदोलन के बाद केन्द्र की मोदी सरकार ने अध्यादेश लाकर सु्प्रीम कोर्ट के फैसले को पलटा था, उसका उसे बहुत फायदा होता नहीं दिख रहा है।

भाजपा ने यह फैसला भी अपने राजनैतिक लाभ के लिए किया था। दलितों के हितैषी बोलने वाली भाजपा सरकार ने यह सोचा की अगर देश भर में दलित मतदाता उसके साथ आ जाएं और कुछ अगड़ी और पिछड़ी जातियों का समर्थन भी उसे मिलता रहे तो आने वाले समय में उसे सत्ता से हटा पाना किसी के वश की बात नहीं होगी।

हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणामो से भाजपा के अरमानो पर पानी फिरता नज़र आने लगा है। भाजपा के इस फैसले से दलित तो उसके हुए नहीं, बल्कि सवर्ण वोटरों को भी पार्टी ने काफी हद तक खुद से दूर कर दिया।

भाजपा सरकार के बड़े बड़े पैतरे मायावती के आगे फीके पड़ते नज़र आये है। इतना कुछ करने के बाद भी दलित वोटरों को भाजपा अपने ओर नहीं लुभा पाई। वही कांग्रेस की सरकार ने भले ही उन पर दर्ज मुकदमे हटाने के बाद भी उसका क्रेडिट खुद नहीं ले पायेगी ।क्योंकि उन्हे इस बात का अहसास है कि मायावती ने ही दबाव बनाकर मुकदमें वापस कराईं हैं।

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